गुरुवार, 19 फ़रवरी 2015

सर्वत्र उठा रहा सवाल-क्या दे गए मोदी? क्या दे गई वसुंधरा?

 

मोदी बाबा का ठुल्लू:सूरतगढ़ सभा 1 आदमी 25 हजार का पड़ा होगा:

सरकारी खजाने पर 50 करोड़ से अधिक का खर्च पर दिल्ली  राजनैतिक मृत्यु  का बारहवां किया।

टिप्पणी- करणीदानसिंह राजपूत


दिल्ली में 7 फरवरी को चुनाव मतदान के ठीक 12 वें दिन सूरतगढ़ में मोदी जी की सभा और उसमें वसुंधरा राजे के उदगार। मोदी के नाम पर हमने विधानसभा,लोकसभा,स्थानीय निकाय और पंचायतों के चुनाव जीते। दिल्ली में हुई राजनैतिक मृत्यु के बारहवें को मानो इन शब्दों के साथ भुलाया जा रहा हो। जनता का धन खुले रूप में बरबाद करने या दुरूपयोग करने का इससे बड़ा कोई उदाहरण नहीं हो सकता।

मोदी जी ने कहा कि पहले की सरकार कमरों में बैठे योजनाएं लागू कर देती थीं उसको बदलने के लिए मैंने यह तय किया है कि योजना को जनता के बीच में जाकर लागू किया जाए। लेकिन मोदी जी ने यह योजना चुनी जो पूरे देश में पहले से ही चल रही है। राजस्थान में पहले से ही खेत की मिट्टी परीक्षण की प्रयोगशालाएं काम कर रही है और किसान उसका लाभ उठा भी रहे हैं। जिस श्रीगंगानगर जिले को चुना गया उसमें भी प्रयोगशाला कार्य कर रही है तथा लाखों लोग उससे अपने खेतों की मिट्टी परीक्षण करवा चुके हैं। इसके अलावा मोबाइल वाहन प्रयोगशालाएं भी काम कर रही हैं। स्वयं मोदी जी ने कहा कि गुजरात में यह योजना सालों से काम कर रही है। पंजाब हरियाणा में भी यह कार्य हो रहा है। सभा में जिन राज्यों को अधिक उत्पादन का पुरस्कार प्रदान किया गया। ओडिसा को प्रथम पुरस्कार दिया गया। क्या वहां मिट्टी परीक्षण का कार्य नहीं हो रहा होगाï? जिन किसानों को प्रगतिशील होने का पुरस्कार प्रदान किया गया जो अलग अलग राज्यों से चुने गए थे। क्या वे बिना मिट्टी 
परीक्षण करवाए ही अपने खेतों में फसलें उगा रहे थे?
कहने का तात्पर्य यह है कि यह कार्य तो सालों से चल रहा था।
इसके पीछे किसकी सोच है जिसमें सरकार के करोड़ों रूपए यों फूंक दिए गए। भाजपा कार्य कर्ताओं के बीच में भाषण दिलवाने के रूप में। यह बात भी इसलिए लिख रहा हूंकि भाजपा नेताओं को मत्रियों विधायकों आदि को ही भीड़ जुटाने का कहा गया था।
भाजपा मंत्रियों,विधायकों व पदाधिकारियों की एक बैठक में यहां कहा गया कि 4 लाख लोगों को लाया जाए।
अखबारों व चैनलों पर ये समाचार भी आए। लाखों लोगों को जुटाने के लिए कितनी ही जगहों पर बैठकें हुई।
सूरतगढ़ का स्टेडियम 25 हजार क्षमता का है। सुरक्षा व्यवस्था मंच रास्ते आदि के बाद ठसाठस भरने के बाद भी लाखों बैठ छोड़ खड़े  नहीं किए जा सकते।
सभा में जो भीड़ आम लोगों की मानी जाए वह 20 हजार के लगभग रही जिसे चाहे अपनी खुशी के लिए चाहे नेताओं की खुशी के लिए लाखों की बताइ जाए।
इतनी भीड़ जुटाने के लिए सरकारी खजाने का 50 करोड़ रूपए से अधिक का खर्च कर दिया गया जो कि यह आंकड़ा बढ़ भी सकता है।
सीधे सादे रूप में भीड़ का एक आदमी कम से कम 25 हजार का पड़ा।  भाजपा के नेताओं व कार्यकर्ताओं की जेब से हुआ खर्च अलग से।
मोदी जी ने चुनावी सभाओं में कहा था कि विदेशों से काला धन आने पर भारत के हर आदमी के खाते में 15 लाख रूपए जमा हो जाऐंगे। हालांकि बाद में अमित शाह ने दिल्ली चुनाव में इसे एक जुमला बता दिया था। काला धन ना जाने कब आएगा?
लेकिन सूरतगढ़ की सभा में एक आदमी 25 हजार का पड़ा। कमसे कम इसे देश के विकास से जोड़ कर देखना शुरू करें तो इस प्रकार की सभाओं से देश तेजी से तरक्की करेगा या मोदी योजनाओं के पंख लगा देंगे।
मोदी के भाषण के अंशों पर भी गौर करें जो सच्चाई उगल रहे हैं या मोदी अनजाने में उगल गए।
मोदी जी ने कहा कि किसान को अपने खेत की मिट्टी की जांच से पता होगा कि उसमें कौनसी फसल अधिक पैदा हो सकती है और उसमें किस खाद की जरूरत है। दिल्ल्ी की मिट्टी की जांच करवाई होती और उसके अनुरूप फसल उगाई जाती व खाद डाली जाती तो फसल भरपूर पैदा होती लेकिन वहां तो भाजपा का अंकुरण ही नहीं हो पाया। खेत के खेत खाली रह गए। केवल 3 में अंकुरण हुआ। मिट्टी खराब थी? बीज खराब थे? खाद दूसरी डालते रहे? वहां आप की फसल हर खेत में लहलहाई 3 को छोड़ कर। मतलब केजरीवाल ने वहां कह मिट्टी का परीक्षण करवाया और उसके अनुरूप फसल बीजी व खाद डाली।
वाह क्या कह गए मोदी जी।
अभी बहुत कुछ चर्चाएं होंगी।
मुख्य चर्चा जो आ रही है कि सभा फेल रही। भीड़ कम रही।
कपिल शर्मा की कॉमेडी नाइट में अनेक बार एक जुमला आता रहा है। बाबाजी का ठुल्लू।

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