Monday, November 30, 2015

विधायक राजेन्द्र भादूकी कोठी कटले में सड़कें हड़पी वसुंधरा को शिकायत:



विधायक राजेन्द्र भादू  परिवार के कोठी कटले की मुख्यमंत्री को शिकायत
करोड़ों रूपए की सड़कें और जगह अतिक्रमण हटा कर खुलवाई जाए
पूर्व विधायक स.हरचंदसिंह सिद्धु की शिकायत से भाजपा सरकार घिरेगी
अब खुलेगा हाई कोर्ट जाने का रास्ता
- करणीदानसिंह राजपूत -
सूरतगढ़। पूर्व विधायक स.हरचंदसिंह सिद्धु ने आखिर बीड़ा उठाया है। विधायक राजेन्द्रसिंह भादू व परिवार के कोठी कटले में शामिल करली गई सड़कें और जगहों का अतिक्रमण हटवाने का पत्र मुख्यमंत्री को दिया है। करोड़ों रूपयों की जगह जो मुख्य बाजार में बीकानेर रोड से चिपते हुए है को भादू परिवार ने कब्जे में ले लिया और उसकी सड़कें तक कब्जे में ले ली। टाउन प्लानर के बीकानेर कार्यालय से स्वीकृत नगरपालिका के नक्से को धत्ता बता दिया गया। नगरपालिका में किसी की हिम्मत ही नहीं थी कि भादू परिवार जनों के अतिक्रमणों को रोके। अब भादू परिवार ने दोनों विशाल कटले पर आधुनिक मार्केट बनाने की तैयारी की है जिनमें पालिका की जमीन और सड़कें भी कब्जे में है।
राजस्थान की वसुंधरा राजे सरकार राजेन्द्र भादू परिवार के मामले में सच्च को ओट में रखते हुए बचाव में आएगी तो बुरी तरह से घिरेगी। राजस्थान की प्रतिपक्षी पार्टी कांग्रेस इसे बड़ा मामला मान कर राज्य स्तर पर जवाब मांग सकती है और अतिक्रमण हटवाने का दबाव भी डाल सकती है। राजेन्द्र भादू जिस कोठी में निवास करते हैं वह सड़क के बीच में बनी हुई है और कटले इसके अलावा हैं।
पूर्व विधायक स.हरचंदसिंह सिद्धु ने शिकायत में लिखा है 1967 में बीकानेर की सड़क पीपेरन तक जाती थी जो कस्बे की हरिजन कॉलोनी में से निकली जिसमें कई प्लॉट आ गए थे। इन्हीं पलॉटों में दो प्लॉट बीरबल पुत्र मोटाराम भादू ने अपने पुत्रों के नाम से खरीदे और नगरपालिका से उनका तबादला लेकर 1280 वर्गफुट जमीन अमृतलाल लूणकरणजैन के प्लाटों के पास :वर्तमान जगह:पर लिया तथा करीब 8 हजार वर्ग फुट पर अतिक्रमण कर विशाल रिहायशी भवन बना लिया। नगर नियोजन कार्यालय बीकानेर में तैयार नक्से में चार सड़कें दिखाई गई जो बीरबल ने अपने प्लाटों में समाहित करली। इनका बंटवारा अपने पुत्रों राजेन्द्र भादू व अन्य पुत्रों महेन्द्रसिंह,विजेन्द्रसिंह,रविन्द्रसिंह के नाम कर दिया। यहां पर व्यावसायिक दुकानें बनाली व किराए पर दे रखी है। इन दुकानों का कनवर्जन नहीं हुआ है तथा नगर नियोजन के स्वीकृत नक्से को धत्ता बता दिया।
शिकायत में लिखा है कि राजेन्द्र भादू का आवासीय भवन सड़क में बना हुआ है जिससे सड़क की चौड़ाई बहुत कम हो गई है। भादू ने विधायक बनने के बाद व्यावसायिक निर्माण कराने के लिए इसे व्यावसायिक कनवर्ट करवा लिया जबकि मालिकाना अधिकार नहीं है। बिना मालिकाना अधिकार के उक्त कन्वर्टन अवैध है। पूर्व में निर्मित सभी दुकानों व आवासीय भवन को मिसमार करके एकाई प्लाजा व्यावसायिक निर्माण हेतु नींवें भर कर तैयार कर दी है।
मुख्यमंत्री से भेजे शिकायत पत्र में निवेदन किया गया है कि उक्त व्यावसायिक प्रतिष्ठान निर्माण को जो अवैध अक्रिमण पर है को रूकवाया जाए तथा जाँच कर स्वीकृत सड़कों को चालू करवाया जाए क्योंकि यह भूमि करोड़ों रूपयों की सार्वजनिक संपत्ति है। कानूनी पेचिदगियां पैदा न हों इसलिए तुरंत सार्वजनिक संपत्ति को अतिक्रमण मुक्त करवाया जाए।
पूर्व विधायक ने इस शिकायत की प्रतियां राजस्थान सरकार के स्वायत्त शासन मंत्री,मुख्य सचिव,विशिष्ट शासन सचिव स्वायत्त शासन विभाग और निदेशक स्वायत्त शासन विभाग जयपुर को भिजवाई हैं। 

स.हरचंदसिंह सिद्धु
राजेन्द्र भादू
सड़कें और जगहों का अतिक्रमण


Sunday, November 29, 2015

बिहार व महाराष्ट्र में शराबबंद होगी:वसुंधरा सरकार बिना दारू क्यों नहीं चल सकती?


राजस्थान में गुरूशरण छाबड़ा के बाद और कितने बलिदान माँगती है भाजपा सरकार?
जन संगठन अपने स्थानीय जन प्रतिनिधियों को ज्ञापन दें:
- करणीदानसिंह राजपूत -
बिहार में शराबबंद की नीतिश की घोषणा से संस्कारवान वाली वसुंधरा राजे के एक मजबूत तमाचा पड़ा। वहीं अब महाराष्ट में शराबबंद करने की घोषणा फडणवीस ने भी करदी है। राजस्थान में आँदोलन और पूर्व विधायक गुरूशरण छाबड़ा के बलिदान के बावजूद शराबबंद नहीं करने वाली वसुंधरा राजे के यह दूसरा तमाचा है। सरकारें जनता के लिए होती है और जनता के स्वास्थ्य की सुरक्षा और अपराधों पर अँकुश का पहला कर्तव्य उनका होता है।
बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश ने 26 नवम्बर 2015  को अपने मंत्री मंडल की बैठक में निर्णय किया कि 1 अप्रेल 2016 से बिहार में शराबबंद होगी और इसके लिए सरकार ने नीति को अंजाम देने के लिए कार्य प्रणाली बनानी शुरू कर दी। नीतिश ने 26 नवम्बर 2015 को यह घोषणा करते हुए कहा कि गरीब लोगों के बरबाद होते हुए जीवन को बचाना है।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री फडणवीस ने भी 28 नवम्बर  2015 को संपूर्ण महाराष्ट में आगामी वर्ष से शराबबंदी लागू करने की घोषणा कर दी है। अभी महाराष्ट्र के तीन जिलों वर्धा,गढ़ चिरौली और चंद्रपुर में शराब बंदी है।
राजस्थान में संपूर्ण शराबबंदी की मांग को लेकर पूर्व विधायक गुरूशरण छाबड़ा 3 नवम्बर को अपना बलिदान दे चुके हैं। राजस्थान की मुख्यमंत्री और उनकी सरकार के किसी भी मंत्री ने 32 दिन तक आमरण अनशनकारी छाबड़ा से बात तक नहीं की। इतनी निर्दयता तो अग्रेजी शासन काल में भी नहीं होती थी। अंग्रेज सरकार भी सत्याग्रहियों से वार्ता करती थी। वसुंधरा राजे ने अपनी क्रूरता दिखलाई ताकि उसके मंत्री और विधायक खौफ में रहें।
बिहार और महाराष्ट्र में शराबबंदी की घोषणा के बाद राजस्थान की मुख्यमंत्री से सवाल है कि वह और कितने बलिदान लेगीï?
गुरूशरण छाबड़ा की पुत्रवधु पूजा छाबड़ा शहीद स्मारक जयपुर पर 23 नवम्बर को बैठी और 27 नवम्बर को उसे जबरन उठा कर एसएमएस चिकित्सालय में भर्ती करवा दिया गया। पूजा छाबड़ा का आमरण अनशन चिकित्सालय में जारी है। पूजा छाबड़ा अपने परिजनों व अन्य कई कार्यकर्ता सीएम आवास पर आमरण अनशन करने 22 नवम्बर को पहुंच गए थे और पूजा को पुलिस हिरासत में लेकर सोढाला थाने ले गई थी। कई घंटे तक नाटक चला और पूजा ने जमानत बोंड भरने से इन्कार कर दिया तब रात में उसे छोड़ा गया। अगले दिन 23 नवम्बर को वह शहीद स्मारक पर पहुंच गई और वहां पर आमरण अनशन शुरू कर दिया था।
 पूजा छाबड़ा के पति गौरव छाबड़ा ने कहा है कि पूजा छाबड़ा का अनशन चिकित्सालय में जारी है। गौरव ने पूरे जोश से कहा कि बाऊजी गुरूशरण छाबड़ा जी के बलिदान के बाद राजस्थान सरकार को और बलिदान लेने हैं तो उनका छाबड़ा परिवार और बलिदान को तैयार है। परिवार ने यह सोच लिया है। पूरा परिवार जनहित के इस मुद्दे को छोडऩे को किसी भी हालत में तैयार नहीं है।
गौरव ने राजस्थान की जनता से सड़कों पर उतर कर सहयोग देने की अपील की है जिसमें शांति से कार्यक्रम चलाने का कहा है।
पूजा छाबड़ा के बाद शहीद स्मारक पर जयदेवसिंह मीणा संतोकपुरा शहीद स्मारक पर 27 नवम्बर से अनशन शुरू शुरू कर चुके हैं। राष्ट्रीय मीणा छात्र संगठन के राजस्ािान के प्रदेशाध्यक्ष हैं।
गुरूशरण छाबड़ा ने एक सवाल किया था कि जब गुजरात सरकार शराब की आमदनी के बिना चलाई सकती है तब राजस्थान सरकार क्यों नहीं चलाई जा सकती?
सरकार कहती है कि शराबबंदी के बाद तस्कर बेचने में लगते हैं सरकार की आय तो चली जाती है मगर तस्करों के मौज हो जाती है।  इस पर एक सवाल पैदा हो रहा है कि आबकारी विभाग के अधिकारी कर्मचारी किस काम के हैं जो भारी भरकम वेतन अभी ले रहे हैं। इस फौज का इस्तेमाल कब होगा?
गुरूशरण छाबड़ा का बलिदान और बिहार व महाराष्ट में शराबबंदी की घोषणा से राजस्थान सरकार विधानसभा में घिरी रहेगी।

मैं इस लेख के माध्यम से राजस्थान के छात्र संगठनों,युवा संगठनों,महिला संगठनों व सामाजिक संस्थाओं से अपील करता हूं कि अब देर न करें बिहार और अब महाराष्ट्र में शराबबंदी की घोषणा के बाद राजस्थान में भी शराबबंद कराने के ज्ञापन दें। जहां तक संभव हो ज्ञापन चुने हुए जन प्रतिनिधियों को दें और आग्रह करें कि वे वसुंधरा राजे की राजस्थान सरकार पर दबाव डालें। चुने हुए प्रतिनिधियों का इसलिए कह रहा हूंकि वे ही स्थानीय स्तर पर जनता से जुड़े होते हैं तथा चुनाव में जनता के बीच आते हैं। उनको स्थानीय स्तर पर जनता से लगाव रखना ही होगा।
राजस्थान में शराबबंदी होगी तो इससे प्रदेश का कल्याण ही होगा।



