Monday, November 14, 2016

पाँच वर्षीय माधव उपाध्याय का चंचल मन करता चित्रकारी


-रिपोर्ट - करणीदानसिंह राजपूत
सूरतगढ़। बचपन की चंचलता में बच्चे खेलकूद चित्रकारी गायन नृत्य नाटक जो उनके सामने आता है उस ओर खिंचते जाते हैं। उनको शिक्षा संस्थान में चाहे घर पर और चाहे टीवी आदि में दृश्य के रूप में जो बात दिल को छू जाती है उसी को करने की ठान लेते हैं। इसी प्रकार के बचपन से निकले कलाकार बाद में नाम कमाते हैं और लोगों के दिल दिमाग में बस जाते हैं। उनको यह परवाह नहीं होती कि उनके बचपन की इन कलाकारियों को लोग किस मन से देखते हैं। वे अपनी धुन में खोए हुए काम करते हैं।
ऐसे ही एक बालक माधव उपाध्याय पर मेरी नजर पड़ी। वह बड़ी तन्मयता से अपने सामने के चित्र को देख कर रेखांकन करता और उनमें रंग भरता जा रहा था।
श्रीमती पूजा एवं दीपक उपाध्याय का पाँच वर्षीय पुत्र माधव सरस्वती उच्च माध्यमिक विद्यालय के प्रांगण में अपनी धुन में रमा था। उसकी चित्रकारी को देखकर पूछा तो उसने बताया कि वह कक्षा दो में पढ़ता है। उसके जवाब से मालूम पड़ा कि चित्रकारी करना और उनमें रंग भरना अपने आप मन में ही उपजा। किसी ने उसको खास खास चित्र बनाना और उनमें खास खास रंग भरना नहीं सिखलाया और न ऐसा करने को कहा। माधव के दादा अध्यापक राजेन्द्र शर्मा ने भी कहा कि उसके मन में आता है उसी का चित्र बनाता है और रंग भरता है।
बालमन में उपजा यह चित्रकारी का शौक उसे किस और ले जाएगा। यह वक्त बताएगा। फिलहाल उसके कुछ रंग भरे हुए चित्र यहां पर प्रकाशित किए जा रहे हैं। 



24-1-2016.
Update 14-11-2016.
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