Sunday, May 7, 2017

कासनिया काल में भूमि का मुफ्त पुख्ता आवंटन और भादू काल में लाखों का खेल



सूरतगढ़ क्षेत्र के लोग क्या भूलें क्या याद करें?
रामप्रताप कासनिया ने जब 4 हजार से अधिक लोगों को मुफ्त में पुख्ता आवंटन करवाया उस समय वसुंधरा राज था।
अब राजेन्द्रसिंह भादू के काल में बिना लाखों के बात नहीं बनती और अब भी है वसुंधरा राज।-
 27- 6- 2016.
अप डेट 7-5-2017.


करणीदानसिंह राजपूत - 

सूरतगढ़। विधायक रामप्रताप कासनिया ने अपने कार्यकाल में टिब्बा क्षेत्र में और अन्यत्र 4 हजार से अधिक किसानों को कृषि भूमि का मुफ्त में पुख्ता आवंटन करवाया था तब आवंटन की घोषणा के साथ ही किसान का मीठा मुंह टॉफी गोली खिला कर करवाया जाता था। कासनिया टॉफियों से भर मर्तबान लगकर आते और अपने हाथों से मुंह मीठा करवाते। एक बार घर लौटने की जल्दी में बसों में बैठ गए थे। उनको बसों से उतार कर उपखंड कार्यालय में बुलवाया था तथा भूमि का आवंटन करवाया था। वे 70 किसान थे। उनमें से 60 की पत्रावलियां पूर्ण थी उनको उसी समय पुख्ता आवंटन किया गया था। हर ओर चर्चा हो रही थी कि क्या गजब का विधायक है मुफ्त में जमीन जिंदगी भर की पाढियों की रोजी रोटी और साथ में मीठा मुंह। सन 2003 से 2008 तक का वसुंधरा राज ही था। भाजपा का राज। कासनिया उस समय पीलीबंगा से निर्दलीय विधायक जीते थे। उन्होंने टिकट नहीं मिलने पर भाजपा से टिकट लेकर आए गंगाजल मील को हराया था और साबित किया था कि भाजपा ने गलत  आदमी को टिकट दी। उस समय पीलीबंगा विधानसभा क्षेत्र में सूरतगढ़ तहसील का बहुत बड़ा क्षेत्र हुआ करता था।

 वसुंधरा से निशुल्क आवंटन के आदेश कासनिया ने ही करवाए थे। कुछ लोगों ने जल्दी के चक्कर में पुख्ता आवंटन की जो राशि निर्धारित थी वह भरदी थी। लेकिन 4 हजार लोगों को निशुल्क आवंटन हुआ। उसे ऐतिहासिक माना जाना चाहिए। 

अब विधायक राजेन्द्रसिंह भादू के काल में जब लाखों रूपए से आवंटन का भेद खुलता है एसीबी की छापेमारी होती है तो स्वाद कड़वा हो जाता है।

 कृषि भूमि के पुख्ता आवंटन में विधायक समिति का सदस्य होता है। उस समय कासनिया थे और अब विधायक भादू। आवंटन सलाहकार समिति में विधायक, प्रधान,सरपंच सदस्य होते हैं। अब विधायक भी भाजपा का और प्रधान भी भाजपा की और सरकार भी भाजपा की।
कांग्रेस का राज 2008 से 2013 तक रहा था। इस राज के दौरान वसुंधरा राजे ने परिवर्तन यात्रा की और सूरतगढ़ में नई धानमंडी में लगे मंच पर खूब नाची झूम झूम कर नाची। साथ में राजेन्द्र भादू भी नाचे। राज में परिवर्तन आया लेकिन कैसा परिवर्तन आया? यह सबके सामने है। रोजाना ही कहीं न कहीं कमल खिलता है और मालूम पड़ता है,कितना कीचड़ वहां पर है।
हर ओर कीचड़ क्यों पैदा हो रहा है? कोई भी विभाग बिना कीचड़ के नजर क्यों नहीं आ रहा? कीचड़ पैदा होने के पीछे क्या राज है? यह जो लाखों के खेल हो रहे हैं उनमें आखिर किस किस का कितना कितना हिस्सा होता है? लगता नहीं कि कोई अधिकारी कर्मचारी लाखों रूपए खुले आम लेकर अकेला खाता हो? किसी को भी विश्वास नहीं होता? 


जनता का भरोसा इसलिए टूटता जा रहा है कि कोई भी राजनेता खुले आम यह घोषणा नहीं करता कि वह खुद,उसके परिवार का कोई सदस्य रिश्वत नहीं लेता,ठेकेदारी नहीं करता। कहीं न कहीं गड़बड़ तो जरूर है। यह घोषणा भाजपा नहीं करवाती और मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे भी नहीं करवाती। पार्टी और मुख्यमंत्री ये घोषणाएं क्यों नहीं करवाती? विधायक खुद भी नहीं करते? विधायक खुद भी कर सकते हैं ये घोषणाएं।
भूमि के पुख्ता आवंटन में जब विधायक और प्रधान सदस्य हों तब किसी को भी अधिकारी को लाखों रूपए देने की हालत क्यों होती है? उसे विश्वास क्यों नहीं होता कि समिति में हमारे विधायक हैं और आवंटन अपने आप समिति की बैठक में हो जाएगा। यह भरोसा क्यों नहीं है? 


जमीन का कास्तकार विधायक से मिलने के बजाय अधिकारी से क्यों मिलता है और लाखों रूपए देने की बात क्यों मान लेता है? कभी विधायक ने यह जानने की कोशिश क्यों नहीं की? आवंटन समिति में भी पूछा जा सकता है कि किसी ने कोई पैसा टका लिया तो नहीं है? यह बात किसान से क्यों नहीं पूछी जाती? क्या इसके पीछे कोई राज है? 

भाजपा ने खुले आम कहा था कि भ्रष्टाचार मुक्त शासन होगा तो फिर ऐसा शासन क्यों नहीं दिया जा रहा कि किसी को रिश्वत देने को मजबूर होना पड़े।
मामला चाहे उपखंड का हो या नगरपालिका का हो। विधायक को यह मालूम करना चाहिए कि लाखों रूपए के लेनदेन में किस किस का कितना कितना हिस्सा बंटता रहा है। सूरतगढ़ का उपखंड अधिकारी भू आवंटन अधिकारी 3 लाख के प्रकरण में सामने आए और हनुमानगढ़ का एडीएम 5 लाख में पकड़ा जाए और भेद खुले कि एडीएम ने तो पचास लाख रूपए मांगे थे। ऐसा संभव नहीं है कि कोई अधिकारी एकेला रकम जामता हो और उसमें जयपुर को हिस्सा नहीं जाता हो?


नगर पालिका अध्यक्ष काजल छाबड़ा का जेठ राजकुमार छाबड़ा नगरपालिका लिपिक रिश्वत के आरोप में पकड़ा जाए और विधायक राजेंद्र सिंह भादू अपना मुंह नहीं खोले तो आश्चर्य तो होता है। नगरपालिका के अंदर व्याप्त भ्रष्टाचार पर काजल छाबड़ा ने भी मुंह नहीं खोला। आखिर क्यों?
यह हिस्सा किस किस को कितना कितना जाता है? यह राज कभी भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो भी खोलने की कोशिश नहीं करता। भाजपा ने भ्रष्टाचार मुक्त शासन की घोषणा की थी तो कमसे कम स्वयं मुख्यमंत्री ही इस राज का पर्दाफाश करवाए कि कहां कहां पर इस तरह से कमल खिलाए जा रहे हैं?






::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::

No comments:

Post a Comment

Search This Blog