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Friday, November 27, 2015

अनशनकारी पूजा छाबड़ा चिकित्सालय में:रक्तचाप कम:शराबबंदी आँदोलन:


और बलिदान को छाबड़ा परिवार तैयार-गौरव छाबड़ा पूजा के पति:
लोगों से सड़कों पर उतरकर गांधीवादी तरीके से साथ देने की अपील:

राजस्थान में शराबबंदी की मांग को लेकर आमरण अनशन पर चिकित्सालय में भर्ती कराई गई पूजा छाबड़ा के पति गौरव छाबड़ा ने कहा है कि पूजा छाबड़ा का अनशन चिकित्सालय में जारी है। गौरव ने पूरे जोश से कहा कि गुरूशरण छाबड़ा जी के बलिदान के बाद राजस्थान सरकार को और बलिदान लेने हैं तो उनका छाबड़ा परिवार और बलिदान को तैयार है। परिवार ने यह सोच लिया है। पूरा परिवार जनहित के इस मुद्दे को छोडऩे को किसी भी हालत में तैयार नहीं है।
गौरव ने राजस्थान की जनता से सड़कों पर उतर कर सहयोग देने की अपील की है जिसमें शांति से कार्यक्रम चलाने का कहा है। 


गौरव छाबड़ा


आमरण अनशनकारी पूजा छाबड़ा को पुलिस उठा ले गई:भारी विरोध हुआ:


राजस्थान में शराबबंदी और सशक्त लोकपाल नियुक्ति की मांग पर 23 नवम्बर से आमरण अनशन पर थी:
इन्हीं मांगों पर बलिदान हुए पूर्व विधायक गुरूशरण छाबड़ा की पुत्रवधु हैं पूजा छाबड़ा:
स्पेशल न्यूज- करणीदानसिंह राजपूत
सूरतगढ़,27 नवम्बर। शहीद समारक जयपुर पर आमरण अनशन कर रही पूजा छाबड़ा को आज 27 नवम्बर को दिन के 12-30 बजे भारी पुलिस बल की घेराबंदी में जबरन उठाया गया। करीब पचास से अधिक पुलिस वाले थे जिसमें काफी संख्या में महिला पुलिस थी। पुलिस की कार्यवाही का विरोध भी हुआ।
पुलिस पूजा छाबड़ा को लेकर एसएमएस चिकितसालय पहुंची और वहां पर भर्ती करा दिया। पूजा छाबड़ा का अनशन जारी है। चिकित्सकों ने ड्रिप लगाई है।
गुरूशरण छाबड़ा के 3 नवम्बर को बलिदान के बाद जब मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे चौथे दिन उनके निवास पर पहुंची तब परिजनों ने स्पष्ट कह दिया था कि उनके बलिदान को व्यर्थ नहीं जाने दिया जाएगा। पूजा छाबड़ा ने तब यह चेतावनी भी देदी थी कि मुख्यमंत्री के घर के आगे आमरण अनशन होगा।
पूजा छाबड़ा व अन्य कार्यकर्ता 23 नवम्बर को सीएम आवास पर पहुंच गए और अनशन के लिए दरियां आदि बिछाई तभी पुलिस उनको सोढ़ाला थाने ले आई। पूजा ने थाने में अनशन जारी रखा। पूजा को बाँड पर छोडऩे के लिए दबाव बनाया गया लेकिन उसने बांड नहीं भरा। पुलिस ने उनको छोड़ दिया। अगले ही दिन सुबह पूजा छाबड़ा ने अपना आमरण अनशन शहीद स्मारक पर शुरू कर दिया था।
बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश ने 1 अप्रेल 2016 से शराबबंदी की घोषणा कर दी है औैर राजस्थान में भाजपा की सरकार दारू बंद नहीं करना चाहती।


Tuesday, November 24, 2015

नगरपालिका की जमीन का सौदा हरचंदसिंह सिद्धु की शिकायत:जाँच का आदेशकिया


राजस्थान सरकार से बड़ी भूमाफिया की सरकार
सूरतगढ़ में नगरपालिका की जमीन का सौदा:60 लाख का प्लॉट बेचा:पालिका को ठेंगा:
नगरपालिका की मिली भगती से प्लॉट बार बार इकरारनामों पर नगद लेनदेन पर बेचा जाता रहा:
पूर्व विधायक स.हरचंदसिंह सिद्धु की दस्तावेजी शिकायत:
-विशेष रिपोर्ट- करणीदानसिंह राजपूत - शिकायत के महत्वपूर्ण अंश-
सूरतगढ़।
राष्ट्रीय उच्च मार्ग नं 15 के दोनों ओर की बेशकीमती जमीन है तथा छोटे से छोटा भूखंड करोडों रूपए का है। भूमाफिया भूखंडों पर अतिक्रमण कर आगे से आगे मलबे के नाम से बेचान कर मालामाल होते रहे मगर पालिका प्रशाशन की अनदेखी और मिली भगत के कारण पालिका की आर्थिक हालत खराब ही रही तथा राजस्थान सरकार के अन्य विभागों को भी राजस्व की चपत लगाई जाती रही। पूर्व विधायक स.हरचंदसिंह सिद्धु वरिष्ठ वकील ने भ्रष्टाचारियों के विरूद्ध अभियान छेड़ रखा है जिसके तहत 19 नवम्बर 2015 को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो मुख्यालय पर एक शिकायत की गई। 
 ब्यूरो के महानिदेशक ने इस पर ब्यूरो की प्रक्रिया के तहत पी इ यानि प्राथमिक जाँच का आदेश किया।
सूरतगढ़ में राष्ट्रीय उच्च मार्ग नं 15 पर हनुमान खेजड़ी मंदिर की सड़क के किनारे पर कोने का एक करीब 5 करोड़ रूपए कीमत का भूखंड है। उक्त भूखंड की बिक्री भूमाफिया बेधड़क करते रहे और नगरपालिका में शिकायत करने के बावजूद पालिका ने माफिया कब्जा हटा कर अपने कब्जे में नहीं लिया व शिकायत की सूचना अधिकार में नकलें मांगने पर नहीं दी। विचारणीय यह है कि भूखंडों का लेनदेन सूरतगढ़ के बाहर के निवासी भी करते रहे।
1.दस्तावेजी घटनाक्रम दिनांक 8-5-1992. कीमत 50 हजार।
जुगलकिशोर पुत्र मुंशीराम चलाना निवासी अनूपगढ़ जिला श्रीगंगानगर ने उक्त भूखंड साईज 70 गुणा 70 पर अतिक्रमण किया। इस भूखंड के चिपते दक्षिण दिशा में श्यामलाल खंडेलवाल का भूखंड है। जुगलकिशोर ने उक्त भूखंड मलबा नाम से हरबंशलाल सोनी पुत्र लालचंद सोनी निवासी सूरतगढ़ को 50 हजार रूपयों में बेचा। खरीद नगदी लेनदेन पर हुई। मनोहरलाल पुत्र बालमुकंद अरोड़ा और केवल कृष्ण पुत्र वधावा राम जाति अरोड़ा इसके गवाह बने। नोटेरी एडवोकेट एस.के.परनामी ने दिनांक 8-5-1992 को यह लेन देन तस्दीक किया।
2.दस्तावेजी घटनाक्रम दिनांक 9-5-2012. कीमत 20 लाख।
हरबंशलाल सोनी पुत्र लालचंद सोनी निवासी वार्ड नं 10 नया सूरतगढ़ ने भूखंड मलबे नाम से राजेश स्वामी पुत्र बेगदास स्वामी वार्ड 16/8 नया सूरतगढ़ को 20 लाख रूपए नगदी में बेच दिया। इसमें लिखाया गया खरीदशुदा मलबे में से 50 गुणा 55 फुट जिसमें कच्चा कमरा कच्ची दीवार जीर्णशीर्ण अवस्था में निर्मित है। मलबा काठ किवाड़ सहित बीस लाख में बेचा है। इसमें दलजीतसिंह पुत्र मुखत्यारसिंह कम्बोज सिख निवासी श्रीबिजयनगर गवाह बना। उक्त स्टाम्प हरबंशलाल ने सूरतगढ़ में 9-5-2012 को खरीदा गया। लेनदेन फोटो स्टेट को नोटेरी एडवोकेट रामनारायण बिश्रोई जिला हनुमानगढ़ ने दिनांक 22-7-2014 को तस्दीक किया।
3.दस्तावेजी घटनाक्रम दिनांक 5-11-2012.कीमत 29 लाख 91 हजार।
राजेश स्वामी पुत्र बेगदास ने उक्त भूखंड कब्जा 50 गुणा 50 फुट मलबा रूप में भवानीशंकर पुत्र भोजराज ब्राह्मण निवासी वार्ड नं 13 रावतसर को 29 लाख 91 हजार रूपयों में बेच दिया। लिखा गया कि वहीं चार दीवारी बनी हुई है। मतलब चारदीवारी इतनी कीमत की हुई। यह लेन देन नगदी हुआ। इस लेन देन के दो जने गवाह बने। रणवीर पुत्र सुरजाराम नाई निवासी उदयपुर गोदारान तहसील सूरतगढ़ और उमेश कुमार मुदगल पुत्र मातुराम मुदगल ब्राह्मण निवासी वार्ड नं 12 सूरतगढ़ गवाह बने। इसके फोटो स्टेट नोटेरी एडवोकेट रामनारायण बिश्रोई जिला हनुमानगढ़ के दिनांक 22-7-2014 को तस्दीक किये गए।
4.दस्तावेजी घटनाक्रम दिनांक 11-7-2014.कीमत 45 लाख।
भवानीशंकर पुत्र भोजराज ब्राह्मण निवासी वार्ड नं 13 रावतसर ने उक्त भूखंड कब्जा मलबा जोधासिंह पुत्र बीरबलसिंह राजपूत निवासी गंगागढ़ हाल निवासी वार्ड नं 15 हनुमानगढ़ टाउन तहसील हनुमानगढ़ को 45 लाख रूपयों में बेच दिया। लेनदेन नगदी हुआ। नोटेरी उमेशकुमार रावतसर ने इसको 11-7-2014 को तस्दीक किया। इस सौदे व लेनदेन के गवाह विक्रमसिंह पुत्र शेरसिंह राजपूत वार्ड नं 3 सूरतगढ़ एवं गोपीराम पुत्र मघाराम मेघवाल निवासी साहुवाला तहसील सूरतगढ़ बने। इस लेनदेन में आसापासा भूखंडों पर कोई और व्यक्ति आ गए। दक्षिण में निर्मलसिंह और पूर्व में महेश का नाम दिया गया।
5. घटनाक्रम कीमत हुई 60 लाख:
पूर्व विधायक हरचंदसिंह सिद्धु ने अपनी शिकायत में लिखा है कि जोधासिंह ने उक्त भूखंड मलबा 60 लाख रूपए में किसी करणीसिंह ठेकेदार को बेच दिया है।
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भूखंड साइज लिख कर मलबा बेचान में लिखी जाने वाली तहरीर बतलाती है कि मलबा नहीं है यह भूखंड ही बेचा गया है। लिखा गया है आज के बाद खरीददार उपरोक्त वर्णित मलबा मनचाहे उपयोग व उपभाग में करे,मनचाही तामीर करवाए,विक्रय करे, पट्टा बनवाए,सर्वे अपने नाम से टा्रंसफर करवाए,पानी बिजली का कनेक्सन प्राप्त करे। अगर यह मलबा बेचान हुआ है तो उसका पट्टा कैसे बनाया जा सकेगा। मतलब यह सारी कार्यवाही झूठी लिखाई जाती है लेकिन इससे कानूनी बचाव कैसे होगा?
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स.हरचंदसिंह सिद्धु ने महानिदेशक भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो को दी गई शिकायत में लिखा है कि समस्त दस्तावेज फोटो स्टेट सहित नगरपालिका के इओ मदनसिंह बुडानिया को एक आवेदन के साथ दिए गए। उसमें लिखा गया कि करणीसिंह पक्की तामीर करवाने में लगा हुआ हे। यह सार्वजनिक संपति है जो नगरपालिका के आधिपत्य में है। फौजदारी मुकद्दमा दर्ज करवाया जाए तथा इस सम्पति को मुक्त करवाया जावे। मदनसिंह बुडानिया ने उक्त तमाम दस्तावेज व प्रार्थनापत्र रिकार्ड से गायब कर दिया व करणीसिंह से 25 लाख रूपए रिश्वत लेकर तामीर करवा दी। इसकी सूचना के अधिकार के तहत 29-3-2015 को सूचना मांगी गई। मदनसिंह बुडानिया का निधन हो गया व ईओ पद पर उसकी पुत्री प्रियंका बुडानिया पद स्थापित है। उसने नकलें नहीं दी। इस पर जिला कलक्टर को आवेदन किया। कलक्टर ने आवेदन ईओ को भेजा व फोन पर नकलें देने का कहा, परंतु ईओ प्रियंका बुडानिया ने नकलें नहीं दी। इसके बाद नियमानुसार दिनांक 7-8-2015 को अपील पालिकाध्यक्ष को की लेकिन उन्होंने भी उस अपील का निस्तारण नहीं किया।
शिकायत में लिखा गया है कि नगरपालिका मंडल की अध्यक्ष श्रीमती काजल छाबड़ा भ्रष्ट है तथा कई पार्षदों के परिजन विधिवत ठेकेदारी करके नगरपालिका में भ्रष्टाचार कर रहे हैं।
नगरपालिका के पूर्व ईओ पृथ्वीराज जाखड़ जो अब रावतसर में ईओ है और इसका दोस्त राजाराम गोदारा पुत्र पतराम दोनों रामसरा जाखड़ान के रहने वाले हैं तथा राजाराम ने पार्षद रहते करोडों रूपए की नगरपालिका की जमीन का नियमन अवैध रूप से करवाया है।
राजाराम द्वारा बनवाई गई शिव कॉलोनी के प्लाटों की कीमत अधिक किए जाने के लिए ईओ पृथ्वीराज जाखड़ ने कॉलोनी तक अवैध फोरलेन सड़क बनवा दी। इसकी शिकायत की गई तो जाँच में उपनिदेशक स्वायत्त शासन विभाग बीकानेर ने आरोप सही पाए व अपनी जाँच रिपोर्ट स्वायत शासन विभाग को जयपुर भेज दी।

