रविवार, 25 सितंबर 2016

पार्षद सच्चे हैं और आरोप सच्चे हैं तो वे सही रूप में शिकायत क्यों नहीं करना चाहते?

नगरपालिका में भ्रष्टाचार के आरोप लगाने वाले पार्षद सवालों के घेरे में हैं:


- करणीदानसिंह राजपूत -नगरपालिका की बैठक में एक बार फिर आरोप लगाया गया है कि भ्रष्टाचार हो रहा है? पार्षद आरोप लगाते हैं जो केवल मौखिक चर्चा करने के लिए होते हैं। बैठक में आरोप लगाने से मीडिया में चर्चा हो जाती है। 

अखबारों में नाम छप जाता है। इसके अलावा शायद अन्य सोच नहीं होती। या फिर पार्षदों के लगाए गए आरोप ही झूठे हैं। पार्षदों के आरोप सही हैं तो फिर केवल मौखिक रूप में आरोप लगाने के बजाय सही रूप में तथ्य लिख कर शिकायत क्यों नहीं करते? अगर पार्षद सच्चे हैं तो वे किसको बचाना चाहते हैं? उनको किसका भय है? या फिर यह सवाल है कि वे केवल संबंधित ठेकेदारों पर दबाव ही बनाना चाहते हैं।
सही हालत यह है कि पालिका बैठक के एजेंडे पर पार्षदों की पूर्व में कोई तैयारी नहीं होती,पालिका बैठक में पहुंचने के समय देखते हैं कि एजेंडा कया है? उस वकक्त केवल वक्त बिना तैयारी के प्रस्ताव पर बोलने व राय देने के बजाय भ्रष्टाचार का आरोप लगा देना आसान होता है।
बैठक में एक आरोप यह आया कि अतिक्रमण तोडऩे में भेदभाव किया जाता है तथा उसमें भी भ्रष्टाचार होता है। इस आरोप में भी कभी यह नहीं आया कि किस अतिक्रमण को छोड़ दिया गया और किसको तुड़वा दिया गया? कितने पार्षदों ने आज तक सूची नगरपालिका प्रशासन को दी है?
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