Monday, August 18, 2014

नाव अर जाळ उपन्यास का विमोचन समारोह:कलमकारों का संगम:


पत्रकारिता और साहित्य में नये संपर्क नए सृजन के संकेत करते चित्र:
सूरतगढ़, 17 अगस्त 2014.
राजस्थानी साहित्यकार मनोज कुमार स्वामी सूरतगढ़ ने मलयालम भाषा के साहित्यकार तकषी शिव शंकर पिल्ले के उपन्यास चैम्मीन के हिन्दी अनुवाद मछुआरे का आगे राजस्थानी में अनुवाद किया। उसी राजस्थानी अनुवाद नाव अर जाळ का विमोचन समारोह 17 अगस्त 2014 को हुआ जिसमें साहित्यकारों,पत्रकारों,राजनीतिज्ञों,समाजसेवियों,शिक्षाविदों व राजस्थानी भाषा प्रेमियों का अनूठा संगम हुआ और पत्रकारिता व साहित्य में नये संपर्क नए सृजन के संकेत सामने आए। तकषी शिव शंकर पिल्ले का उपन्यास चैम्मीन केन्द्रीय साहित्य अकादमी से पुरस्कृत है। केन्द्रीय साहित्य अकादमी ने ही उसके हिन्दी अनुवाद से आगे राजस्थानी में अनुवाद करवाया।

प्रसिद्ध पत्रकार करणीदानसिंह राजपूत की अध्यक्षता में हुए विमोचन समारोह में केन्द्रीय साहित्य अकादमी से पुरस्कृत प्रसिद्ध साहित्यकार डा.भरत ओळा मुख्य अतिथि थे। ओळा ने अपने भाषण में कि मूल लेखन से अनुवाद करना अधिक दुष्कर कार्य है। अनुवाद में भावनाओं के अनुरूप होने वाला अनुवाद ही सही माना जाता है जो कार्य मनोज स्वामी ने किया है।
मनोज कुमार स्वामी ने अनुवाद में होने वाले कार्य और परेशानियों व साथ देने वालों  का ब्यौरा दिया।
राजस्थानी अनुवाद पर श्रीमती सुमन शेखावत ने पत्र वाचन किया जिसमें एक एक बात खुलासा की गई।
पूर्व विधायक और वर्तमान में भाजपा श्री गंगानगर जिलाध्यक्ष अशोक नागपाल व गर्भस्थ शिशु संरक्षण समिति के अध्यक्ष परसराम भाटिया विशिष्ट अतिथि थे।
अध्यक्षता करते हुए करणीदानसिंह राजपूत ने बताया कि मनोज स्वामी को एक मछुआरे के रूप में जीते हुए देखा जिसके कारण यह अच्छा अनुवाद हुआ।
शिक्षाविद् महेन्द्रसिंह शेखावत ने मंच संचालन किया।
समारोह में राजस्थानी भाषा मान्यता संघर्ष समिति के अध्यक्ष रहे डा.हरिमोहन सारस्वत,व्याख्याता प्रवीण भाटिया, साहित्यकारों में गोपीराम गोदारा,नंदकिशोर सोमानी,रामेश्वर दयाल तिवाड़ी,राजेश चड्ढा सहित अनेक लोग शामिल हुए। 














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