इस भ्रष्ट मंडली ने उसको दबवा दिया परंतु उसकी प्रति हाथ लगी है जो पेश है। 
सिद्धु ने शिकायत में लिखा है कि राजकोष को करोड़ों रूपयों का नुकसान पहुंचाया गया है। श्रीमती काजल छाबड़ा अध्यक्ष नगरपालिका सूरतगढ़, पृथ्वीराज जाखड़ पूर्व ईओ नगरपालिका सूरतगढ़, प्रियंका बुडानिया ईओ नगरपालिका सूरतगढ़ तथा पार्षदों के परिवारजन जिनके नाम से ठेकेदारी लायसेंस हैं भ्रष्टाचार में लिप्त हैं। राजाराम पूर्व पार्षद तथा वर्तमान में उसकी पत्नी पार्षद हैं। इन द्वारा किए गए भ्रष्टाचार की जांच करवा कर भ्रष्टाचार से अर्जित संपतियों को राज्य हक में जब्त किया जाए ताकि शासन प्रशासन भ्रष्टाचार से मुक्त हो सके।

अनशनकारी पूजा छाबड़ा का मुख्यमंत्री वसुंधरा को खुला चैलेंज:महिला सीएम को मैं महिला सीधा करूंगी:

पूजा छाबड़ा से 24 नवम्बर सुबह 8-30 पर करणीदानसिंंह राजपूत की वार्ता
स्व.गुरूशरण छाबड़ा की पुत्रवधु पूजा छाबड़ा का शहीद स्मारक जयपुर पर आमरण अनशन: 


राजस्थान में शराबबंदी व सशक्त लोकपाल की मांगों पर आमरण अनशन में गुरूशरण छाबड़ा बलिदान हो गए और उनका यह मोर्चा उनकी पुत्रवधु पूजा छाबड़ा ने संभाला है।
पूजा छाबड़ा का शहीद स्मारक पर आमरण अनशन 24 नवम्बर को दूसरे दिन में प्रवेश कर गया। पूजा छाबड़ा से बातचीत हुई और उसने अपनी बोल्डनेस के अनुसार चैलेंज किया कि राजस्थान की गरूर में डूबी महिला मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को मैं महिला ही सीधा करूंगी और रास्ते पर लाऊंगी। पूजा के कहने में था कि सीएम किसी से बात नहीं करना चाहती। सूरतगढ़ से विधायक रहे गुरूशरण छाबड़ा इन मांगों पर आमरण अनशन करते हुए 3 नवम्बर को अपना बलिदान कर गए।
मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे आमरण अनशनकारी छाबड़ा से मिलने गई नहीं। उनकी मृत्यु के बाद उनके निवास पर चौथे दिन पहुंची। वहां पर सीएम करीब पैंतालीस मिनट रही। वहां पर सीएम ने यह कहा बताते हैं कि उनको छाबड़ा के अनशन का मालूम नहीं था। यह घोर आश्चर्य करने वाली बात थी। मुख्यमंत्री के लिए सारे राजस्थान की मुख्य हलचल समाचार आदि विशेष रूप से तैयार कर पढ़ाए जाते हैं और 33 दिन तक उनको मालूम नहीं पडऩा यह संकेत देता है कि सीएम को राजस्थान में क्या कुछ हो रहा है का मालूम नहीं है तो वह सीएम क्यों हैं? सीएम के लिए एक प्रेस अटैची पीआरओ भी होता है। ऐसा लगता है कि यह सफेद झूठ था।
तब परिवार जनों ने स्पष्ट कह दिया था कि छाबड़ा जी का बलिदान व्यर्थ नहीं जाने दिया जाएगा।
उसी के अनुरूप 23 नवम्बर को पूजा छाबड़ा आमरण अनशन के लिए मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के सिविल लाईंस निवास के आगे पहुंच गई सूचना के अनुसार उनके साथ उनकी माता, पति गौरव व कार्यकर्ता भी थे।
पुलिस उनको हिरासत में लेकर सोढाला थाने ले आई। पूजा ने थाने में आमरण अनशन जारी रखा। थाने में कार्यपालक मजिस्ट्रेट और पुलिस कमिश्रर आदि ने पूजा पर दबाव डाला कि वह आमरण अनशन समाप्त करदे लेकिन उसने आमरण अनशन तोडऩे से इन्कार कर दिया। उसके बाद व्यक्तिगत जमानत बौंड भरने का कहा लेकिन उसने वह भी नहीं भरा। रात को यह कहते हुए छोड़ दिया गया कि अब यह मामला अदालत में पेश होगा और पूजा वहीं पर फेस करे।
पूजा व कार्यकर्ताओं ने अब शहीद समारक पर यह आमरण अनशन जारी रखा है। पूजा के आमरण अनशन का दूसरा दिन शुरू हो गया है।
पूजा ने शहीद स्मारक पर से ही वार्ता की और मुख्यमंत्री को सुधारने की बात कही।
पूजा ने कहा कि जब तक छाबड़ा जी की मांगों पर निर्णय नहीं हो जाता है तब तब आँदोलन नहीं थमेगा चाहे सरकार कितना ही जोर लगाले या दबाव डाले। अब तीसरी मांग और जुड़ गई है कि छाबड़ा जी को शहीद का दर्जा दिया जाए।
इसी दौरान सूरतगढ़ के कई कार्यकर्ता जयपुर पहुंच गए हैं।

Monday, November 23, 2015

पूजा छाबड़ा:पुत्रवधु गुरूशरण छाबड़ा गिरफ्तार:सोढाला थाने में अनशन जारी:


पूजा छाबड़ा मुख्यमंत्री आवास के आगे आमरण अनशन करने पहुंची तब पुलिस ने अपनी हिरासत में लिया:
सोढ़ाला थाने के बाहर कार्यकर्ताओं का जमाव:
स्पेशल न्यूज- करणीदानसिंह राजपूत:
राजस्थान में संपूर्ण शराबबंदी और सशक्त लोकपाल की नियुक्ति की मांग को लेकर आमरण अनशन करते हुए 3 नवम्बर को गुरूशरण छाबड़ा के अमरत्व प्राप्त हो जाने के बाद भी सरकार की ओर से कोई कार्यवाही नहीं होने पर राजस्थान में आक्रोश फैल रहा था। 18 नवम्बर को अनेक स्थानों पर धरना प्रदर्शन हुए।
छाबड़ा की पुत्र वधु जो छाबड़ा के आमरण अनशन में लगातार साथ रही ने भी आमरण अनशन की घोषणा की थी। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे पहले तो छाबड़ा से मिलने गई नहीं। उनकी मृत्यु के बाद उनके निवास पर चौथे दिन पहुंची। तब परिवार जनों ने स्पष्ट कह दिया था कि उनका बलिदान व्यर्थ नहीं जाने दिया जाएगा।
पूजा छाबड़ा आज आमरण अनशन के लिए मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के सिविल लाईंस निवास के आगे पहुंच गई और दरी बिछा कर बैठ गई। सूचना के अनुसार उनके साथ उनकी माता, पति गौरव व अन्य एक और कार्यकर्ता भी था।
पुलिस उनको हिरासत में लेकर सोढाला थाने ले आई। पूजा ने थाने में आमरण अनशन जारी रखा हुआ है। थाने के बाहर कार्यकर्ता मौजूद हैं।

घंटियां बजाती पौत्री आई:संग खुशियां लाई- करणीदानसिंह राजपूत:


श्रीमती विनीता सूर्यवंशी-करणीदानसिंह राजपूत 23 नवम्बर प्रात: दादी दादा बने।
योगेन्द्रप्रतापसिंह-रीतिका भाटी को पुत्री के शुभागमन की खुशियां मिली।
 
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Thursday, November 19, 2015

इन पेड़ों की पुकार:हमें बचाओ-हमें बचाओ:कौन सुनेगा?सूरतगढ़ में हजारों पेड़ों का सफाया:


 




