सोमवार, 14 मार्च 2016

कानौर हैड पर लाठी-गोली कानून के विपरीत चलाई ~ पूर्व विधायक हरचंद सिंह सिद्धू


कानौर हैड पर ऐटा-सिंगरासर माइनर की मांग कर रहे
निहत्थे निर्दोष किसानों पर लाठी व रबड़ गोली चलाई जाने की
घटना को वरिष्ठ वकील व पूर्व विधायक स. हरचंद सिंह सिद्धू ने
कानून की धाराओं के विपरीत बताया है। सिद्धू ने आरोप लगाया कि
राह चलते एक जने गोदारा पर रबड़ की गोली मार कर चोट
पहुंचाना पुलिस की गैर कानूनी कार्यवाही का पुख्ता प्रमाण है और
प्रशासन में कहीं भी कानून के प्रति जि मेवारी है तो इस अपराध
को दर्ज कर अनुसंधान करवाए व दोषियों को सजा दिलवाए।
पूर्व विधायक ने इस घटनाक्रम की निंदा करते हुए पुलिस प्रशासन
एवं जिला प्रशासन, कुछ कथित नेताओं की जिन्होंने भड़काऊ भाषण
दिए व पत्रकारों के आचरण को भी गैर जि मेदाराना बताया है
जिन्होंने अपने कैमरे प्रशासन को सौंप दिए। सिद्धू ने कहा है कि
जब नेता भड़काऊ भाषण दे रहे थे तब पुलिस व जिला प्रशासन ने
कार्यवाही क्यों नहीं की?
सिद्धू ने कहा है कि कैमरों के बाबत एतराज नहीं करके
पत्रकारों ने अपनी पत्रकारिता को  कलंकित किया है। पत्रकारों
को एतराज करना था व कैमरे जब्ती की फर्द बनवानी थी। पत्रकारों
की इस कार्यप्रणाली से पुलिस लाठीचार्ज की एक फोटो भी अखबारों
में नहीं आई। मीडिया कर्मियों का इस प्रकार का सहयोग
आपत्तिजनक है। सिद्धू ने सवाल उठाया है कि क्या बेगुनाह और अनजान
लोग पानी मांग कर गुनाह कर रहे थे। उन पर लाठीचार्ज घोर
आपत्तिजनक है।
सिद्धू ने सवाल किया है कि प्रशासन उन 2 व्यक्तियों को दोषी क्यों
नहीं ठहराता जिन्होंने सिंगरासर माइनर वास्ते लोगों को
आंदोलित किया व राजनीतिक रोटियां सेकी। एक पांच साल तक
विधायक रहे व उनकी पार्टी सत्ता में थी तब माइनर स्वीकृत क्यों
नहीं करवाई?
दूसरे व्यक्ति ढाई सालों से विधानसभा सदस्य हैं और उनकी पार्टी
का प्रचंड बहुमत है, फिर क्या कारण रहा है कि यह माइनर
स्वीकृत नहीं हुआ। वे किस मुंह से जनता को गुमराह कर रहे
हैं कि सिंगरासर माइनर मांग नहीं हमारा हक है। विधायक है
मगर जनता को हक दिलाने में असमर्थ हैं।
सिद्धू ने राजेन्द्र नाम संबोधन करते हुए साफ आरोप लगाया है और
सलाह दी है कि चंद चाटुकार अखबारों की बेबुनियाद खबरों को
भूल जाएं और जमीनी हकीकत को पहचानें वरना तुम्हारा हश्र भी
तुम्हारे परिवार की तरह होगा।

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