Sunday, August 24, 2014

पूर्व राज्यमंत्री रामप्रताप कासनिया ने सूरतगढ़ से अपना वोट कटवाया:वापस पीलीबंगा


बेबाक खरी खरी कहने वाला नेता वापस पीलीबंगा क्षेत्र में जुड़ गया:
कासनिया की राजनीति का हनुमानगढ़ जिले में नया रूप सामने आने की पूरी संभावना है।
खास खबर- करणीदानसिंह राजपूत
सूरतगढ़, पूर्व राज्यमंत्री रामप्रताप कासनिया ने सूरतगढ़ विधानसभा क्षेत्र के सूरतगढ़ शहर में से अपना वोट कटवा लिया है और पीलीबंगा विधानसभा क्षेत्र में जुड़वा लिया है। सूरतगढ़ विधानसभा क्षेत्र में कासनिया समर्थक भाजपा कार्यकर्ताओं व कासनिया समर्थक अन्य गैर राजनैतिक लोगों को इस खबर से एक झटका लगेगा लेकिन यह सच्च है।
सूरतगढ़ शहर में भी कई लोग कासनिया को स्थापित करने को उत्सुक रहे,मगर वे स्थापित कर नहीं पाए। यह भी कहा जा सकता है कि कासनिया ने गहरी रूचि ही नहीं ली। शहर वासियों ने भी उनसे संबंध बढ़ाने में कोई रूचि नहीं दिखलाई।
रामप्रताप कासनिया की राजनीति पीलीबंगा क्षेत्र में ही प्रभावशाली रही जब सूरतगढ़ तहसील का बड़ा हिस्सा पीलीबंगा विधानसभा में था।
सन् 2003 के चुनाव में कासनिया को भाजपा की टिकट नहीं मिली और काट कर गंगाजल मील को दे दी गई थी तब कासनिया ने निर्दलीय जीत प्राप्त की।
लेकिन 2008 में पीलीबंगा क्षेत्र अनुसूचित जाति कि लिए आरक्षित हो गया तब वहां से चुनाव लडऩे वाले सूरतगढ़ में आ गए।
 2008 के चुनाव में कांग्रेस के गंगाजल मील को जीत मिली वहीं भाजपा के कासनिया को करारी मात मिली। जनता ने 50 साल पुरानी जमीनों के खातेदारी अधिकार जैसे काम कराने के बावजूद कासनिया को तीसरे नम्बर पर पर फेंक दिया। उस चुनाव में निर्दली राजेन्द्र भादू को दूसरा क्रम मिला। वह तीसरा नम्बर गहरी चोट पहुंचाने वाला रहा और उसके बाद 2013 में भाजपा ने टिकट राजेन्द्र भादू को देकर कासनिया को राजनैतिक फांसी खाने वाले स्थान पर पहुंचा दिया। राजेन्द्र भादू को समर्थन देते वक्त कासनिया ने सार्वजनिक सभा में घोषणा भी करदी कि वे पार्टी की ईच्छानुरूप फांसी ले रहे हैं।
सन् 2008 में कांग्रेस के गंगाजल मील के जीतने के बाद 2013 तक पूरे पांच साल का वक्त कासनिया ने चुप रह कर ही बिताया था। अब राजेन्द्र भादू के जीतने के बाद भी कासनिया का वक्त गहन चुपी में ही बीत रहा था तथा यहां रहने का मतलब आगे भी चुप ही रह कर वक्त बीताना होता।
कासनिया में एक खासियत रही है कि उनकी दबंगता को कोई इन्कार नहीं कर सकता और उनकी खरी खरी कहने वाली पद्धति या आदत को कोई भी अपना नहीं सकता।
सूरतगढ़ में वर्तमान विधायक राजेन्द्र भादू की कार्य प्रणाली से लोग क्षुब्ध होने लगे हैं और यह दूरियां आगे और बढऩे की संभावना है। कासनिया सूरतगढ़ में रह कर कोई भी कार्य करते तो आरोप यही लगता कि कासनिया खराब कर रहे हैं। अब यह आरोप तो नहीं लग पाएगा और न लगाया जा सकेगा।
पीलीबंगा में कोई दबंग नेता अभी नहीं था। कहना तो यह चाहिए कि हनुमानगढ़ जिले में भी कासनिया जैसा दबंग वर्तमान में नहीं था।
यह जरूरी नहीं है कि व्यक्ति विधायक पद पर रहते हुए ही काम कर सकता है। विधायक पद के बिना भी अन्य पद पर रहते हुए भी बहुत कुछ किया जा सकता है और करवाया जा सकता है।
कासनिया की राजनीति बड़ी गहरी सोच वाली रही है और उसे साधारण रूप में तथा जल्दी से समझा नहीं जा सकता।
पंचायत चुनाव आने वाले हैं और उनमें कासनिया की राजनीति का हनुमानगढ़ जिले में नया रूप सामने आने की पूरी संभावना है।

