रविवार, 17 जुलाई 2016

रिलायंस पंप को हटाने का नोटिस भाजपा राज में जारी हुआ:सवा साल में हटा तो नहीं:


सूरतगढ़। राष्ट्रीय उच्च मार्ग पर सूरतगढ़ नगरपालिका क्षेत्र में आई जमीन पर पूर्व विधायक गंगाजल मील के पुत्र महेन्द्र मील का पंप है जिसे लोकायुक्त के आदेश से हुई जाँच में उक्त जमीन पर गलत होना पाया गया। पंप को हटाए जाने के आदेश भाजपा राज में सन् 2015 अप्रेल में हुए। आदेश संभागीय आयुक्त के कार्यालय से जारी हुए। जिला कलक्टर से होते हुए पहुंचे। सूरतगढ़ में भाजपा के विधायक राजेन्द्रसिंह भादू का राज शुरू हो चुका था। मील के पंप को हटाए जाने का आदेश मालिक तक नहीं पहुंचा या पहुंचाया नहीं गया। एक साल बाद सन् 2016 में अप्रेल में ही फिर चर्चा में पंप आया। अखबारों में खरें फोटो छपी। एक अखबार पत्रिका में तहसीलदार जी का बयान छपा कि ऐटा सिंगरासर माइनर आँदोलन में व्यस्त हैं। उसी में एक तारीख भी छपी थी कि फलां दिन को वह पत्रावली पढेंगे। उस दिन के बाद आजतक कोई कार्यवाही होने की खबर ही नहीं है। भाजपा के राज में जारी हुआ नोटिस पहुंचे या नहीं पहुंचे मामली बात नहीं मानी जानी चाहिए जबकि विधायक भी भाजपा को हो। गंगाजल मील ने भाजपा छोड़ी थी तब वसुंधराराजे के राज पर और उन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए छोड़ी थी। उसके बाद में कांग्रेस की टिकट पर 2008 में चुनाव लड़ा व जीत गए थे।
अब अचरज वाली बात यह है कि भाजपा के राज में नोटिस जारी हो और वह पंप हटाने के बजाए 1 साल तक नोटिस तामील हो जाने की भी खबर न हो तब क्या माना जाना चाहिए?



सूरतगढ़ क्षेत्र में राज तो भाजपा के विधायक राजेन्द्र भादू का है और उनकी ड्यूटी भी बनती है। पंप को हटाए जाने का आदेश वसुंधरा राजे की सरकार के काल का है। स्पष्ट रूप से वसुंधरा राजे की सरकार का आदेश है।
इस आदेश को विधायक राजेन्द्रसिंह भादू कब लागू करवाऐंगे?
कहीं ऐसा तो नहीं है कि अखबारों में छप जाने के बावजूद उनको मालूम ही नहीं पड़ा हो कि उनकी सरकार का कोई आदेश जारी भी हुआ है?
समाचार तो कई अखबारों में छप गया इसलिए मालूम नहीं पड़ा हो,लगता नहीं है।
सीधा सपाट सवाल है कि इस आदेश की क्रियान्वती क्यों नहीं हो पाई है? सरकार ने रोक दिया है या विधायक जी का कोई तालमेल हो गया है। पुराने नए दोनों विधायक गले मिल कर मिलनी कर चुके हों।
यह सारी बातें जनता के बीच में साफ होनी चाहिए।
अभी विधायक जी कर सकते हैं कि क्या हुआ है?
विधायक जी नहीं बोलेंगे तब वसुंधरा जी से ही पूछने की कोशिश होगी।
मील अदालत में चले गए हों तो वह स्थिति भी जनता को बताई जानी चाहिए।

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