शनिवार, 18 जून 2016

आरोपों में घिरी काजल की अध्यक्षता वास्ते महिला प्रत्याशियों को हरवाया था:


भाजपा का कौनसा नेता यह नहीं जानता:
- करणीदानसिंह राजपूत -
सूरतगढ़। नगरपालिका की अध्यक्ष काजल छाबड़ा के जेठ पालिका के लिपिक राजकुमार छाबड़ा के रिश्वत में गिरफ्तार होने के बाद से भाजपा नेता और पार्टी लगातार सवालों के घेरों में फंसते जा रहे हैं लेकिन किसी एक ने भी अपनी स्वच्छता को घोषित करने की हिम्मत नहीं दिखलाई। नगरपालिका में रिश्वत के आरोप तो काजल के बनने के कुछ दिन बाद ही शुरू हो चुके थे। लेकिन राजकुमार की गिरफ्तारी के बाद और सबूतों की जरूरत ही नहीं रही।


नगरपालिका चुनाव के दिनों में पहले ही आ गया था कि विधायक राजेन्द्रसिंह भादू काजल को अध्यक्ष बनाऐंगे। काजल को अध्यक्ष बनाने के लिए पार्टी में ही शर्मनाक षडय़ंत्र रचे गए। भाजपा के कई नेता इसमें शामिल रहे और जो विधायक ने चाहा। उसके अनुरूप पार्षदों को प्रत्याशी बनाया गया था। विधायकों के हाथ खुले रखे जाने के लिए नीति तय की गई थी कि पार्टी नगरपालिकाओं में भाजपा के बोर्ड बनाना चाहती थी। काजल छाबड़ा को अध्यक्ष बनाने के लिए जरूरी था कि काजल जीते और पावरफुल नामी महिलाएं टिकट दी जाने के बावजूद हारे।
रिश्वत प्रकरण के बाद ये चर्चाएं एक बार पुन: उठ गई हैं। उस समय काजल तो कुछ भी नहीं थी लेकिन उसके अलावा पार्टी में तीन महिला नेता श्रीमती राजेश सिडाना,श्रीमती रजनी मोदी और श्रीमती परवेश सेतिया

श्रीमती राजेश सिडाना

श्रीमती राजेश सिडाना भाजपा महिला मोर्चे में राजस्थान कार्यकारिणी में मंत्री रही और सन 1992 से नारी उत्थान केन्द्र सूरतगढ़ की अध्यक्ष के रूप में कार्य करती रही जो अभी तक चल रहा है। 

श्रीमती रजनी मोदी

श्रीमती रजनी मोदी भाजपा महिला मोर्चे की जिलाध्यक्ष थी और अभी तक हैं। श्रीमती परवेश सेतिया भाजपा के वरिष्ठ कार्यकर्ता पूर्व उपाध्यक्ष नगरपालिका एवं वरिष्ठ वकील की पत्नी हैं। अगर इनमें से कोई भी भाजपा के टिकट पर जीत जाती तो काजल को अध्यक्ष पद सौंपना संभव ही नहीं था। इनको पार्षद बनने से रोकने के लिए भाजपा के नेताओं ने षडय़ंत्र रचे। श्रीमती राजेश सिडाना को महिला मोर्चे की प्रदेश कार्यकारिणी में मंत्री पद मिला हुआ था लेकिन उनके लिए असंभव पावरहीन का कहलाया गया। एक नोट भी लगा दिया गया। उनको टिकट नहीं दिया गया। राजेश सिडाना ने चुनौती दी और आजाद उम्मीदवार के रूप वार्ड नं 10 से पार्षद चुन कर आ गई लेकिन पार्टी की टिकट पर नहीं थी। उनका मार्ग बंद हो गया। श्रीमती रजनी मोदी को पहले तो टिकट देने में परेशान किया गया व रोड़े डाले गए। रजनी मोदी को टिकट तो दे दिया गया मगर भीतरघात कर हरवाया गया तथा वहां से माकपा के प्रत्याशी लक्ष्मण शर्मा को जितवाया गया। काजल छाबड़ा को जितवाने के लिए परवेश सेतिया को हरवाने के लिए वोटों का वार्डों में एक दूजे को दिलवाने का समझौता किया गया। परवेश सेतिया हारी और वहां से गुरविन्द्रकौर बेदी जीती। काजल छाबड़ा को वार्ड नं 16 से जितवाया गया।
भादू की नीति के अनुरूप काजल छाबड़ा को अध्यक्ष बनने में कोई रूकावट नहीं थी लेकिन भाजपा के अध्यक्ष बनने में एक वोट कम रहा। निर्दलीय आदि को जुटाया गया।
काजल छाबड़ा को अध्यक्ष तो बना दिया गया लेकिन अध्यक्षता उनके पति सुनील छाबड़ा ही करते हैं और जैसी अध्यक्षता हो रही है उसका जागता हुआ सशक्त प्रमाण मिल ही गया है। काजल छाबड़ा के जेठ पालिका में लिपिक राजकुमार छाबड़ा की रिश्वत लेने में गिरफ्तारी।
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