Saturday, August 23, 2014

सूरतगढ़ में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो का छापा: नगरपालिका,1कर्मचारी 1पार्षद घेरे में

शिव कॉलोनी का मामला: भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की जांच
पार्षद राजाराम गोदारा व पालिका कर्मचारी लालचंद सांखला पर आय से अधिक संपत्ति का प्रकरण
सूरतगढ़। पूर्व विधायक हरचंदसिंह सिद्धु की शिकायतों के बाद भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने दोनों के घरों पर जांच की थी व रिकार्ड प्राप्त किया था।
ऐसी सूचना है कि भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने दोनों को लोक सेवक मानते हुए आय से अधिक संपत्ति का प्रकरण के तहत जांच को आगे बढ़ाया है।
शिव कॉलोनी के लिए अधिशाषी अधिकारी पृथ्वीराज जाखड़ आदि ने करोडों रूपए की सड़क का निर्माण करवा दिया।

23~8~2014
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पालिका कर्मचारी लालचंद सांखला की संपति करीब 2 करोड़ 25 लाख

आय से अधिक संपति का मुकद्दमा भी दर्ज होगा:


पूर्व विधायक हरचंदसिंह सिद्धु की सरकार को की गई एक शिकायत सरकार ने ब्यूरो को भेजी थी

खास खबर- करणीदानसिंह राजपूत

लालचंद साखला पहले राजस्थान रोडवेज में कर्मचारी था और वहां भ्रष्टाचार के आरोप में बर्खास्त किया गया था। बर्खास्त कर्मचारी ही किसी भी विभाग में लगाया नहीं जा सकता। लेकिन  इस बाबत समाचार छपते रहने के बावजूद लालचंद को हटाया नहीं गया और जो वेतन दिया गया उसकी वापस वसूली नहीं की गई। लालचंद सांखला पर अब ब्यूरो की कार्यवाही होने पर वह पुराना मामला फिर से उठ रहा है।


नगरपालिका कर्मचारी लिपिक लालचंद सांखला के यहां 26 अगस्त 2013 को घर पर और 27 को बैंकों के खातों और लॉकर में मिले आभूषण और बैंक खातों में मिली संपत्ति का अनुमानित मूल्य करीब सवा दो करोड़ रूपए है। लालचंद सांखला के विरूद्ध आय ये अधिक संपत्ति का मुकद्दमा दर्ज होगा और आगे की विस्तृत जांच में अन्य लोगों से भी पूछताछ होगी। विस्तृत जांच से संपूर्ण स्थिति खुलासा होगा और अन्य जो लोग शामिल पाए जाऐंगे उन पर भी कार्यवाही होगी।

1.लालचंद सांखला के आनन्द विहार में बनाए गए आलीशान मकान का एक 10 लाख का लोन खाता है,जिसकी किस्त प्रतिमाह 12 हजार है और उस खाते में 10 लाख 64 हजार 102 रूपए मिले हैं। इसी में लालचंद का वेतन भी जमा होता रहा है। आश्चर्य यह हो रहा है कि लालचंद को उसके आलीशान मकान में चार एसी लगे हुए मिले हैं। जिनका प्रति दो माह का बिल 21 हजार से कम नहीं होता। लालचंद को वेतन में से कट कर जो रकम मिलती उससे घर का खर्च चल नहीं सकता।

