Sunday, July 9, 2017

गुरूओं ने समाचार छापने का ही कहा,रोकने व दबाने का नहीं कहा:




गुरू  पूर्णिमा पर उन सभी को वंदन जिनके के दिशा निर्देशों व सीखों पर पत्रकारिता व लेखन में कार्यरत्त हूं। 


अपनी अपनी जीवन शैली। 



उन गुरूओं को वंदन जिन्होंने समाचार लेख आदि छापने का ही कहा वो निर्देश दिया,रोकने का नहीं कहा। उनके आशीर्वाद से कहूं या फिर ईश्वर कृपा से उन्हीं सिद्धांतों पर चलने का प्रयास करता रहा हूं।


सन् 1965 से लेखन में उतरा और बाद में 1969 से पत्रकारिता में। 


देश के कई दैनिकों साप्ताहिकों मासिकों में छपा। आकाशवाणी व दूरदर्शन जयपुर में भी।

आज भी दूसरों का लिखा पढऩे का भी चाव उतना ही है जितना पहले था।



इस देशमें पाठकों का मित्रों का भी भरपूर सहयोग रहा है। 




गुरू की महिमा का अनुमान नहीं लगाया जा सकता। मन मस्तिष्क में और आसपास से अनन्त तक अहसास होता है कि कोई शक्ति संचालित कर रही है। बस,वह दिव्य शक्ति मेरे साथ रहे।





करणीदानसिंह राजपूत,



( 72 वर्ष 9 माह)

सूरतगढ़।



लिखा गया 19-7-2016.
अप डेट        9-7-2017.
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