Tuesday, September 29, 2015

पूर्व विधायक गुरूशरण छाबड़ा 2 अक्टूबर को शहीद स्मारक पर जयपुर में आमरण अनशन शुरू करेंगे:


- राजस्थान में संपूर्ण शराबबंदी और लोकपाल की माँग-2 बार पहले आमरण अनशन कर चुके हैं:
-अपनी देहदान की घोषणा भी प्रथम आमरण अनशन चलते 29 अगस्त 2013 को कर चुके हैं:
- सामयिक लेख- करणीदानसिंह राजपूत -
पूर्व विधायक गुरूशरण छाबड़ा राजस्थान में संपूर्ण शराबबंदी एवं लोकपाल की मांग को लेकर तीसरी बार शहीद स्मारक जयपुर पर अपना आमरण अनशन शुरू करेंगे। गांधी जयंती पर 2 अक्टूबर को छाबड़ा का आमरण अनशन शहीद स्मारक गवन्र्मेंट हॉस्टल के सामने आमरण अनशन शुरू करेंगे। छाबड़ा के समर्थन में अनेक लोग जवाहरलाल नेहरू मार्ग पर स्थापित गांधी प्रतिमा के आगे 2 अक्टूबर को ए िदिन का सांकेतिक अनशन करेंगे।
सादगी पूर्ण जीवन जीने वाले पूर्व विधायक बचपन से ही कुरीतियों व नशे के विरोधी रहे हैं।
शराब बंदी और लोकपाल की मांग को लेकर उन्होंने पहला आमरण अनशन जयपुर में 15 अगस्त
 से राजापार्क आर्य समाज के परिसर में आमरण अनशन शुरू किया था। वह अनशन चिकित्सालय ले जाए जाने के उपरांत वहां भी जारी रहा। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत लगातार उनसे मिल कर अनशन त्याग करने की अपील करते रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा था कि छाबड़ा जैसे कुछ लोग ही बचे हैं तथा उनका जीवन अनमोल है।
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने छाबड़ा को अनशन त्यागने के लिए मनाया और दिनांक 9 सितम्बर 2013 को फलों का रस अपने हाथों से पिला कर अनशन समाप्त करवाया। अशोक गहलोत के राज में 5 सदस्यीय एक कमेटी का गठन किया गया जिसे एक निश्चित अवधि में अपनी रिपोर्ट पेश करनी थी। वह कार्य पूरा नहीं हो पाया हालांकि कुछ बिंदुओं पर सहमति बन गई थी। इसके बाद राज बदल गया। कांग्रेस के बदले भाजपा राज आया।
पूर्व विधायक गुरूशरण छाबड़ा ने इन्हीं मांगों पर वसुंधरा राजे सरकार से संपर्क किया लेकिन किसी भी प्रकार की सहमति नहीं बनी।
छाबड़ा ने दूसरी बार 1 अप्रेल 2014 से जयपुर में आमरण अनशन शुरू किया। छाबड़ा का कहना था कि संपूर्ण शराबबंदी का कानून बनाया जाए और संपूर्ण रूप में ही लागू भी किया जाए।
छाबड़ा का कहना था कि जब गुजरात में दारू बंद है तथा वहां दारू से एक रूपए की आय नहीं है और वहां की सरकार चल रही है,तब राजस्थान की सरकार दारू बिना क्यों और कैसे नहीं चल सकती?
दूसरी बार के अनशन में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत 21 वें दिन छाबड़ा जी से मिले और काफी देर तक बात की।
पूर्व मुख्यमंत्री ने पत्रकारों से कहा कि मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को ईगो- अहम- छोड़ कर छाबड़ा जी से मिलना चाहिए। छाबड़ा जी गांधीवादी तरीके से अनशन पर हैं,और वे भी वसुंधरा राजे की पार्टी से ही विधायक भी रह चुके हैं। गहलोत ने कहा कि उनके कार्यकाल में भी छाबड़ा जी ने अनशन किया था तब वे खुद कई बार छाबड़ा जी से मिले थे और कई बिंदुओं पर सहमति हुई थी जो लागू किए गए थे। लेकिन वसुंधरा राजे ने वे नियम आगे लागू नहीं किए। अशोक गहलोत ने यह भी कहा कि राजस्थान में संपूर्ण शराबबंदी लागू किया जाना संभव नहीं है।
आपातकाल के बाद 1977 में हुए विधानसभा चुनाव में जनता पार्टी की पहली सरकार मुख्यमंत्री भैरोंसिंह शेखावत की बनी थी। उस समय जनता युवा विधायक दल बना था जिसमें गुरूशरण छाबड़ा और वसुंधरा राजे दोनों उपाध्यक्ष थे।
छाबड़ा का दूसरी बार का आमरण अनशन 45 दिन चला और आश्वासन पर चिकित्सालय में खत्म हुआ था।
महत्वपूूर्ण यह भी है कि जब गुजरात में शराबबंदी को अच्छा माना गया है तब राजस्थान में इसे अच्छा मानते हुए शराबबंदी लागू क्यों नहीं की जाती? छाबड़ा जी की आयु इस समय करीब 68 वर्ष है और वे अपनी इन दोनों मांगों पर दृढ़ हैं।
मेरी उनसे 29 सितम्बर को पुन:बातचीत हुई है और वे 2 अकटूबर को शहीद स्मारक पर आमरण अनशन शुरू कर देंगे। भारत में सामाजिक एवं धार्मिक एकता और सामंजस्य बना रहने के संकल्प के तहत वे आमरण अनशन शुरू करने सें पहले जयपुर में विभिन्न धार्मिक स्थलों पर नमन करके आऐंगे।
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