लालचंद के बैंक खातों और लॉकर की जांच में यह राशि और गहने मिले।

1.स्टेट बैंक ऑफ पटियाला की सूरतगढ़ शाखा में लॉकर में 215.713 ग्राम सोने के आभूषण मिले हैं।

2.इस बैंक में चार खाते मिले। लालचंद सांखला के नाम से 10 लाख रूपए का एक लोन खाता मिला जो दि.21-4-2011 को खोला गया था व उसकी प्रतिमाह 12 हजार रूपए किस्त थी। इस खाते में ही लालचंद की तनख्वाह जमा होती थी। इस बैंक खाते में 10 लाख 64 हजार 102 रूपए मिले।

3.लालचंद के दूसरे खाते में 1 लाख 9 हजार 492 रूपए मिले।

4.तीसरा खाता पुत्र अमित के नाम पर है जिसमें 241 रूपए मिले।

5.चौथा खाता पत्नी मायादेवी के नाम पर है जिसमें 81 हजार 802 रूपए मिले।

6. स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की सूरतगढ़ शाखा में पुत्र अमित के नाम वाले खाते में 21 हजार 666 रूपए मिले।

7.स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की सूरतगढ़ शाखा में पुत्र कपिल के खाते में 4 हजार 814 रूपए मिले।

ब्यूरो ने सूरतगढ़ के अन्य सभी बैंकों को पत्र जारी किया है जिसमें लालचंद सांखला व उसके परिवार के किसी सदस्य के नाम खाता और लॉकर आदि हो तो सूचित करने का लिखा है।

एक दिन पहले 26 अगस्त को लालचंद के घर हुई कार्यवाही में जो गहने रकम आदि मिली उसका ब्यौरा इस प्रकिार से है।

8.लालचंद के घर 8 लाख 33 हजार 833 नगद मिले।

9. धर पर 110 ग्राम स्वर्ण और 320 ग्राम चांदी मिली।

10. 1 कार 2 मोटर साईकिल,

11.आनन्द विहार का आवास 40 गुणा 70 फुट बना हुआ जिसकी कीमत करीब 1 करोड़ अनुमानित,

12. बीकानेर की समीक्षा कॉलोनी में 40 गुणा 70 का प्लॉट,

13.लूणकरणसर के पास लालेरा ग्राम में पत्नी मायादेवी के नाम से 25 बीघा जमीन ,

14. सूरतगढ़ के चक 1 पीपीएम में 0.569 हैक्टेअर कृषि भूमि,

15. चक 2 पीपीएम में 4.174 हैक्टेअर कृषि भूमि,

16.सूरतगढ़ की शिव विहार कॉलोनी की जमीन में 5 बीघा जमीन पत्नी मायादेवी के नाम से,

17.पंचायत समिति के पास में दो दुकानें 20 गुणा 40 फुट और 10 गुणा 20 फुट दो पुत्रों अमित और कपिल के नाम से,

18.सूरतगढ़ में एक प्लॉट था जो 29 जनवरी 2013 को बेचा।

19.जयपुर में महला ग्राम में 20 गुणा 40 फुट के 4 प्लॉट,

सूरतगढ़ के सांसी मोहल्ले में 36 गुणा 40 का एक प्लॉट,माहेश्वरी धर्मशाला के पास में एक प्लॉट होने की जानकारी की खबर है।

    भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक भवानीशंकर मीणा ने पत्रकारों को बताया कि नगरपालिका कर्मचारी लालचंद सांखला कि विरूद्ध लगातार शिकायतें मिल रही थी तथा अखबारों में भी भ्रष्टाचार के समाचार छप रहे थे। इस पर 23 अगस्त 2013 को प्रकरण दर्ज किया गया। इसके बाद तीन दल बनाए गए। भवानी शंकर मीणा के दल ने लालचंद सांखला के घर पर,उप पुलिस अधीक्षक लक्ष्मण सांखला ने राजाराम गोदारा के घर पर और उप पुलिस अधीक्षक आनन्द स्वामी ने नगरपालिका कार्यालय में जांच की। कार्यवाही में इंसपेक्टर महेन्द्रसिंह व अन्य स्टाफ भी था।

