Sunday, January 31, 2016

एडीएम एसडीएम तहसीलदार कार्यालयों का पूरा क्षेत्र बदबू से घिरा


-प्रतिदिन हजारों लोग इन कार्यालयों में पहुंचते हैं तब उनका स्वागत होता है मूत्र की गंध से और दृश्य में आते हैं  किसी दीवार या कोने में मूत्र त्याग करते लोग:इन कार्यालयों में जो टायलेट हैं उनका भी बुरा हाल है। ताले तक लगे मिलते हैं। शर्मनाक यह है कि महिलाएं यह सुविधा कहां से प्राप्त करें?
- यहां की बदबू से इनकी कॉलोनियां और आसपास के लोग भी प्रभावित हो रहे हैं।
- करणीदानसिंह राजपूत -
सूरतगढ़। अतिरिक्त जिला कलक्टर,उपखंड अधिकारी व राजस्व तहसीलदार के कार्यालयों में कार्यों के लिए पहुंचने वाले लोगों को बड़ी परेशानी और मजबूरी में समय व्यतीत करना पड़ता है। प्रशासनिक कार्यालयों में पहुंचने वाले लोगों को सार्वजनिक निरीक्षण गृह के पास की सड़क से जाना आना होता है। कार्यालयों की ओर आने वाली सड़क पर घुसते ही सार्वजनिक निरीक्षण गृह की दीवार के पास खुला मूत्र त्याग की सुविधा लोगों ने ले रखी है। 
यहां पर झाडिय़ों को काट कर लगाया हुआ है लेकिन मृत्र के वेग को रोकना तो संभव नहीं। कितनी ही लगादो झाडिय़ां लोग मजबूरी में वहां पर गरदन नीची कर अपना काम कर लेते हैं। 
इसके कुछ कदम आगे ही सरकारी आवास से जुड़ा हुआ एक खुला नोहरा पड़ा है जो खुला मूत्र स्थान और मल त्याग स्थान बना हुआ है या लोगों ने अपनी मजबूरी में बना लिया है। इसके आगे इन कार्यालयों की दीवारें भी मूत्र त्याग की सुविधाएं प्रदान करने वाली बनी हुई हैं। इन कार्यालयों में भी बने हुए शौचालयों मूत्रालयों की हालत अच्छी नहीं है। सभी कार्यालयों में महिला कर्मचारियों को भी परेशानी होती है। बाहर से कार्य कराने के लिए पहुंचने वाली महिलाओं के लिए भी सुविधा नहीं है।
तीनों अधिकारी मजिस्ट्रेट हैं और पावरफुल होते हैं। इनके आवास कोठियां और कर्मचारियों के आवास भी इसी क्षेत्र में है। इनको अधिकारी तौर पर तथा व्यक्तिगत रूप से इस हालत में सुधार कराने के लिए उचित कदम सख्त कदम उठाना चाहिए।
    अतिरिक्त जिला कलक्टर का पद जिला कलक्टर से कोई कम नहीं होता। यह केवल प्रशासनिक दृष्टि से ही व्यवस्था होती है।
नगरपालिका की सफाई व्यवस्था के लिए इन मजिस्ट्रेटों को अर्जियां दी जाती है लेकिन इनके दफ्तरों के आसपास का हाल इतना बुरा है कि सोचना पड़ेगा कि इस इलाके में रहने वाले बुद्धिजीवी कैसे पूरा दिन व्यतीत कर पाते हैं? एक सवाल जनता में से और उठा है कि महिलाएं भी इन कार्यालयों में आती जाती हंै,वे कितनी परेशानी भोगती हैंï?
अभी गणतंत्र दिवस समारोह के कारण इन कार्यालयों के आगे कुछ सफाई हो पाई है, लेकिन वहां से टूटे हुए सीमेंट के टी गार्ड हटाए नहीं गए। 


दीवारों पर लोगों के पोस्टर लगे हुए पड़े हैं। किसी को भय नहीं है दीवारें खराब करने का। तहसील और पास की पीडब्ल्यूडी कार्यालशें की दीवारों पर पोस्टर लगे हुए हैं। नारे लिखे हुए पड़े हैं।


अखबारों में सूरतगढ़ की गंदगी पर आए दिन कुछ न कुछ सचित्र छपता रहता है ताकि प्रशासन कोई कार्यवाही करे लेकिन कोई जागता नहीं है। नगरपालिका ने जो अव्यवस्था पूरे शहर में फैला रखी है वह अपने आप में चर्चा की जाने वाली है। सुभाष चौक पर एक मूत्रालय बना हुआ है। इसके महिला वाले मूत्रालय पर पोस्टरों की गंदगी है जिसे नगरपालिका साफ नहीं कराती और पोस्टर लगवाने वालों पर कानूनी कार्यवाही नहीं करती। यह मूत्रालय शाम को चार बजे के बाद फास्ट फूड की रेहडिय़ों से घिर जाता है। महिलाओं को तो सुविधा तक नहीं मिल पाती। वैसे भी वहां पर ताला लटका हुआ रहता है।






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