Sunday, April 3, 2016

राकेश मेंहदीरत्ता को कानून से कितने दिन बचा पाऐंगे अखबार और दोस्त:




ईओ राकेश मेंहदीरत्ता पिछले करीब 1 साल से पुलिस और कानून से बचने के लिए कोई न कोई नया गेम खल रहा है और उसमें दोस्त और कुछ अखबार भी रोल अदा कर रहे हैं। लेकिन यह लुकमिचनी कितने दिन तक खेली जा सकती है? इस प्रकार की लुकमिचनी इस देश में बड़े बड़े राजनीतिज्ञ और अरबों रूपए की देश विदेश में संपत्ति रखने वाले खेल कर थके और सरेंडर कर गए या फिर पुलिस ने दबोच लिया। उनके आगे ईओ राकेश मेंहदीरत्ता कुछ भी ताकत नहीं रखता। बड़े बड़े लोग आज महीनों से और सालों से जेलों में बंद हैं। उनमें भ्रष्टाचारी भी हैं व दुराचारी भी हैं। खुद को सच्चा बताने वाले भी उनमें हैं। उन लोगों के दोस्त और अखबार व चैनल बहुत थे और पावरफुल भी थे लेकिन बचा नहीं पाए। 

राकेश मेंहदीरत्ता के दोस्तों में संजय धुआ है जो नए नए प्रकार के गेम बना रहा है लेकिन इस प्रकार के गेम से मामलों की जांच को लटका कर देरी ही कराई जा सकती है। उनको समाप्त नहीं करवाया जा सकता। जिस दिन संजय के प्रकरण या गेम जाँच मं आ जाऐंगे तब क्या होगा?
कुछ अखबार हैं जो राकेश मेंहदीरत्ता की तरफ से जो कार्यवाही होती है वह तो प्रकाशित करते हैं और जब उसके विरूद्ध पुलिस कोई कार्यवाही करती है या कोई प्रकरण दर्ज होता है तो उसे नहीं छापते।
मेंहदीरत्ता ने एक महिला पर ब्लेकमेलिंग का प्रकरण दर्ज करवाया तब उसकी न्यूज छापी गई। पीडि़त महिला ने जब प्रकरण दर्ज करवाया तब उन्हीं अखबारों ने नहीं छापी। अब पीलीबंगा पुलिस ने छापा मारा वह न्यूज नहीं छापी गई। लेकिन मेंहदीरत्ता की पत्नी ने 12 लाख रूपए का आरोप लगाया और एसपी को केवल पत्र लिखा। वह छापा गया। पूर्व विधायक हरचंदसिंह सिद्धु ने एसपी से मिल कर जाँच का पत्र दिया कि मालूम किया जाए कि यह रकम कहां से आई? वह न्यूज अखबारों ने नहीं छापी। अखबारों की यह नीति भ्रष्टाचार व दुराचार को पनपाने वाली ही कही जा सकती है। इस प्रकार की नीति से कोई भी अखबार कभी भी किसी को भी राकेश मेंहदीरत्ता को भी बचा नहीं सकते।
मेंहदीरत्ता के घोटाले तो इतने अधिक हैं कि मामले आगे भी दर्ज होते रहेंगे। आखिर कानून से पुलिस से बचा नहीं जा सकता।
मेंहदीरत्ता सही है और कोई घोटाला नहीं किया और महिला कर्मचारी का यौनशोषण नहीं किया है तथा आरोप झूठे हैं तो वह कानून के समक्ष हाजिर होकर सही रूप में मुकद्दमें लड़ सकता है।

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