यह बतलाया गया कि लालचंद सांखला की अधिकतर संपति पत्नी माया के नाम से है। राजाराम गोदारा के यहां जांच इसलिए की गई है कि उस पर लालचंद सांखला की पार्टनरशिप का आरोप है।

लालचंद सांखला नगरपालिका में 24 अक्टूबर 1990 को नियुक्त हुआ था। ब्यूरो के प्राथमिक सूचनानुसार करीब सात साल पहले से इसके पास ऊपरी कमाई होनी शुरू हुई। ब्यूरो के अनुसार जांच कई माह तक चलेगी।

पालिका में लालचंद साखला के अकेले तो कोई कार्य करना संभव नहीं। जिस शिव कॉलोनी को विकसित किया जा रहा है और लालचंद की पत्नी  मायादेवी की उसमें 5 बीघा जमीन है। वह कॉलोनी पालिकाध्यक्ष और अधिशाषी अधिकारी के सहयोग के बिना संभव नहीं है। इस कॉलोनी के प्लॉट अधिक से अधिक कीमत में बिकें इसलिए इंदिरागांधी नहर कॉलोनी की सिंचाई विभाग की सडक़ को बहुत चौड़ी कर नया निर्माण करवाया जिस पर करीब दो करोड़ रूपए अब तक लगाए जाने का आरोप है। इसमें पालिकाध्यक्ष बनवारीलाल मेघवाल, पहले के अधिशाषी अधिकारियों पृथ्वीराज जाखड़ और राकेश मेंहदीरत्ता,सहायक अभियंता कर्मचंद अरोड़ा पर भी आरोप लगते रहे हैं। इनके अलावा स्टाफ भी लपेटे में आ सकता है। यह सडक़ निर्माण का मामला भी अपने आप में बहुत गंभीर है,कि जो सडक़ नगरपालिका की नहीं थी उसका निर्माण करवाया गया।

    पूर्व विधायक और वरिष्ठ वकील हरचंदसिंह सिद्धु ने

नगरपालिका

 व्यापक भ्रष्टाचार होने की शिकायत राज्य सरकार को भेजी थी। जिसमें शिव कॉलोनी पर आरोप थे और उसमें लालचंद सांखला और राजाराम गोदारा पार्षद का भी नाम था। इस शिकायत के बाद राजस्थान सरकार के मुख्य सचिव तथा स्वायत्त शासन विभाग के सचिव से जयपुर में वार्ता हुई और मामला जांच के लिए भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो को भिजवाया गया। सिद्धु ब्यूरो से ही अनुसंधान करवाना चाहते थे। सिद्धु ने इस कार्यवाही के बाद अपने ताजा बयान में कहा कि लालचंद सांखला लोक सेवक में आता है,वहीं पालिकाध्यक्ष बनवारीलाल व पार्षद राजाराम भी लोकसेवक की श्रेणी में ही आते हैं।

आगे देखते हैं कि लालचंद सांखला आय संबंधी क्या स्पष्टीकरण देगा? इस मामले में विस्तृत जांच क्या कार्यवाही होती है? 

28~8~2013



लालचंद सांखला की आननन्द विहार कॉलोनी की कोठी में जांच के कुछ फोटो दिए जा रहे हैं।

 

 

 

 

लाइनपार बड़ोपल रोड पर पार्षद राजाराम गोदारा का आलीशान बंगला है जिसमें सूरतगढ़ पुलिस का पुरूष व महिला दस्ता सुरक्षा के लिए तैनात था। अंदर एक कमरे में भ्रष्टाचार निरोधक दस्ता कागजी कार्यवाही में लगा हुआ था। राजाराम गोदारा का पुत्र महेन्द्र वहां पर था जो ठेकेदारी करता है। उसने पत्रकारों को बताया कि कॉलोनी की कार्यवाही होती है तो उसमें ज्यादा होगा तो टैक्स लगेगा वो भर देंगे।