सूरतगढ़  सूर्योदय नगरी के मशान और पास के टिब्बों को खोद डाला:
- करणीदानसिंह राजपूत -
सूरतगढ़ 19 नवमबर 2015.
रेतीले धरोहर टिब्बों को हरियाला स्वरूप देने के लिए वन विभाग ने कुछ सालों पहले शहर के पास के टिब्बों पर पौधारोपण करवाया और जब वे पेड़ों का रूप लेने लगे तब से उन पर मौत मंडराने लगी तथा हजारों पेड़ काट डाले गए और रेत उठाने वालों द्वारा टिब्बों की खुदाई में उखाड़ दिए गए।
पेड़ों पर अभी भी मौत मंडरा रही है तथा रोजाना ही किसी न किसी क्षेत्र में पेड़ उखाड़े रहे हैं।
सूरतगढ़ से बडोपल रोड पर बने हुए सूर्योदय नगरी के मशान और पास के टिब्बों को मिट्टी ले जाने वालों ने खोद डाला है जिसके कारण कितने ही पेड़ वहां मौत के शिकार हो गए। उनके अंश वहां पर देखने को अब नहीं मिलेंगे। 


Wednesday, November 18, 2015

सूरतगढ़:गुरूशरण छाबड़ा की शराबबंदी व लोकपाल की मांग पर धरना:



नागरिक संघर्ष समिति के आह्वान पर उपखंड अधिकारी कार्यालय पर धरना:
गुरूशरण छाबड़ा को शहीद घोषित करने व दो पूर्व मांगों पर ज्ञापन:
- करणीदानसिंह राजपूत -
सूरतगढ़, 18 नवम्बर।
अमरत्व प्राप्त गुरूशरण छाबड़ा की राजस्थान में संपूर्ण शराब बंदी और सशक्त लोकपाल की मागों पर यहां उपखंड कार्यालय पर धरना दिया गया। यह एक दिवसीय धरना नागरिक संघर्ष समिति के आह्वान पर दिया गया। समिति के अध्यक्ष श्याम मोदी,पूर्व विधायक स.हरचंदसिंह सिद्धु,नारी उत्थान केन्द्र की अध्यक्ष श्रीमती राजेश सिडाना,रूपकंवर,कृष्णा,गुड्डी,बसपा के राष्ट्रीय कार्य कारिणी के सदस्य जिला परिषद डायरेक्टर डूंगर राम गेदर,बसपा के नगर अध्यक्ष पवन सोनी,उपखंड विकास समिति के अध्यक्ष दिलात्म प्रकाश जैन,समिति के मदन औझा,सचिव राजेन्द्र मुदगल,आपातकाल के लोकतंत्र सेनानी महावीर प्रसाद तिवाड़ी करणीदानसिंह राजपूत,महेन्द्र फुल्का,जसवंत फुल्का,गर्भस्थ शिशु संरक्षण समिति के अध्यक्ष परसराम भाटिया,एडवोकेट एन.डी.सेतिया सहित कई लोग शामिल थे। यह धरना शाम 5 बजे तक चला। 
उपखंड अधिकारी रामचन्द्र पोटलिया को मुख्यमंत्री राजस्थान सरकार के नाम एक ज्ञापन दिया जाएगा। ज्ञापन में दो पूर्व में चल रही मांगों के अलावा गुरूशरण छाबड़ा को शहीद घोषित करने की मांग भी थी।



Monday, November 16, 2015

श्रीगंगानगर में अतिक्रमण हटा रहे हैं: सूरतगढ़ में वीआइपी अतिक्रमण कराए जा रहे हैं।


हाई कोर्ट के आदेश की जरूरत कहां है? पावर तो पालिका के पास में है:
सूरतगढ़ में पालिका और प्रशासन सो नहीं रहे मिली भगत से देख रहे हैं:
क्या सूरतगढ़ श्रीगंगानगर का हिस्सा नहीं है?

सूरतगढ़।
श्रीगंगानगर में अतिक्रमण हटाने का कार्य शुरू कर दिया गया जो चल रहा है। वीआइपी अतिक्रमणधारियों की जेसीबी चलने से बेइज्जती होती है सो जेसीबी मशीन के पहुंचने से पहले ही खुद कब्जे तोडऩा शुरू कर देते हैं। गंगानगर के अखबारों से मालूम पड़ता है कि वहां की सड़कों के चौड़ा होने पर निखार आने लगा है। राजस्थान उच्च न्यायालय के आदेश से सभी घबराते हैं। गंगानगर में उच्च न्यायालय के आदेश के बाद ही अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही शुरू की गई। पहले काफी वाद विवाद भी हुआ लेकिन बाद में उच्च न्यायालय की कार्यवाही से अपने को बचाने के लिए अधिकारियों ने कार्यवाही शुरू की।
श्रीगंगानगर में अतिक्रमण हटाए जाने की कार्यवाही शुरू है और सूरतगढ़ में वीआइपी अतिक्रमणों के कराए जाने की धृष्ठता चल रही है। इसके पक्के उदाहरणों में एक है आवासन मंडल कॉलोनी। आवासों के आगे सड़कों तक पक्के निर्माण कर लिए गए हैं तथा लगातार ये निर्माण चल रहे हैं। जितना आवास का क्षेत्रफल उसके बराबर ही अतिक्रमण। इन अतिक्रमणों के लिए सड़कें संकड़ी की गई और एक सड़क का डिवाइडर तो बीच के बजाय हट कर बना दिया गया जिससे सड़क को ही खिसका दिया गया। पालिका प्रशासन को चाहिए था कि अतिक्रमणों को तुड़वा कर निर्माण कराती मगर गलत करवा दिया गया। गरीब लोग छत के लिए कहीं खाली जमीन पर मामूली कोठा ही बनालें तब जेसीबी तोडऩे पहुंच जाती है तथा ईओं की तरफ से समाचार पत्रों को विज्ञप्ति तक जारी हो जाती है किे कितने रूपए की जमीन को कब्जे से मुक्त करवाया गया। लेकिन आश्चर्य यह है कि आवासन मंडल कॉलोनी के वीआइपी आवासों के आगे और साइड में हो रहे अतिक्रमणों को तोडऩे पालिका नही ंपहुंचती। पालिका कानून में स्पष्ट लिखा है कि सड़क अधिकार क्षेत्र का हिस्सा अतिक्रमण और खांचा भूमि में आवंटित नहीं किया जा सकता लेकिन इसके बावजूद पालिका इस प्रकार के अतिक्रमणों को पालिका के एजेंडे में भी शामिल कर लेता है और उस पर पार्षदगण विचार भी कर लेते हैं।
नगरपालिका के अध्यक्ष ईओ व अन्य कर्मचारियों की यह सहानभूति है या इसमें कुछ काला है।
नगरपालिका वहां की सर्वे रिपोर्ट तो बना सकती है कि किस किसने कितनी सड़क भूमि पर कब्जा किया है। अधिकांश वीआइपी लोगों के आवास उनकी पत्नियों के नाम से हैं और किसी भी प्रकार की आपराधिक कार्यवाही या मुकद्दमा दर्ज होता है तो वे भारी परेशानी में फंस सकती हैं। आश्चर्य यह भी है कि नगरपालिकाओं में अधिकारी जो आवासन मंडल कॉलोनी में निवास करते हैं उन्होंने भी अतिक्रमण कर रखे हैं। जितने भी अधिकारी या कर्मचारियों ने ये अतिक्रमण कर रखे हें वे सभी सभी सरकारी नियमों के आचरणहीनता में आते हैं।
बीकानेर रोड के महाराणा चौक से बाई ओर से लगातर आधी रोड तक दुकानदारों के अक्रिमण है और उनेक बनाए ढ़लान के कारण केवल आधी रोड पर ही आवागमन होता है तथा भारी समस्या होती है। दुकानदारों ने 6 फुट आगे तक फुटपाथ पर अतिक्रमण को करने के बाद आगे स्लॉप बना कर और जगह रोक ली। मौका देखें कि सारे निर्माण सिमंट कंक्रीट के पक्के बनाए गए हैं। पालिका शिकायत के बावजूद नहीं देखती। जीवन बीमा निगम कार्यालय से आगे धार्मिक, समाजों के निर्माण व व्यावसायिक निर्माण अपने स्थान से बारह फुट आगे तक सड़क अधिकार क्षेत्र में बना लिए गए हैं और उनके विरूद्ध कोई कार्यवाही तक नहीं हुई। एक बहुत बड़ा मॉल सड़क पर बना लिया गया है। उसक आगे वाहन सड़क को और अधिक रोक लेते हैं तथा पचास फुट तक की सड़क केवल 8 फुट तक रह जाती है। प्रशासन को भी कोई परवाह नहीं है। यह सड़क सार्वजनिक निर्माण विभाग की है और वे भी सड़क को कभी देखते नहीं। यहां पर नगरपालिका ने कब्जे हटवाने से अपने को बचा लिया और नाले का निर्माण ही बदल लिया।
सब्जी मंडी में दुकानों से आगे तक  अतिक्रमण हैं। रेलवे रोड पर भी अतिक्रमण हैं।
रामप्रताप कासनिया के निवास से भगतसिंह चौक को मिलाने वाली सड़क दोनों ओर से अतिक्रमण का शिकार होते हुए कहीं 10 तो कहीं 12 फुट चौड़ी रह गई। पालिका ने उसके अतिक्रमणों को हटवाने के बजाय बची हुई सड़क पर ही डामर फिरवा दिया। विधायक राजेन्द्र भादू निवास के पास की सड़कें अतिक्रमण का शिकार हैं। पुलिस थाना सिटी और राजकीय चिकित्सालय के बीच की 80 फुट चौड़ी सड़क आधी रह गई है। सेठ रामदयाल राठी उच्च माध्य.स्कूल के आगे से निकल कर होटल आशियाना के आगे से जाने वाले बाईपास पर पहले अतिक्रमण हुए। उनके फर्जी कागजातों पर कई लोगों ने पट्टे बनवा लिए और आवासीय पट्टों पर वहां बड़े बड़े व्यावसायिक निर्माण कर लिए। आश्चर्य यह है कि उन व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के आगे पांच से दस फुट तक और अतिक्रमण हो गए।
उच्च न्यायालय के आदेश से तोड़े जाने के बजाय पालिका ही चुस्त हो जाए कि कब्जे होने ही न दे।
अभी भी जो कब्जे हो रहे हैं उनको तुरंत रूकवाया जाए। वीआइपी अतिक्रमणों को तुड़वाने के लिए कार्यवाही की जाए। सरकार से भारी भरकम
वेतन लेने वाले अधिकारी अपने दफ्तरों से बाहर निकल कर शहर का निरीक्षण करें ।
पुच्छला- वैसे देर सवेर कोई न कोई तो उच्च न्यायालय जाएगा ही। करलो जितने कब्जे करने हैं बाद में खुद को ही तोडऩे हैं। 

- ब्लास्ट की आवाज की तीसरी आँख -16 नवम्बर 2015 से।

Sunday, November 15, 2015

तुम मेरे दिल में हो : कविता: करणीदानसिंह राजपूत




 प्रिय अब तुम्हारे
फोन का रहता है इंतजार।
जब टिनटिनाता है
तब तब दौड़ कर
उठाना होता है।
तुम्हारे बोल दिल को
छूकर
भीतर तक उतर जाते हैं।
आखिर क्या है तुम में,
मेरा दिल क्यों हो जाता है
उतावला
बिछ जाता है
सुनने को तुम्हारी
प्यार भरी
बातें।
सच्च में तुम

मेरे दिल में हो
कब से हो
यह मालूम नहीं।
बस।
जब भी
फोन की टिनटिनाहट
होती है।
दिल कह उठता है।
तुम हो।
यही सच्च
हर बार होता है।
रात की नींद
जब उड़ जाती है
करवटें बदलते
सुबह हो जाती है।
तुम्हारी स्मृति
भी हर बार आ जाती है
सामने।
तुम्हारा वही चेहरा
और आज भी

