Sunday, June 5, 2016

थर्मल का कोयला पानी रोकना इन नेताओं की ताकत नहीं:


नेताओं को टकराव का रास्ता टालना उचित:
अभी तक शासन प्रशासन ने जो भी कदम उठाए हैं वे टकराव को टालने वाले ही रहे हैं:
ऐटा सिंगरासर माईनर आँदोलन:
- करणीदानसिंह राजपूत -
सूरतगढ़। सत्ता से बाहर वाले दल कांग्रेस,बसपा,माकपा,शिव सेना,जमींदारा पार्टी के नेताओं के भाषणों से कोई भी घोषणा व चेतावनी पूरी नहीं हो पाई। घेराव और रास्ता जाम नहीं कर पाए तब बहुत ताकत वाली घोषणाएं कि थर्मल को कोयला पहुंचाने वाली रेल पटरी को रोक देंगे और थर्मल को पानी पहुंचना रोक देंगे जैसी घोषणाएं पूरी करना आसान नहीं। इन घोषणाओं से धरना प्रदर्शन कर रहे लोगों में घंटे दो घंटे का जोश तो पैदा किया जा सकता है लेकिन जहां पूरी करने की बात आती है वहां पर लोग बहुत सोच विचार कर कदम उठाते हैं कि नेता खुद सबसे आगे खड़ा है या नहीं है? अभी ऐसी स्थिति दिखाई नहीं पड़ी है कि नेता खुद रेल पटरी व पानी रोकने के लिए सबसे आगे खड़े होंगे।
पहले के नेता खुद पहले आगे बढ़ते थे और लोगों को साथ लगने का आह्वान करते थे। अब जो बदलाव हुआ है उसे समझना जरूरी है। अब नेता यह नहीं कहते कि मैं आगे चलूंगा जो कुछ होगा पहले मेरे साथ होगा। अब नेता कहते हैं कि हम किसान के साथ हैं वह जो कदम उठाऐंगे उसमें साथ देंगे।
रेल पटरी रोकने पानी रोकने के मामले में एक महत्वपूर्ण बात रखी थी कि नेताओं के नामों सहित पहली दूसरी तीसरी पंक्ति की सूचियां बनाई जाए और उनको सार्वजनिक किया जाए ताकि बाद में कोई नेता और कार्यकर्ता किसी प्रकार का बहाना बना कर दूर रहने का प्रयास नहीं कर पाए। ईमानदारी से यह काम होता तो पक्का विश्वास होता लेकिन सभी भाषण दे रहे हैं और चाहते हैं कि उनके आह्वान पर किसान आगे हो जाएं। क्या इतने नेताओं में अपना नाम पहली पंक्ति में लिखने की ताकत नहीं है। कांग्रेस ने गांधीवादी तरीके से शांतिपूर्ण तरीके से आँदोलन में साथ की घोषणा की हुई है। उसने भी अभी तक घोषणा नहीं की कि वह रेल रोकने पानी रोकने जैसे जबरदस्ती वाले कदमों में साथ रहेगी। कांग्रेस के नेता पूरी तरह से चुप हैं। शासन प्रशासन इतनी अहम परियोजना का कोयला पानी किसी भी दशा में बंद नहीं करने देगी। दोनों कदमों में नेताओं व कार्यकर्ताओं के जोश से सुरक्षा बलों से किसी भी समय टकराव होने का खतरा रहेगा और अगर टकराव हुआ तो सुरक्षा बलों का बल प्रयोग भी निश्चित होगा। टकराव में अचानक हिंसा हो जाती है। वैसे तो जबरन रोकना का कदम भी हिंसात्मक की श्रेणी में आता है इसलिए कांग्रेस के स्थानीय मौजूदा नेताओं पूर्व विधायक गंगाजल मील और पृथ्वीराज मील के द्वारा साफ किया जाना चाहिए कि वे और पार्टी कहां होगी? अभी तक इन्होंने असमंजस क्यों बनाया हुआ है? अगर वे इन कदमों में साथ हैं तो गांधीवादी तरीके वाली घोषणा क्यों की हुई है? वैसे अन्य पार्टियों के सूरतगढ़ के नेता हैं उन्होंने कभी इस प्रकार का शक्ति प्रदर्शन सूरतगढ़ में तो किया नहीं इसलिए लगता नहीं कि वे भाषणों से कहीं आगे बढ़ेंगे। 

ये चेतावनियां 12 जून के लिए दी हुई हैं जिसमें अभी समय है और सुलह का कोई कदम उठाना पीछे हटना और हारना नहीं होता। जहां तक माइनर की मांग है उसकी घोषणा बिना सोचे समझे किसी भी हालत में नहीं की जा सकती जैसी मांग की जा रही है। सरकारी कदम कहें या प्रशासन के कदम कहें अब तक की कार्यवाही टकराव को टालने की रही है जिस पर भी गौर करना चाहिए। विधायक राजेन्द्रसिंह भादू ठुकराना पड़ाव में अभी फिर पहुंचे और बात रखी व सरकारी प्रयास जो हो रहे हैं उसकी जानकारी दी। विधायक का यही प्रयास हो सकता है जो निभाया गया है। आँदोलनकारियों को जंचना न जंचना अलग बात है जो सभी विपक्ष के नेताओं से संचालित हो रहा है।
यहां पर टकराव को टाला जाना ही उचित है।
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