राजाराम गोदारा के घर पर कार्यवाही के फोटो

 

 




Friday, August 22, 2014

महेन्द्र मील,बनवारी मेघवाल,राकेश मेंहदीरत्ता,पृथ्वी जाखड़,संजय धुआ के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो में प्रकरण


पूर्व विधायक वरिष्ठ वकील स.हरचंदसिंह सिद्धु

महेन्द्र मील बनवारीलाल मेघवाल संजय धुआ राकेश मेंहदीरत्ता पृथ्वीराज जाखड़

महेन्द्र मील,बनवारी मेघवाल,राकेश मेंहदीरत्ता,पृथ्वी जाखड़,संजय धुआ के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो में प्रकरण


सूरतगढ़ वर्कशॉप योजना के भूखंड 174 व 175 खरीद कर नियम विरूद्ध टुकड़े कर बेचान का आरोप:

भूखंडों की खरीद बेचान में नगरपालिका सूरतगढ़ को 2 करोड़ की हानि पहुंचाने का आरोप:


खास खबर- करणीदानसिंह राजपूत

सूरतगढ़,22 अगस्त 2014. नगरपालिका में औद्योगिक भूखंड नं 174 व 175 की नीलामी और उनके रिकार्ड में गलत इन्द्राज व बाद में उनके नियम विरूद्ध टुकड़े कर बेचने आदि में भ्रष्टाचार व सरकार को करोड़ों रूपयों का नुकसान पहुंचाने वाले प्रकरण में पूर्व विधायक वरिष्ठ वकील स.हरचंदसिंह सिद्धु के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की श्रीगंगानगर चौकी में बयान हुए। पालिका के कुछ कर्मचारियों को भी ब्यूरो में बुलाया हुआ था।
वकील स.हरचंदसिंह सिद्धु ने पहले यह प्रकरण मार्च 2013 में भ्रष्टाचार निवारण अदालत श्रीगंगानगर में दायर किया था। सर्वाच्च न्यायालय के निर्देश पर अदालत में सीधे इस्तगासे पर प्रकरण की सुनवाई होने पर रोक लग जाने के कारण बाद में यह प्रकरण ब्यूरो के जयपुर मुख्यालय में दर्ज कराया गया जहां से इसकी प्राथमिक जांच यानि पी दर्ज हुई।
अब इस प्राथमिक जांच प्रक्रिया में ब्यान दर्ज हुए हैं।
सिद्धु ने बयान देने के बाद यहां बताया कि इनमें दो पत्रकारों पर आरोप है।
सिद्धु का आरोप
 

 नगरपालिका सूरतगढ़ की मास्टर प्लान के तहत वर्कशॉप टांसपोर्ट योजना वार्ड नं 6 में भूखंड नं 174 और 175 की खरीद और उसके नियम विरूद्ध टुकड़े कर आगे बेचान करने तथा लीज को भी नियम विरूद्ध संशोधित किए जाने से राजकोष को 2 करोड़ रूपए की हानि पहुंचाने का आरोप लगाते हुए महेन्द्र मील पुत्र गंगाजल मील, पालिकाध्यक्ष बनवारीलाल मेघवाल,अधिशाषी अधिकारी राकेश मेंहदीरत्ता,अधिशाषी अधिकारी पृथ्वीराज जाखड़,संजय धुआ पुत्र फतेहचंद के विरूद्ध पूर्व विधायक वरिष्ठ वकील स.हरचंदसिंह सिद्धु ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं 7-3 ए, बी, सी, डी,भारतीय दंड संहिता की धाराओं 167,218,219,467,468,471,474 व 120 बी के तहत यह वाद दायर किया । इसमें सब रजिस्ट्रार पर भी मिली भगत का आरोप लगाया गया ।