वही नाक नक्स।
दिल को गुदगुदाते हैं
प्यार करने को।
एलबम में लगे एक फोटो पर
जब मेरी नजर ठहर
जाती है।
पल भर में दोनों की नजरें
भी मिल जाती है।

चाहती हैं जवाब मिलन का
कौन करे पहल।
सच्च तुम हिम्मती
आगे बढऩा तुम्हारा
और लिपटना
सोचा नहीं था
जो हो गया पल में।
यह तो अपनी यादों की

धरोहर है
जिसे संभालकर
रखना है
हम दोनों को।
प्रिय अब रहता है
इंतजार तुम्हारे फोन
की टिनटिनाहट का
यादों को संजोए
रखने के लिए।
-----
करणीदानसिंह राजपूत,

स्वतंत्र पत्रकार,
सूरतगढ़।
94143 81356.
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नेहरू और इंदिरा की भारत सरकार के विज्ञापनों से स्मृति बंद:बाल दिवस नजर नहीं आया:


एक बार में ही करोड़ों रूपए अनुत्पादक विज्ञापन अखबारों व चैनलों पर दिए जाते थे:
- करणीदानसिंह राजपूत -
भारत सरकार की ओर से पूर्व प्रधानमंत्रियों का सरकारी विज्ञापनों के जरिए स्मरण संभवत बंद कर दिया गया है। करोड़ों रूपए के विज्ञापन एक बार में अखबारों व चैनलों पर दिए जाते थे। इस प्रकार के विज्ञापनों से कोई आय नहीं होती थी केवल सरकारी खजाने पर भार पड़ता था।
पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा प्रियदर्शिनी का निधन 31 अक्टूबर को हुआ था जब उन पर गोलियां चलाई गई थी। इसी दिन भारत के प्रथम गृहमंत्री सरदार बल्लभ भाई पटेल का जन्म दिवस है। इस दिवस पर भारत सरकार ने इंदिरा प्रियदर्शिनी के विज्ञापन प्रकाशित नहीं किए। इस दिन सरदार बल्लभ भाई पटेल की जयंती के विज्ञापन प्रकाशित करवाए गए।
उसी दिन यह समझ लिया गया था कि भाजपा के केन्द्रीय सरकार ने अपनी नीति में प्ररिवर्तन शुरू कर दिया है।
पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का जन्म दिन 14 नवम्बर देश भर में बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है। उनको चाचा नेहरू के नाम से संपूर्ण संसार में ख्याति मिली हुई थी। बाल दिवस पर स्कूलों में और अन्य स्थानों पर कार्यक्रम होते थे। भारत सरकार ने इस दिन के विज्ञापन भी जारी नहीं किए। इससे स्पष्ट हो गया है कि नीति में परिवर्तन हो चुका है। सरकार कह सकती है कि सरकारी कोष पर करोड़ों का भार क्यों डाला जाए?
कोई माने या न माने इस वित्तीय भार से कांग्रेस पार्टी को ही लाभ हुआ करता था। भाजपा गठबंधन सरकार ने यह भार खत्म कर दिया।
कांग्रेस ने भी जब इंदिरा गांधी का विज्ञापन 31 अक्टूबर नहीं देखा तो आगे के लिए समझ लिया और नेहरू जयंती पर कांग्रेस ने विज्ञापन छपवाया। आगे के लिए भी यही नीति रहेगी। वैसे भी सरकार ने विज्ञापनों की संख्या में कमी कर दी है।
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Tuesday, November 10, 2015

मुख्यमंत्री स्तर पर लापरवाही ने गुरूशरण छाबड़ा जी की जान ली है, हत्या का मुकदमा चलना चाहिए।


 

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आरोप लगाया है कि छाबड़ा जी की जान ली गई है। 
 उनका स्पष्ट ईशारा वर्तमान मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की तरफ था। 
अशोक गहलोत का यह वक्तव्य 7 नवम्बर 2015 को आया है। मुख्यमंत्री स्तर पर लापरवाही ने सत्याग्रही गुरूशरण छाबड़ा जी की जान ली है, जिसके लिए हत्या का मुकदमा चलना चाहिए।
इस घटना ने लोकतंत्र की धज्जियां उड़ा दी हैं। एक प्रकार से वो शहीद हो गये। एक सत्याग्रही के रूप में उन्होंने लोकतंत्र में सरकार तक अपनी बात पहुंचाने का जो तरीका होता है, उसके तहत अनशन करने का रास्ता चुना था लेकिन सरकार ने उसका सम्मान नहीं किया, ऐसा मैं मानता हूं।
मुख्यमंत्री और उनकी सरकार के स्तर पर यह संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है, जिसका जवाब उसके पास नहीं है। लोकतंत्र में समस्याओं का समाधान बातचीत के जरिये किया जाता है लेकिन इस सरकार ने कोई डायलाॅग नहीं रखा ये एक दुखद बात है।
कितनी दुखद बात है कि छाबड़ा जी के निधन का समाचार जब सभी ओर फैल चुका था, तब मुख्यमंत्री सुसज्जित थ्री व्हीलर में बैठकर घूम रही थी। अगर उस कार्यक्रम को 2-4 दिन के लिए स्थगित कर देते तो क्या फर्क पड़ जाता। दिन भर उन्होंने अन्य मामलों में ट्वीट किये, अगर एक ट्वीट छाबड़ा जी के दुखद निधन पर भी कर देती तो प्रदेशवासियों को लगता कि मुख्यमंत्री को भी इससे आघात लगा है। देश और दुनिया भी देखती कि राजस्थान में एक सत्याग्रही शहीद हो गया।
मेरा मानना है कि लोकपाल और पूर्ण शराबबंदी जैसे जनहित को मुद्दा बनाकर अनशन पर बैठे छाबड़ा जी से अगर सरकार डायलाॅग रखती तो उनकी जान नहीं जाती। इस मामले में अगर कोई लापरवाही हुई है तो निश्चित रूप से जांच का विषय है। मुझे इस बात पर भी अफसोस है कि मुख्यमंत्री की बात तो छोड़ दीजिए, उनसे उनकी मांगों के संबंध में चर्चा करने हेतु इस सरकार का कोई मंत्री तक नहीं गया। मुख्यमंत्री अपनी व्यस्तता दर्शाते हुए छाबड़ा जी को एक फोन भी कर लेती तब भी उनको यह अहसास हो जाता कि सरकार उनकी तरफ ध्यान दे रही है।

Sunday, November 8, 2015

खानमंत्री स्वतंत्रता दिवस समारोह बीकानेर में कबूतर उड़ा गए तब नहीं बोले डूडी?


पहले कबूतरों को बंदी बनवाओ फिर उड़ाकर समारोह मनाओ:
इस पर रोक थी और कई सालों से यह बंद था:
- करणीदानसिंह राजपूत -
राजस्थान के वसुंधरा राज के चर्चित खान घोटाले महाघूस कांड में खान मंत्री राजकुमार रिणवा का नाम आने का आरोप लगाते हुए विधानसभा में प्रतिपक्ष नेता रामेश्वरलाल डूडी ने रिणवा से पद छोडऩे की मांग की है। डूडी ने नतिकता के हिसाब से इस्तीफा देने की मांग की है ताकि जाँच प्रभावित न हो सके।
खानमंत्री राजकुमार रिणवा ने स्वतंत्रता दिवस पर बीकानेर के स्टेडियम में आयोजित समारोह में 15 अगस्त 2015 को तिरंगा फहराने के अलावा कबूतर उड़ाए।
कबूतर उड़ाने की परंपरा कई सालों से बंद है और सरकारी समारोह में प्रतिबंधित है।
जीव जंतु पक्षियों के रक्षक लोग व संगठनों ने स्वतंत्रता दिवस आदि पर कबूतर उड़ाए जाने पर आपत्तियां की थी और इसे अत्याचार माना था।
इस पर यह रोक लगी लेकिन बीकानेर में यह हुआ और खबरें छपी। ई टीवी पर इसका प्रसारण तक दिखलाया गया। बीकानेर में किसी भी संगठन ने कोई आवाज नहीं उठाई। इसके बाद यह समाचार राजस्थान सरकार के सूचना एवं जन संपर्क विभाग की पत्रिका सूजस में भी छपा।
इस पर अभी भी डूडी व कोई संगठन चाहें तो कार्यवाही मुकद्दमा आदि कर सकते हैं।
पहले कबूतरों को बंदी बनाओ, बंदी बनाए हुए पहले रात को ही ले कर आओ बंद रखो तथा सुबह उड़ाओ।
मंत्री के लिए बीकानेर में कबूतरों का प्रबंध किसने किया? किसी विभाग ने या किसी व्यक्ति या संस्था ने,सभी पर आरोप बनता है।

Saturday, November 7, 2015

गुरूशरण छाबड़ा ने अपनी देह को राख नहीं बनने दिया:



ऐसा गमन तो संतों का भी नहीं हो पाता:
- करणीदानसिंह राजपूत -
गुरूशरण छाबड़ा की सोच दूरदर्शी रही और वे एक व्यक्ति के रूप में संसार से नहीं गए बल्कि संत के रूप में गए और अपनी देह को राख नहीं बनने दिया। उसी काया जो मिट्टी में मिल जाने वाली थी से अब न जाने कब तक चिकित्सा विज्ञान की छात्र छात्राएं अध्ययन करते रहेंगे। यह उनका अमूल्य दान इतिहास में याद रखा जाएगा। इसकी घोषणा पूर्व में ही कर चुके थे। उनकी नजरें सदा गरीबों की पीड़ाओं पर रही।
वे सोचा करते थे कि शराब और भ्रष्टाचार के शिकार गरीब दलित अनुसूचित जाति के पिछड़े कच्ची बस्ती और ग्रामों के लोग होते हैं। शराब और भ्रष्टाचार दोनों खत्म हो जाएं तो गरीब का उद्धार हो जाए। उनको मालूम था कि इन दोनों मुद्दों की लड़ाई बड़ी कठिन है तथा शराब बंदी को लेकर राजस्थान और देश में न जाने कितने लोग लड़ते लड़ते चले गए। भ्रष्टाचार के विरूद्ध अण्णा हजारे का आँदोलन उनके दिल और दिमाग में था। उनको मालूम था कि उनकी माँगे राजस्थान में संपूर्ण शराब बंदी और सशक्त लोकपाल की वास्ते आगे लोग बीड़ा उठाते रहेंगे। संपूर्ण शराबबंदी का मतलब था कि राजस्थान में शराब न बनेगी,न बिकेगी और न किसी अन्य राज्य से आऐगी। उनका स्पष्ट कहना था कि जब गुजरात सरकार शराब की आय के बिना चलाई जा सकती है तब राजस्थान की सरकार क्यों नहीं चलाई जा सकती?
सरकार सदा एक ही बहाना कहती रही है कि जब शराब बंद कर दी जाती है तब चोरी छुपे पी जाती है और तस्करी करके लाई जाती है। सरकार को आय नहीं होती मगर तस्करी करने वाले मालामाल होते जाते हैं।
मेरा यह कहना है कि चोरी से और ऊंची कीमत से हर आदमी नहीं पी पाता। सरकार के पास शक्ति है वह तस्करी को पावरफुल तरीके से रोकने में कामयाब हो सकती है। एक और बिंदु है कि 100 में से 10 व्यक्ति शराब पीते हैं और उन 10 लोगों के लिए 90 अन्य सामान्य लोगों को बरबाद किया जाता है। हाँ सौ में से नब्बे पीने वाले होते तो सरकार का तर्क कुछ हद तक चल सकता था। सभी मानते हैं कि अपराधों की जननी शराब है और अपराधों की रोकथाम व अपराधियों को पकडऩे और उनको न्यायालय तक पहुंचाने में करोड़ों रूपए लग जाते हैं। अपराधों की रोकथाम के लिए व्यवस्था अलग से चलती है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पंजाब के युवकों के नशे की ओर बढ़ते जाने पर गंभीर चिंता व्यक्त की थी। पंजाब के लिए चिंता है तब राजस्थान के लिए यह चिंता क्यों नहीं है?
महात्मा गांधी के नाम पर राज करते हैं लेकिन महात्मा गांधी तो शराब की बुराई के विरूद्ध थे। उनका नाम लेकर चलाई जा रही लोकतांत्रिक सरकारों को तो यह समाज विरोधी कार्य नहीं करना चाहिए। गांधी जी की तरह ही सत्याग्रह के मार्ग पर चलते हुए गुरूशरण छाबड़ा ने आमरण अनशन का कदम उठाया था और राजस्थान की भाजपा की वसुंधरा राजे सरकार ने उनसे बात तक नहीं की। वसुंधरा स्वयं उनके पास चली जाती तो कुछ मान घटने वाला नहीं था। इतिहास में यह तथ्य भी साथ में लिखा हुआ रहेगा।
वसुंधरा राजे और उनके मंत्रियों का कहना कि आबकारी आय के बिना सरकार नहीं चलाई जा सकती। लेकिन यह सरकार कोई स्थाई नहीं है और यह भी जाएगी ही चाहे शराब बेच कर चलाएं चाहे इससे भी घटिया घिनौने कार्य शुरू करके दिन निकाल लें। 

