सोमवार, 4 अप्रैल 2016

ईओ राकेश मेंहदीरत्ता के विरूद्ध सूरतगढ़ में घोटाले का मुकद्दमा दर्ज:


मुकद्दमा नं 155 दि.4-4-2016 को दर्ज:धोखाधड़ी,षडय़ंत्र रचने,फर्जी रिकार्ड तैयार करने की धाराएं:
स्पेशल रिपोर्ट- करणीदानसिंह राजपूत -
सूरतगढ़ 4 अप्रेल 2016.
नगरपालिका का ईओ राकेश अरोड़ा मेंहदीरत्ता सरकार के साथ षडय़ंत्र रच कर धोखा देने व फर्जी रिकार्ड तैयार करने व नुकसान पहुंचाने के नए आपराधिक मुकद्दमें में फंस गया है जो उसने नगरपालिका सूरतगढ़ में किया। विकास योजना में आरक्षित भूमि पर एक भूखंड को गैरकानूनी रूप से नियमित किया गया। अगले दिन उसका सब रजिस्ट्रार के पास पंजियन हो गया और उसके बाद उसका गैरकानूनी बेचान हो गया। नए मालिक ने उसको तत्काल ही व्यावसायिक में बदलवा लिया।
वर्तमान में ईओ राकेश मेंहदीरत्ता अनूपगढ़ में पद स्थापित है तथा यौनशोषण व भ्रष्टाचार के मुकद्मों में फंसे हुए हैं। यह नया मुकद्दमा बाबूसिंंह खीची ने दर्ज कराया है। इसकी जाँच सिटी थानाधिकारी पुलिस इंसपेक्टर नारायणसिंह भाटी करेंगे। बाबूसिंह खीची भाजपा के वरिष्ठ कार्यकर्ता हैं तथा पिछले कुछ सालों से भ्रष्टाचार के विरूद्ध अभियान चलाए हुए हैं। 

बाबूसिंह खीची 
नए मुकद्दमें में राकेश मेंहदीरत्ता पर आरोप है कि उसने केसरीसिंह पुत्र मनीराम निवासी 5 पीपीए तहसील पदमपुर के साथ मिल कर षडय़ंत्र रचा तथा केवलराम पुत्र मिश्रीलाल के नाम से एक प्रार्थनापत्र भूखंड नियमन का लिया। उक्त भूखंड त्रिमूर्ति मंदिर के पास में वार्ड नं 8 में 277.7 वर्गगज का था। राकेश अरोड़ा ने जेइएन को 28-11-2011 को मौके की रिपोर्ट करने के लिए आदेश दिया। उसने रिपोर्ट व नजरी नक्षा दिया जिसमें मौके पर केवल चारदीवारी होना पाया। उसमें मकान आदि बने होना नहीं दर्शाया गया था। राकेश अरोड़ा ने दिनांक 22-12-2012 को उक्त भूखंड को नियमन करने का प्रस्ताव ले लिया। जिसमें बोर्ड की बैठक में रखे जाने का कोई उल्लेख नहीं था। 
राकेश अरोड़ा ने 4-1-2012 को इस पत्रावली को असाधारण गति दी और संबंधित शाखाओं के कर्मचारियों पर दबाव डाल कर रिपोर्ट ली। इस पर अध्यक्ष नगरपालिका से 9-1-2012 को अनुमोदन भी करवा लिया और उसी दिन नियमन की रकम भी जमा करवा ली। दिनांक 11-1-2012 को पट्टा नं 25 तैयार कर राकेश अरोड़ा ने खुद के हस्ताक्षर किए तथा अध्यक्ष के हस्ताक्षर भी करवा लिए। राकेश अरोड़ा ने उसी दिन उप पंजियक कार्यालय में उपस्थित होकर पंजियन भी करवा दिया। उक्त पट्टे पर शर्त थी कि इसका नगरपालिका की बिना अनुमति के आगे किसी को बेचान नहीं कराया जा सकता।
इसकी गैरकानूनी खरीद अगले ही दिन 12-1-2012 को केसरीसिंह पुत्र मनीराम ने विक्रयपत्र से कर लिया। केसरीसिंह पुत्र मनीराम ने 27-1-2012 को राकेश अरोड़ा को एक आवेदन किया जिसमें पट्टा नामतरण अपने नाम करने का लिखा। सरकारी नियमों शर्तों के मुताबिक यह नामांतरण नहीं हो सकता था लेकिन ईओ ने नियमों को तोड़ते हुए 24-2-2012 को पट्टे का नामांतरण केसरीसिंह पुत्र मनीराम के नाम पर कर दिया। केसरीसिंह पुत्र मनीराम ने 5-3-2012 को फार्म भर कर इसको व्यावसायिक में कन्वर्ट करने का लिखा। ईओ ने उक्त फाइल तैयार की और वरिष्ठ नगर नियोजक बीकानेर को  30-5-2012 को सौंपी। जिसमें वहां पर दुकाने होना दर्शा दिया।
पुलिस थाना सिटी सूरतगढ़ में उक्त मुकद्दमा  अप्रेल 2016 को दर्ज हुआ है। यह भूखंड करोड़ों रूपयों का है।


पुलिस इंसपेक्टर नारायणसिंह भाटी



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