Sunday, August 24, 2014

पूर्व राज्यमंत्री रामप्रताप कासनिया ने सूरतगढ़ से अपना वोट कटवाया:वापस पीलीबंगा


बेबाक खरी खरी कहने वाला नेता वापस पीलीबंगा क्षेत्र में जुड़ गया:
कासनिया की राजनीति का हनुमानगढ़ जिले में नया रूप सामने आने की पूरी संभावना है।
खास खबर- करणीदानसिंह राजपूत
सूरतगढ़, पूर्व राज्यमंत्री रामप्रताप कासनिया ने सूरतगढ़ विधानसभा क्षेत्र के सूरतगढ़ शहर में से अपना वोट कटवा लिया है और पीलीबंगा विधानसभा क्षेत्र में जुड़वा लिया है। सूरतगढ़ विधानसभा क्षेत्र में कासनिया समर्थक भाजपा कार्यकर्ताओं व कासनिया समर्थक अन्य गैर राजनैतिक लोगों को इस खबर से एक झटका लगेगा लेकिन यह सच्च है।
सूरतगढ़ शहर में भी कई लोग कासनिया को स्थापित करने को उत्सुक रहे,मगर वे स्थापित कर नहीं पाए। यह भी कहा जा सकता है कि कासनिया ने गहरी रूचि ही नहीं ली। शहर वासियों ने भी उनसे संबंध बढ़ाने में कोई रूचि नहीं दिखलाई।
रामप्रताप कासनिया की राजनीति पीलीबंगा क्षेत्र में ही प्रभावशाली रही जब सूरतगढ़ तहसील का बड़ा हिस्सा पीलीबंगा विधानसभा में था।
सन् 2003 के चुनाव में कासनिया को भाजपा की टिकट नहीं मिली और काट कर गंगाजल मील को दे दी गई थी तब कासनिया ने निर्दलीय जीत प्राप्त की।
लेकिन 2008 में पीलीबंगा क्षेत्र अनुसूचित जाति कि लिए आरक्षित हो गया तब वहां से चुनाव लडऩे वाले सूरतगढ़ में आ गए।
 2008 के चुनाव में कांग्रेस के गंगाजल मील को जीत मिली वहीं भाजपा के कासनिया को करारी मात मिली। जनता ने 50 साल पुरानी जमीनों के खातेदारी अधिकार जैसे काम कराने के बावजूद कासनिया को तीसरे नम्बर पर पर फेंक दिया। उस चुनाव में निर्दली राजेन्द्र भादू को दूसरा क्रम मिला। वह तीसरा नम्बर गहरी चोट पहुंचाने वाला रहा और उसके बाद 2013 में भाजपा ने टिकट राजेन्द्र भादू को देकर कासनिया को राजनैतिक फांसी खाने वाले स्थान पर पहुंचा दिया। राजेन्द्र भादू को समर्थन देते वक्त कासनिया ने सार्वजनिक सभा में घोषणा भी करदी कि वे पार्टी की ईच्छानुरूप फांसी ले रहे हैं।
सन् 2008 में कांग्रेस के गंगाजल मील के जीतने के बाद 2013 तक पूरे पांच साल का वक्त कासनिया ने चुप रह कर ही बिताया था। अब राजेन्द्र भादू के जीतने के बाद भी कासनिया का वक्त गहन चुपी में ही बीत रहा था तथा यहां रहने का मतलब आगे भी चुप ही रह कर वक्त बीताना होता।
कासनिया में एक खासियत रही है कि उनकी दबंगता को कोई इन्कार नहीं कर सकता और उनकी खरी खरी कहने वाली पद्धति या आदत को कोई भी अपना नहीं सकता।
सूरतगढ़ में वर्तमान विधायक राजेन्द्र भादू की कार्य प्रणाली से लोग क्षुब्ध होने लगे हैं और यह दूरियां आगे और बढऩे की संभावना है। कासनिया सूरतगढ़ में रह कर कोई भी कार्य करते तो आरोप यही लगता कि कासनिया खराब कर रहे हैं। अब यह आरोप तो नहीं लग पाएगा और न लगाया जा सकेगा।
पीलीबंगा में कोई दबंग नेता अभी नहीं था। कहना तो यह चाहिए कि हनुमानगढ़ जिले में भी कासनिया जैसा दबंग वर्तमान में नहीं था।
यह जरूरी नहीं है कि व्यक्ति विधायक पद पर रहते हुए ही काम कर सकता है। विधायक पद के बिना भी अन्य पद पर रहते हुए भी बहुत कुछ किया जा सकता है और करवाया जा सकता है।
कासनिया की राजनीति बड़ी गहरी सोच वाली रही है और उसे साधारण रूप में तथा जल्दी से समझा नहीं जा सकता।
पंचायत चुनाव आने वाले हैं और उनमें कासनिया की राजनीति का हनुमानगढ़ जिले में नया रूप सामने आने की पूरी संभावना है।

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