एक दिन वह आएगा ही कि वसुंधरा राजे के सिर पर ताज नहीं रहेगा।


Friday, November 6, 2015

वसुंधरा पहुंची छाबड़ा निवास:छाबड़ाजी का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा-परिवारजन:


वसुंधरा राजे संवेदना व्यक्त करने पहुंची-साथ में भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष अशोक परनामी थे:
-स्पेशल न्यूज -
सूरतगढ़ 6 नवम्बर 2015.
राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे गुरूशरण छाबड़ा के संसार छोडऩे के चौथे दिन संवेदना व्यक्त करने उनके निवास पर पहुंची और करीब पैंतालीस मिनट छाबड़ा के परिवार जानों के साथ रहीं। गुरूशरण छाबड़ा आमरण अनशन जारी रखते हुए 3 नवम्बर प्रात: संसार छोड़ गए थे। वसुंधरा राजे के साथ भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष अशोक परनामी भी थे।
छाबड़ा जी के पुत्र गौरव छाबड़ा व पुत्र वधु पूजा छाबड़ा वहां थे।
छाबड़ा परिवार ने कहा कि छाबड़ा जी का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा।
जयपुर में आज काली पट्टियां मुंह पर लगा कर जूलूस निकाला गया और कहा गया कि गुरूशरण छाबड़ा की राजस्थान की सरकार ने हत्या की है।
छाबड़ा जी 2 अक्टूबर से पूर्ण गांधीवादी तरीके से सत्याग्रह के रूप में आमरण अनशन पर बैठे थे। उनकी मांग थी कि राजस्थान में संपूर्ण शराबबंदी लागू की जाए और सशक्त लोकपाल नियुक्त का कानून बनाया जाए।
छाबड़ा जी का मानना था कि भ्रष्टाचार और शराब दोनों से गरीब दलित व महिलाएं पीडि़त हो रहे हैं।
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एसडीएम रामचन्द्र पोटलिया की शिकायतें फर्जी दस्तखत:


बेनामी संपति और जमीने बनाने का था आरोप:शुरू हुई थी जाँच:
राधा कृष्ण स्योरान ने कहा मैंने नहीं की शिकायत:शिकायत राधा किशन स्योरान के नाम से:
पत्रकार वार्ता में किया खुलासा:पुरानी शिकायत भी भ्रम में करने का बताया:
अन्य दो लोगों ने भी लिख दिया कि उन्होंने कोई शिकायत नहीं की:

एसडीएम रामचन्द्र पोटलिया ने कहा कि उनके जमीनों के फैसले सही हैं।
स्पेशल रिपोर्ट- करणीदानसिंह राजपूत
सूरतगढ़, 6 नवम्बर 2015.
एसडीएम रामचन्द्र पोटलिया के विरूद्ध अवैध बेनामी संपत्ति बनाने की मुख्यमंत्री को की गई शिकायतें और संभागीय आयुक्त द्वारा जाँच शुरू करने के समाचारों के छपने के साथ ही नया मोड़ आया और जिन नामों से शिकायतें हुई थी ने खंडन कर दिया कि उन्होंने कोई शिकायतें नहीं की है।
पूर्व में जमीन के निर्णय के बाद राधाकृष्ण स्योरान ने शिकायत की थी और पत्रकार वार्ता में रामचन्द्र पोटलिया पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। उसके नाम से एक और शिकायत ताजा हुई। संभागीय आयुक्त के द्वारा जाँच के आदेश और गंगानगर के अपर जिला कलेक्टर द्वारा जाँच शुरू किए जाने के समाचार छपने के बाद अचानक रूख बदल गया।
राधाकृष्ण स्योरान  निवासी चक 7 बीकेएसएम गुडली ने आज पत्रकार वार्ता में कहा कि उसके नाम से किसी ने फर्जी शिकायत की है तथा उसमें हस्ताक्षर भी फर्जी हैं। नई शिकायत में नाम और निवास गलत लिखे हैं। नाम राधाकिशन स्योरान व निवास सूरतगढ़ लिखा हुआ है।
एसडीएम रामचन्द्र पोटलिया से पत्रकारों ने जानकारी चाही तब उन्होंने कहा कि शिकायत फर्जी की गई है जिसका खंडन पत्र राधा कृष्ण स्योरान  लिख कर दे गया है।
एसडीएम ने यह भी बताया कि पूर्व में राधा कृष्ण ने जो शिकायत की थी उसका भी खंडन लिख दिया है उसने भ्रम में शिकायत की थी। यह खंडन पत्र करीब तीन पेजों का विस्तृत है।
एसडीएम ने कहा कि मोहनदास निवासी पींपासर के नाम से भी शिकायत की गई थी। उक्त मोहनदास भी लिख कर दे गया है कि उसने कोई शिकायत नहीं की। उसके नाम से शिकायत की गई है जिसमें हस्ताक्षर उसके नहीं है। एक और नाम से भी शिकायत की गई थी वह भी लिख गया कि उसने कोई शिकायत नहीं की है।

Tuesday, November 3, 2015

गुरूशरण छाबड़ा को नमन:श्रद्धांजलियां: लगातार:


सूरतगढ़,3 नवम्बर 2015.
गुरूशरण छाबड़ा के मरणव्रत पूरे होने के समाचार से इलाका स्तब्ध रह गया। सूरतगढ़ से लेकर अनूपगढ़ घड़साना तक व अन्य स्थानों पर उनका कर्मक्षेत्र था वहां के लोगों ने एक प्रकार से महान क्षति महसूस की।
उनके साथ आंदोलनों में रहने वाले,मित्र,संस्थाओं के लोगों ने सभाएं की और श्रद्धांजलिया अर्पित की।
पूर्व विधायक स.हरचंदसिंह सिद्धु,पूर्व राज्यमंत्री रामप्रताप कासनिया,मालचंद जैन व अन्य जनों के आग्रह पर यहां शराब की दुकानें व बार बंद हुए।
कांग्रेसी नेता बलराम वर्मा ने छाबड़ा को सादगी वाला व जीवनपर्यंत गरीबों के लिए तथा जनहित के मुद्दों की राजनीति करने वाला मसीहा बतलाया।
अणुव्रत समिति ने तेरापंथ सभा भवन में सभा कर श्रद्धांजलि अर्पित की। अनिल रांका ने कहा कि राजकीय महाविद्यालय छाबड़ा की देन है और छाबड़ा सदैव याद किए जाते रहेंगे। राजस्थान सरकार की धीमी गति की कार्य प्रणाली से लोकपाल नहीं आ पाया और छाबड़ा जी संसार त्याग गए।
जैन श्वेतामबर तेरापंथ सभा के अध्यक्ष मांगीलाल रांका ने छाबड़ा को मूल्यों की राजनीति करने वाला बताते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की। तेरापंथ समाज ने इसे सूरतगढ़ की अपूर्णीय क्षति बताया।
नगरपालिका के पूर्व अध्यक्ष सोहनलाल रांका ने कहा कि भाई छाबड़ा के शहीद होने का समाचार करणी इंडिया प्रेस से लगा। उनके निधन से स्वच्छ राजनीति को धक्का लगा है। छाबड़ा नैतिक मूल्यों के प्रति सदा जागरूक रहे। रांका ने कहा है कि राजस्थान सरकार अपनी हठधर्मिता को छोड़ कर छाबड़ा जी के बलिदान को सन्मान प्रदान करे।

गुरूशरण छाबड़ा का मरणव्रत:तीर्थ दर्शन:



हरद्वार गंगा स्नान:अमृतसर में हरमंदिर में मत्था टेका:
- करणीदानसिंह राजपूत -
गुरूशरण छाबड़ा ने राजस्थान में संपूर्ण शराबबंदी और सशक्त लोकपाल की मांग को लेकर 2 अक्टूबर को जयपुर में आमरण अनशन शुरू करने से पहले यह पक्का सोच लिया था कि आगे जीवन नहीं है।
उन्होंने आमरण अनशन शुरू करने से कुछ दिन पहले प्रमुख समाजों के धार्मिक तीर्थ स्थलों के दर्शन पूजन किए थे।
मुझसे आठ दस दिनों में एक बार बात हो जाया करती थी।
एक बार गंगा स्नान के लिए पहुंचे हुए थे। वहां फोन संपर्क हुआ तो उन्होंने कहा कि हरद्वार आया हुआ हूं। स्नान कर जयपुर लौटूंगा।
एक बार अमृतसर का कहा। स्वर्ण मंदिर हर मंदिर साहिब में जाना बताया। गुरू ग्रंथ साहिब के आगे सिर नवाना बताया। उस समय मैंने उनकी मनसा को काफी समझ लिया था। घर पर वार्ता हुई तब कहा कि भाभी जी विनीता से बात करूंगा। बात हुई और हमें आने वाले परिणाम का आभास हो गया।
सूरतगढ़ में पुलिस स्टेशन के आगे धरना और प्रदर्शन में श्याम मोदी ने आमरण अनशन शुरू करने की घोषणा की तब मोदी को आमरण अनशन पर बिठाने के लिए जयपुर से आए। श्याम मोदी को आमरण अनशन पर बिठाते वक्त उन्होंने अपने भाषण में आगे की सभी स्थितियां स्पष्ट रूप में प्रगट करदी।
उन्होंने कहा कि सूरतगढ़ इलाके के लोगों ने मेरे हर आँदोलन में और हर दुख दर्द में पूरे मन से साथ दिया है। जयपुर जाने के बाद वहां पर जीवन संगिनी आशा भारती की मृत्यु के बाद वहां से उनका पार्थिव शरीर लेकर सूरतगढ़ आया व अंतिम संस्कार यहां पर किया। उसके बाद माँ के देहावसान पर उनका पार्थिव शरीर लेकर सूरतगढ़ आया व अंतिम संस्कार यहां पर किया। अब 2 अक्टूबर को आमरण अनशन पर बैठूंगा और अब मैं सूरतगढ़ नहीं आऊंगा न मेरा शरीर यहां आएगा। मैंने देहदान की घोषणा कर रखी है और वह राजस्थान चिकित्सा विभाग को सौंप दी जाएगी ताकि मेडिकल के विद्यार्थी अध्ययन कर सकें। यह सच्च निकला।
उन्हें अपने प्राणों की परवाह तो नहीं थी मगर साथियों के जीवन पर ध्यान था। मुझे जयपुर से फोन करके विशेष रूप से कहा कि अबकी बार श्याम मोदी को आमरण अनशन पर मत बैठने देना। उसको हृदयघात हो चुके हैं तथा बाईपास सर्जरी करवाई हुई है।
मैंने उनसे यह वादा किया।
उनकी यादें ना जाने कितनी हैं जो मन में आती रहेंगी।