    आरोप लगाया गया है कि वार्ड नं 6 में वर्कशॉप ट्रक ट्रांसपोर्ट योजना के प्लॉट नं 174 व 175 की नीलामी निकाली गई। इनके साईज 120 गुणा 150 फुट थे।

प्लॉट नं 174 की नीलामी में बोलीदाता रिंकलकुमार पुत्र देसराज,राजेन्द्रकुमार पुत्र गिरधारीलाल,नवलकिशोर पुत्र ओमप्रकाश,ओमप्रकाश पुत्र भूरा राम,इन्द्रादेवी पत्नी कृष्णदेव व महेन्द्रकुमार पुत्र गंगाजल मील ने अलग दो बोलियां लगाई। जिसमें अंतिम बोली 40 लाख 50 हजार रूपऐ राजेन्द्रकुमार की थी। अपराधिक षडय़ंत्र के तहत अध्यक्ष बनवारीलाल अधिशाषी अधिकारी राकेश मेंहदीरत्ता,सहायक अभियंता व प्रतिनिधि जिला कलक्टर ने उक्त बोली को संयुक्तरूप से राजेन्द,्ररिंकलकुमार,महेन्द्रकुमार,नवलकिशोर,ओमप्रकाश व इन्द्रादेवी की मान कर दर्ज की जो कानून विरूद्ध है।

    इसी प्रकार प्लॉट नं 175 की नीलामी में बोलीदाता जगदीश पुत्र सुरजाराम,संजयकुमार पुत्र फतेहचंद,राधेश्याम पुत्र गुरादित्ता,सुरेन्द्रकुमार पुत्र रामकिशन व महेन्द्रकुमार पुत्र गंगाजल मील ने बोली दी। इसमें संजयकुमार व महेन्द्रकुमार मील को एक पक्ष व सुरेन्द्रकुमार को दूसरा पक्ष मानकर बोली लगाई गई। यह अंतिम बोली संजयकुमार की 52 लाख 50 हजार की स्वीकृत हुई।

    प्लॉट नं 174 की लीज तैयार करते समय सफल बोली दाता नवलकिशोर व भूराराम का नाम वापिस ले लिया गया और अवैध रूप से भ्रष्टाचार करके 6 व्यक्तियों की एवजी में 4 की मानकर लीज तैयार की गई। और उक्त प्लॉट नं 174 को उपविभाजित करके 20 दुकानों का साइज बताकर लीज तस्दीक करवाई। जो कानून विरूद्ध थी।

इसी प्रकार प्लॉट नं 175 को अवैध रूप से उपविभाजित कर 20 दुकानों की लीज तस्दीक करवाई। सब रजिस्ट्रार सूरतगढ़ इस भ्रष्टाचार में लिप्त रहा।

इसके बाद दोनों मूल लीज को संशोधित करवाकर 4 भागों में उप विभाजित करवाकर उन 4 हिस्सों का अग्रेतर उपविभाजन कर लीज संशोधित करवाई गई। यही प्रक्रिया प्लॉट नं 175 में अपनाई गई।

उक्त प्लॉटों के उपविभाजन से बनी दुकानों को स्वीकृति देकर आरोपी पृथ्वीराज जाखड़ ने नामांतरण खरीदारान के नाम से किया तथा राजकोष को 2 करोड़ से अधिक का नुकसान पहुंचाया।

इसमें विधायक गंगाजल मील पर भी आरोप लगाया गया है कि विधायक गंगाजल मील ने बनवारीलाल मेघवाल को अपना उम्मीदवार बताया जिसने पालिकाध्यक्ष सूरतगढ़ का चुनाव जीता। राकेश मेंहदीरत्ता जो नगरपालिका सूरतगढ़ में लेखाधिकारी पद पर कार्यरत था को विधायक गंगाजल मील और पालिकाध्यक्ष बनवारीलाल मेघवाल ने सूरतगढ़ नगरपालिका में अधिशाषी अधिकारी पद पर नियुक्त करवाया।



Monday, August 18, 2014

नाव अर जाळ उपन्यास का विमोचन समारोह:कलमकारों का संगम:


