मंगलवार, 21 जून 2016

योग दिवस पर नेता:कविता


योग दिवस पर अनेक नेता
कसमसा रहे थे।
अपने तम्बूरे से पेट पर
हाथ फिरा फिरा
मन की बात
अपने ही मन से
कर रहे थे।
खाली पेट
कैसे करें योग,
हर समय खाते
रहे हैं और
खा खा कर पेट
तम्बूरा बना चुके हैं।
अब मोदी जी के
कहने पर
पेट को खाली
कैसे करें?
इसमें तो
सारा धन दौलत
जमा हैं।
नोटों की कितनी गड्डियां,
कितनी खदानें
कितनी फाईलें
कितने दफ्तर
पेट में भरे हैं।
कैसे करें योग
पेट को कैसे करें खाली?
मानलें मन की बात भी
मगर पेट को खाली करना
इतना आसान नहीं।
पेट
कैसे हो सकता है खाली
हर वक्त कोई न कोई
आ जाता है
और ठूंस जाता है
पेटी खोका।
कैसे समझाऐं
पी एम को
पार्टी के माननीयों
को भी भेंट चढाने
होते हैं
पेटी और खोके।
पार्टी का जन्म,
सत्ता के साल
दो साल की सफलता
के समारोह तो
खुशियों खुशियों में
कर जाते हैं
करोड़ों के वारे न्यारे।
सच्चे मन से भी
खाली करना शुरू
करें पेट आज से
तो भी
कई साल लग जाऐंगे।
भरे पेट से योग नहीं होता
लेकिन भरे पेट से
मन की बात हो जाती है।
बड़े विचित्र है
मन और तन
भरे पेट हो तो
दोनों
सब समझ जाते हैं
अब कैसे समझाऐं
कि खाली पेट
रहो योग करने को।
एक दिन के वास्ते
आदत बदलनी
कितनी होगी
खतनाक।
ऊपर वाले ने
मांग ली पेटी
या मांग लिया खोका
तो वह कैसे मानेगा कि
हम योग करने लगे हैं
और खाली पेट रहने लगे हैं।
तब आप कैसे बचाऐंगे?
फंस गए या फंसा दिए गए
तब क्या होगा?
कितनी गजब ढाऐगी
वह दशा
जब फंदे से छूटने के लिए
अलग से भेंट
चढ़ानी होगी?
मोदी जी
एक काम करो
देश को पेपर लैस
करने में लगे हो।
सरकारी इन्सान को
हैंड लैस करदो।

ना लेना होगा
ना देना होगा
लुढ़कता हुआ
योग करता रहेगा।
........


करणीदानसिंह राजपूत,
स्वतंत्र पत्रकार,
सूरतगढ़।

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