गुरूशरण छाबड़ा को दीप जलाकर श्रद्धांजलि:सीमा क्षेत्र:


- करणीदानसिंह राजपूत -
सूरतगढ़,3 नवम्बर 2015।
पूर्व विधायक गुरूशरण छाबड़ा को छाबड़ा समाज एवं अन्य मित्र लोगों की ओर से दीप प्रज्ज्वलित कर श्रद्धांजलि दी जा रही है। अनूपगढ़,घड़साना,रामसिंहपुर,श्रीबिजयनगर में छाबड़ा समाज के लोग अपने घरों पर दीप जला कर श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं। छाबड़ा समाज की यह मांग भी उठी है कि छाबड़ा जी को शहीद का दर्जा प्रदान किया जाए।

गुरूशरण छाबड़ा,चौ.चरणसिंह और टैगोर सेंट्रल एकेडमी सूरतगढ़ के बच्चे:स्मृति:


- करणीदानसिंह राजपूत-
सूरतगढ़, 3 नवम्बर 2015.
गुरूशरण छाबड़ा के विधायक काल का एक पुराना चित्र 1978 का है जब केन्द्रीय गृहमंत्री चौ.चरणसिंह सूरतगढ़ पधारे थे और फार्म कोठी मुख्यालय के आगे खाली स्थान पर आम सभा हुई थी। इस फोटो में टैगोर सेंट्रल एकेडमी स्कूल के बच्चों ने चरणसिंह का स्वागत किया था। चौधरी चरणसिंह के साथ गुरूशरण छाबड़ा हाथ में मालाएं लिए खड़े हुए हैं।


गुरूशरण छाबड़ा ने गंगानगर किसान आँदोलन 1969-70 में भी गिरफ्तारी दी थी:


- करणीदानसिंह राजपूत -
सूरतगढ़,3 नवम्बर 2015.
गुरूशरण छाबड़ा अपने विद्यार्थी जीवन और उसके तुरंत बाद भी आँदोलनों में भाग लेना शुरू कर दिया था।
सन् 1969-70 में श्रीगंगानगर जिले में कृषि भूमि की नीलामी रूकवाने के लिए किसानों का ऐतिहासिक जेल भरो आँदोलन हुआ था जिसमें गुरूशरण छाबड़ा ने भी प्रदर्शन कर गिरफ्तारी दी थी। छाबड़ा उस समय भरतपुर जेल में रखे गए थे। श्रीगंगानगर की जेलें ही नहीं राजस्थान की जेलों में भी किसानों को रखने की जगह नहीं रही थी। उस समय मुख्यमंत्री मोहनलाल सुखाडिय़ा की सरकार थी जिसने कृषि भूमि केवल नीलामी से देने की कार्यवाही शुरू की थी।

श्रीगंगानगर के नेताओं ने मांग की कि किसानों को भूमि का आवंटन किया जाए। आँदोलन में किसानों की जीत हुई और सुखाडिय़ा को अपनी सरकार का निर्णय बदलना पड़ा। किसानों को भूमि का आवंटन शुरू हुआ। उस समय तक हनुमानगढ़ जिला अलग बना हुआ नहीं था।
उस समय का एक चित्र यहां दिया जा रहा है जिसमें छाबड़ा जी नारा लगाते हुए दिखाई दे रहे हैं।

सूरतगढ़ राजकीय महाविद्यालय शहीद गुरूशरण छाबड़ा की देन:


छाबड़ा हुए शहीद:
- करणीदानसिंह राजपूत -
सूरतगढ़ 3 नवम्बर 2015.
राजकीय महा विद्यालय सूरतगढ़ शहीद हुए पूर्व विधायक गुरूशरण छाबड़ा की अपने विधायक काल की महत्वपूर्ण देन है। यह महा विद्यालय सन् 1977 में स्थापित किया गया था। राजकीय महा विद्यालय के लिए सन् 1972 में आँदोलन किया गया जिसका नेतृत्व गुरूशरण छाबड़ा ने किया व अनेक साथियों ने इसमें योगदान किया। छाबड़ा के चुनाव में यह घोषणा ही थी कि जीता तो राजकीय महाविद्यालय ख्ुालवाऊंगा।
भैरोंसिंह शेखावत मुख्यमंत्री चुने गए उसी रात में करीब 11 बजे उनके निवास पर पहुंच कर भेंट की गई थी और यह माँग याद दिलाई गई।
छाबड़ा के साथ इस माँग को उस रात में प्रस्तुत करने वालों में करणीदानसिंह राजपूत व उस माणकसर निवासी राजाराम कड़वासरा थे जो अब संसार में नहीं है।
राजकीय महाविद्यालय ीावन नहीं था सो पहली बार कक्षाएं सेठ राम दयाल राठी राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में लगाई गई। उसके बाद सारड़ा धर्मशाला किराए पर ली गई।
उसके बाद सोहनलाल रांका की अध्यक्षता में महाविद्यालय भवन निर्माण समिति बनी और उसकी देखरेख में जन सहयोग से भवन बनाया गया। इसका शिलान्यास प्रो.केदारनाथ के हाथों से करवाया गया। वर्तमान भवन का बाद में विस्तार हुआ।

गुरूशरण छाबड़ा ने आपातकाल बंदियों का लोकतंत्र रक्षा सेनानी संगठन भी बनाया था:


राजस्थान प्रदेश संयोजक प्रभात रांका हैं:
खास खबर- करणीदानसिंह राजपूत
शराबबंदी की मांग को लेकर शहीद हुए छाबड़ा ने आपातकाल में बंदी रहे लोगों के लिए अखिल भारतीय स्तर पर एक लोकतंत्र रक्षा सेनानी संगठन भी बनाया था।
इकतालीस साल पहले आपातकाल सन 1975 में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के शासन काल में आपातकाल लगा कर हजारों लोगों को जेलों में ठूंस दिया गया था। उस समय के शासन के विरोध में अनेक लोग प्रदर्शन सभाओं में आंदोलन को उतरे और वे भी जेलों में डाल दिए गय थे।
कुछ प्रदेशों में मीसा व राष्ट्रीय सुरक्षा कानून में बंदी बनाए गए लोगों को पेंशन देनी शुरू कर दी। जिसमें राजस्थान भी शामिल है।
इसके अलावा हजारों लोग शांतिभंग कानून में गिरफ्तार किए गए थे। ऐसे लोकतंत्र रक्षक सेनानियों को पेंशन दिए जाने पर विचार भी चल रहा है मगर उसकी गति धीमी है। शांति भंग में गिरफ्तार किए लोगों की उम्र भी आज के समय में साठ से ऊपर तक पहुंच गई है तथा कई लोग तो अनेक परेशानियों में बीमारियों में वृद्धावस्था जीवन जी रहे हैं।
शांतिभंग कानून में बंदी बनाए गए लोगों को पेंशन सुविधा मिलने  की सोच के साथ कुछ सालों से कार्य तो किया जा रहा था मगर उसकी गति धीमी रही थी।
पूर्व विधायक गुरूशरण छाबड़ा ने इसके लिए अखिल भारतीय स्तर पर कई महीनों से कार्य शुरू कर संपर्क किया और संगठन खड़ा किया। अभी संगठन शुरूआती स्थिति में आगे बढ़ रहा था छाबड़ा जी संसार छोड़ गए। अखिल भारतीय स्तर पर इस नए संगठन का नाम आपातकाल लोकतंत्र रक्षा सेनानी संगठन रखा गया है।

शहीद छाबड़ा के पुत्र गौरव से ताजा बात-देह एसएमएस को दान:करणीदानसिंह राजपूत



सूरतगढ़, 3 नवम्बर,2015.
शहीद छाबड़ा के पुत्र गौरव से सुबह वार्ता हुई है।
गौरव ने बताया बाऊजी का स्वर्गवास सुबह 4-30 पर हो गया। उनकी पूर्व घोषणाओं के अनुसार नेत्र दान करवा दिया जाने के बाद देह षर पर ले आए हैं। उनकी देह दान की घोषणा लिखित में पूर्व में की हुई है जिसके अनुसार करीब बारह बजे एसएमएस की गाड़ी घर पर आ जाएगी। एसएमएस स्टाफ को देह अर्पण कर दी जाएगी। उस समय छाबड़ा जी के आँदोलन में साथी रहे संगठनों के कार्यकर्ता आदि भी उपस्थित रहेंगे।
गौरव की बातचीत में कोई शोक नहीं था। छाबड़ा ने अपने पुत्रों को यही संस्कार दिए थे कि रोना नहीं है।
उनकी धर्मपत्नी के संसार त्यागने के समय भी यही संकल्प रहा था।
गौरव ने बताया कि राजस्थान के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री और मंत्री अरूण चतुर्वेदी रात्रि में साथ थे। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी मिल कर गए थे। 

गुरूशरण छाबड़ा हुए शहीद:शराबबंदी की मांग पर आमरण अनशन था:



जयपुर एसएमएस में ली भोर में अंतिम सांस:
- करणीदानसिंह राजपूत -
सूरतगढ़, 3 नवम्बर,2015.
पूर्व विधायक गुरूशरण छाबड़ा राजस्थान में संपूर्ण शराबबंदी और सशक्त लोकपाल की मांग को लेकर आमरण करते हुए शहीद हो गए। उनकी शहादत राजस्थान ही नहीं देश में स्मरण की जाती रहेगी। आज सुबह करीब 4-30 पर उन्होंने संसार से विदा ली। उन्होंने अबकी बार तीसरी बार आमरण अनशन शुरू किया था। 