पत्रकारिता और साहित्य में नये संपर्क नए सृजन के संकेत करते चित्र:
सूरतगढ़, 17 अगस्त 2014.
राजस्थानी साहित्यकार मनोज कुमार स्वामी सूरतगढ़ ने मलयालम भाषा के साहित्यकार तकषी शिव शंकर पिल्ले के उपन्यास चैम्मीन के हिन्दी अनुवाद मछुआरे का आगे राजस्थानी में अनुवाद किया। उसी राजस्थानी अनुवाद नाव अर जाळ का विमोचन समारोह 17 अगस्त 2014 को हुआ जिसमें साहित्यकारों,पत्रकारों,राजनीतिज्ञों,समाजसेवियों,शिक्षाविदों व राजस्थानी भाषा प्रेमियों का अनूठा संगम हुआ और पत्रकारिता व साहित्य में नये संपर्क नए सृजन के संकेत सामने आए। तकषी शिव शंकर पिल्ले का उपन्यास चैम्मीन केन्द्रीय साहित्य अकादमी से पुरस्कृत है। केन्द्रीय साहित्य अकादमी ने ही उसके हिन्दी अनुवाद से आगे राजस्थानी में अनुवाद करवाया।

प्रसिद्ध पत्रकार करणीदानसिंह राजपूत की अध्यक्षता में हुए विमोचन समारोह में केन्द्रीय साहित्य अकादमी से पुरस्कृत प्रसिद्ध साहित्यकार डा.भरत ओळा मुख्य अतिथि थे। ओळा ने अपने भाषण में कि मूल लेखन से अनुवाद करना अधिक दुष्कर कार्य है। अनुवाद में भावनाओं के अनुरूप होने वाला अनुवाद ही सही माना जाता है जो कार्य मनोज स्वामी ने किया है।
मनोज कुमार स्वामी ने अनुवाद में होने वाले कार्य और परेशानियों व साथ देने वालों  का ब्यौरा दिया।
राजस्थानी अनुवाद पर श्रीमती सुमन शेखावत ने पत्र वाचन किया जिसमें एक एक बात खुलासा की गई।
पूर्व विधायक और वर्तमान में भाजपा श्री गंगानगर जिलाध्यक्ष अशोक नागपाल व गर्भस्थ शिशु संरक्षण समिति के अध्यक्ष परसराम भाटिया विशिष्ट अतिथि थे।
अध्यक्षता करते हुए करणीदानसिंह राजपूत ने बताया कि मनोज स्वामी को एक मछुआरे के रूप में जीते हुए देखा जिसके कारण यह अच्छा अनुवाद हुआ।
शिक्षाविद् महेन्द्रसिंह शेखावत ने मंच संचालन किया।
समारोह में राजस्थानी भाषा मान्यता संघर्ष समिति के अध्यक्ष रहे डा.हरिमोहन सारस्वत,व्याख्याता प्रवीण भाटिया, साहित्यकारों में गोपीराम गोदारा,नंदकिशोर सोमानी,रामेश्वर दयाल तिवाड़ी,राजेश चड्ढा सहित अनेक लोग शामिल हुए। 














Friday, August 15, 2014

स्वतंत्रता दिवस पर्व सूरतगढ़ 15 अगस्त 2014

उपखंड अधिकारी भवानीसिंह पंवार ने ध्वजारोहण किया
विशेष सेवाओं व उत्कृष्ठ कार्यों वालों को सम्मानित किया गया।
सूरतगढ़,15 अगस्त। स्वतंत्रता दिवस पर्व पर मुख्य समारोह बस स्टैंड मैदान पर हुआ जिसमें उपखंड अधिकारी भवानीसिंह पंवार ने ध्वजारोहण किया। समारोह में सांस्कृतिक कार्यक्रम में देश भक्ति के गीत संगीत से भरा रंगारंग प्रस्तुतियां हुई। विशेष सेवाओं व उत्कृष्ठ कार्यों वालों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।
समारोह में पूर्व विधायक गंगाजल मील और नगरपालिकाध्यक्ष बनवारीलाल भी उपस्थित थे।


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