गुरूशरण छाबड़ा ने कहा था कि उनके संसार त्यागने का शोक न मनाया जाए- करणीदानसिंह राजपूत
करणी प्रेस इंडिया लगातार समाचार रिपोर्टें पाठको के पास पहुंचाता रहा है।
अभी कुछ दिन पहले की रिपोर्ट दी जा रही है। इस न्यूज साइट पर पहले के समाचार भी लगे हुए हैं।
अभी कुछ दिन पहले की रिपोर्ट दी जा रही है।
सूरतगढ़ के पूर्व विधायक गुरूशरण छाबड़ा को पुलिस ने उठा चिकित्सालय में भर्ती कराया:
छाबड़ा शहीद समारक जयपुर पर शराबबंदी और सशक्त लोकपाल की मांग को लेकर आमरण अनशन पर थे:
पुलिस ने वहले भी उठाकर चिकित्सालय में भर्ती कराया था मगर वहां से डिस्चार्ज करते ही वापस आमरण अनशन पर बैठ गए थे।
-छाबड़ा चिल्ला रहे थे कि सरकार मेरी सेहत बहाना कर रही है,मेरी सेहत ठीक है,सरकार को जनता की सेहत की चिंता नहीं है।
- करणीदानसिंह राजपूत -
सूरतगढ़,21 अक्टूबर 2015.
सूरतगढ़ के पूर्व विधायक गुरूशरण छाबड़ा को आज भार पुलिस बल से शहीद समारक जयपुर से उठा कर पुलिस ने एसएमएस चिकित्सालय में भर्ती करा दिया। छाबड़ा ने राजस्थान में संपूर्ण शराबबंदी और सशक्त लोकपाल की मांग को लेकर 2 अक्टूबर को शहीद समारक पर आमरण अनशन शुरू किया था। पुलिस ने घेराबंदी करके उठाया। छाबड़ा जोर जोर से चिल्ला रहे थे कि सरकार मेरी सेहत का बहाना बनाकर उठा रही है जबकि गरीबों की सेहत की सरकार को चिंता नहीं है। छाबड़ा कह रहे थे कि सरकार मीडिया से दूर करना चाहती है ताकि यह समाचार लोगों तक नहीं पहुंचे जो लगातार प्रसारित हो रहे हैं। छाबड़ा ने कहा कि मेरा अनशन जारी रहेगा। पुलिस द्वारा चिकित्सालय में ीारती कराए जाने के बाद भी छाबड़ा ने अनशन नहीं तोड़ा है। दाबड़ा का अनशन आज बीसवें दिन जारी है।
छाबड़ा ने जब 2 अकटूबर को अनशन शुरू किया था तब पुलिस ने 6 अक्टूबर को उठाकर चिकित्सालय में गहन चिकित्सा इकाई में भर्ती करा दिया जहां पर अनशन जारी था। इसके बाद सरकार के निर्देश पर पुलिस ने उनको ऐसे वार्ड में अपराधियों के साथ रखा जहां पर उनका ईलाज किया जाता है। सरकार डराना व झुकाना चाहती थी लेकिन जब कुछ भी नहीं कर पाई तब 15 अक्टूबर को चिकित्सकों से फिट की रिपोर्ट करवाई और चिकित्सालय से डिस्चार्ज करवा दिया। छाबड़ा चिकित्सालय से डिस्चार्ज किए जाने के बाद वापस शहीद स्मारक पहुंचे और अनशन पर बैठ गए। आज उनको फिर उठा कर चिकित्सालय में भर्ती कराया गया है।
इसी बीच भाजपा और कांग्रेस के बीच छाबड़ा के आमरण अनशन को लेकर बयानबाजी भी हुई है। कांग्रेस ने छाबड़ा के आमरण अनशन पर ध्यान नहीं देने पर भाजपा सरकार को संवेदनहीन बताया वहीं भाजपा की ओर से छाबड़ा को कांग्रेस का मुखौटा करार दिया गया।
गुरूशरण छाबड़ा आरएसएस के कार्यकर्ता हैं। जनसंघ से राष्ट्रीय पार्टी के सदस्य रहे हैं।आपातकाल 1975 के विरोध में जेल गए और जेल में भी आमरण अनशन किया था। जनता पार्टी के टिकट पर 1977 में सूरतगढ़ से विधायक चुने गए थे। उस समय जनता युवा संघ में जब वसुंधरा राजे उपाध्यक्ष थी तब छाबड़ा भी उपाध्यक्ष ही थे। छाबड़ा ने कांग्रेस राज में अनेक बार आँदोलन किए इसलिए उनको कांग्रेस का मुखौटा बताकर ध्यान नहीं दिया जाना गलत है।
छाबड़ा ने अपनी देह दान की घोषणा पूर्व में ही कर रखी है।
छाबड़ा ने पहले एक बयान में कहा था कि गुजरात में शराब बंद है और वहां शराब की आय के बिना सरकार चल सकती है तब राजस्थान में सरकार क्यों नहीं चल सकती।
विदित रहे कि अशोक गहलोत की सरकार के समय भी छाबड़ा ने आमरण अनशन किया था। छाबड़ा का आरोप है कि सरकार ने जो लिखित समझौता किया था उसका पालन क्यों नहीं कर रही है।
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Monday, November 2, 2015

गुरूशरण छाबड़ा का आमरण अनशन:सूरतगढ़ में सरकार को चेतावनी:


उपखंड अधिकारी सूरतगढ़ के माध्यम से सीएम वसुंधरा को ज्ञापन भेजा गया:
: स्पेशल न्यूज :
सूरतगढ़,2 नवम्बर। नागरिक संघर्ष समिति ने पूर्व विधायक गुरूशरण छाबड़ा के जयपुर में 2 अक्टूबर से चल रहे आमरण अनशन का समर्थन करते हुए राजस्थान सरकार को चेतावनी दी है कि छाबड़ा के साथ पूर्व में किए गए समझौतों को जल्दी से जल्दी लागू किया जाए। छाबड़ा राजस्थान में संपूर्ण शराबबंदी लागू करने और सशक्त लोकपाल नियुक्त करने की मांगों को लेकर आमरण अनशन पर हैं तथा एक माह बीत चुका है।
छाबड़ा को चिकित्सालय में भर्ती करा दिया गया लेकिन वहां पर भी आमरण अनशन जारी है। छाबड़ा का स्वास्थ्य निरंतर गिर रहा है और सरकार को कोई परवाह नहीं है।
नागरिक संघर्ष समिति ने हरबक्स कौर बराड़ के नेतृत्व में ज्ञापन उपखंड अधिकारी रामचन्द्र पोटलिया को सौंपा।
इस प्रतिनिधि मंडल में का.मदन औझा, सचिव राजेन्द्र मुदगल,श्याम मोदी,महावीर भोजक,अमित कल्याणा,पवन सोनी,शीतल सिडाना,नरेन्द्र भाटी,श्रीमती राजेश सिडाना,प्रेम ओड,राम प्रवेश डाबला,पूर्ण राम सहित कई लोग शामिल थे।

Sunday, November 1, 2015

तुमने मेरे दिल को थप थपाया:कविता



तुमने सालों बाद
मेरे दिल को थप थपाया,
काश तुम पहले बतियाती।
छत की सुहावनी
संध्या और
गुलाबी सर्दी में
बदन को छूकर निकलती
हवा।
कुछ कुछ करने लगी।
तुमने सालों बाद
मेरे दिल को थप थपाया।
यह तो सच्च है
तुम्हारे कोई असर
नहीं पड़ा है सालों का।
वही रूप वही मुखड़ा
वही बोली वही मुस्कराहट।
तुमने सालों बाद
मेरे दिल को थप थपाया।
तुम्हारी नजरें दिल में
उतर कर बातें करने वाली,
पहले भी थी और अब भी है।
तुम्हारी डायरी का हर पन्ना
बयां करता है
खूशबू भरी सी
पल पल की कहानी
जो तुमने जीया है
इंतजार में।
तुमने सालों बाद
मेरे दिल को थप थपाया।
तुम अभी भी छिपते सूरज
की बातें करने में
इधर उधर गरदन घूमाती,
कभी नभ कभी फर्श को
निहारती रही।
मैं कैसे खोलूं दिल
के द्वार।
मैं भी
तुम्हारी घूमती गरदन
और उसी छिपते
सूरज को देख रहा हूं।
=====


करणीदानसिंह राजपूत,
स्वतंत्र पत्रकार,
सूरतगढ़. 93143 81356.

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सुपर थर्मल पावर स्टेशन में सुपर घोटाले:बड़े लोग बड़ी कंपनियां शामिल:


सुपर क्रिटिकल दो यूनिटों के पानी संग्रहण टैंक निर्माण में भारी घोटाला:

पूर्व विधायक स.हरचंदसिंह सिद्धु द्वारा सूचनाएं मांग जाने पर हड़कंप:
- करणीदानसिंह राजपूत -
सूरतगढ़। सूरतगढ़ सुपर थार्मल पावर स्टेशन में करोड़ों रूपए के घोटाले होते रहे हैं और इंटक यूनियन ने एक बार अत्यन्त महत्वपूर्ण शिकायत की थी कि सीबीआई जांच से सारा खुलासा हो सकता है।
ताजा प्रकरण सुपर क्रिटिकल दो यूनिटों के पानी संग्रहण टैंक की तह के निर्माण में भारी घोटाला हो रहा है। तह में जो मसाला लगाया जा रहा है उसमें निर्धारित बजरी में खुले आम स्थानीय रेत मिला कर इस्तेमाल की जा रही है। राष्ट्रीय उच्च मार्ग के पास एक स्थान पर बजरी लाकर अनलोड की जाती है। वहां पर जेसीबी मशीन से बजरी में रेत मिलाया जाता है। इसके बाद यह मिलावटी बजरी थर्मल में ले जाई जाती है। कई दिनों से यह कार्य चल रहा है जो करोड़ों रूपए का है। इस घोटाले में बड़े राजनीतिक पहुंच वाले लोग शामिल हैं।
पूर्व विधायक स.हरचंदसिंह सिद्धु ने आरोप लगाया है कि इस घोटाले में बड़े लोग और बड़ी कंपनी शामिल हैं तथा थर्मल के बड़े अधिकारियों की मिलीभगत के बिना यह घोटाला हो नहीं सकता।
सिद्धु ने सुपर क्रिटिकल यूनिटों के निर्माण के मुख्य अभियंता से सूचना के अधिकार नियम के तहत महत्वपूर्ण जानकारियां मांगी और उसके बाद यह मामला अचानक बड़े अखबार में खबर में प्रगट हुआ कि डिग्गी निर्माण में घोटाला हो रहा है।
सिद्धु ने ठेकेदार कंपनी का नाम, राशि,जी शेड्यूल जिस के आधार पर ठेका हुआ,डिग्गी खुदाई का ठेका किस कंपनी का हुआ व खुदी हुई मिट्टी वहीं बिछाकर समतल कर दी गई या कितनी दूर फेंकी गई। सिद्धु ने इनकी प्रमाणित प्रतियां मांगी हैं। सिद्धु ने यह आवेदन 26 अक्टूबर को किया। सिद्धु ने थर्मल जाकर और राष्ट्रीय उच्च मार्ग पर अवलोकन भी किया।
सिद्धु ने आरोप लगाया कि इसकी तत्काल ही कार्यवाही होना जरूरी है अन्यथा इतनी पावरफुल यूनिटों की डिग्गी के घटिया निर्माण से अरबों रूपयों का नुकसान कभी हो जाएगा।
सिद्धु ने कहा कि यह जाँच तो आसानी से हो सकती है। खदान से कितनी बजरी आई। उसका रिकार्ड खदान में और वहां के धर्म कांटों पर होगा। कितने ट्रक आदि आए और थर्मल में कितनी बजरी सप्लाई व इस्तेमाल हुई। सिद्धु का आरोप है कि कुछ नेता थर्मल में राजनीति करते हैं और उन्होंने ही घोटालों में छिपे तौर पर ठेकेदारों के माध्यम से लूट में हिस्सेदारी कर रखी है। सिद्धु ने कहा है कि सही जाँच से थर्मल के बड़े इँजीनियर फंस सकते हैं वहीं नेताओं के चेहरे भी बेनकाब हो सकते हैं। विदित रहे कि कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी ने 20 जून 2013 को 2 सुपर क्रिटिकल यूनिटों का शिलान्यास किया था जिनकी प्रत्येक की क्षमता 660 मैगावाट है।

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