Tuesday, July 15, 2014

हिन्दु देवी देवताओं में अपार शक्ति चमत्कार:बाबाओं की पूजा भेड़चाल

हिन्दु देवी देवताओं में बाबाओं से ज्यादा शक्ति है ज्यादा चमत्कार है तो फिर किसी भी हिन्दु मंदिर में हिन्दु देवी देवताओं के साथ किसी बाबा की प्रतिमा की ना तो जरूरत है और न उनकी पूजा पाठ की।
विशेष टिप्पणी- करणीदानसिंह राजपूत

अपार अतुलनीय बलशाली हनुमानजी ने बाल्यकाल में फल जान कर सूरज को मुंह में डाल लिया था। युद्ध में लक्ष्मण के मूच्र्छित होन पर उनकी मूच्र्छा दूर करने को संजीवनी बूटी के लिए पर्वत ही उखाड़ लाए। ऐसे बलशाली हनुमान के मंदिरों में किसी बाबा की प्रतिमा लगाना और पूजना कि उसकी पूजा अर्चना से बड़े बड़े लाभ मिलते हैं, या लाभ हो सकते हैं। जब आपके पास में शक्तिशाली हनुमान हैं तब उनसे किसी भी प्रकार से शक्ति में रती भर भी मुकाबला नहीं कर सकने वाले बाबाओं की पूजा आराधना की जरूरत कहां है? मेरे विचार में तो किसी भी बाबा में हनुमान जी जितनी शक्ति तो नहीं बताई गई और न किसी बाबा के चमत्कार में प्रगट हुई। जब ऐसी स्थिति है तब हनुमान मंदिर में किसी बाबा की प्रतिमा लगाना और पूजा करना और करवाना केवल भेड़चाल है। सुने सुनाए चमत्कार के पीछे भाग दौड़ करना और कुछ लोगों के कहने सुनने मात्र से किसी बाबा के पीछे लग जाना। यही तो भेड़चाल है।
जब अपार शक्तिशाली और अपार चमत्कारी आपके पास में है तो फिर मामूली शक्ति वाले के पीछे दौडऩे की जरूरत ही नहीं होनी चाहिए।
एक हनुमान तो उदाहरण मात्र है।
हिन्दु देवी देवताओं में बाबाओं से ज्यादा शक्ति है ज्यादा चमत्कार है तो फिर किसी भी हिन्दु मंदिर में हिन्दु देवी देवताओं के साथ बाबाओं की प्रतिमाओं की ना तो जरूरत है और न उनकी पूजा पाठ की। वैसे भी किसी अन्य धर्म मुस्लिम ईसाई व अन्य को मानने वाले बाबाओं की प्रतिमाओं को तो हिन्दु मंदिरों में लगाया ही नहीं जाना चाहिए। पूजा आराधना पद्धतियां अलग अलग होती है तो उनसे अवरोध तो पैदा होता ही है।
कोई किसी बाबा की पूजा पाठ आराधना करता है तो अलग से कहीं भी प्रतिमा लगा सकता है,लेकिन वह हिन्दु मंदिरों में लगाने को तत्पर क्यों रहता है?
बाबा का पूजा स्थल अलग हो और प्रतिमा अलग स्थान पर लगाई हो तो ना किसी का आपसी विवाद ना आलोचना ना कोई झगड़ा फसाद।
अगर पहले कहीं हिन्दु मंदिरों में किसी बाबा की प्रतिमा लगा दी गई है तो भी बाबा के अनुयायी भक्त दूसरे स्थान पर लगा कर विवाद की उत्पति को ही रोक सकते हैं।
पुन एक बार कहना चाहता हूं कि अपार शक्तिशाली हिन्दु देवी देवताओं को मानने वाले को किसी बाबा के फेरे में पडऩे की आवश्यकता ही नहीं है।
जहां तक बाबाओं की प्रतिमाओं की बात है और किसी भी बाबा की प्रतिमा किसी भी मंदिर में पूर्व में किसी उत्सुकता में भुलावे में लगादी हुई हो तो हटनी ही चाहिए।
इसके अलावा देव प्रतिमाओं के पास में व उनके चरणों के पास में कथा वाचकों साधु संतों की मंढी हुई तस्वीरें और कैलेंडर आदि लगा दिए जाते हैं। किसी प्रभावशाली दानदाता ने भेंट कर दी और पुजारी ने लगादी। इनसे भी ध्यान बंटता है। ऐसी हर तस्वीर को भी हटा दिया जाना चाहिए।
नोट- किसी बाबा विशेष से जोड़ कर देखने की जरूरत नहीं कोई भी बाबा हो उसकी प्रतिमा मंदिर में लगनी ही नहीं चाहिए।

Sunday, July 6, 2014

पत्रकारों को पालिका भूमि पर अवैध प्लाटों की जांच शुरू: शिकायत कृष्ण सोनी आजाद पत्रकार ने की थी।


सूरतगढ। राष्ट्रीय उच्च मार्ग के पास सनसिटी रिसोर्ट के पीछे खाली पड़े विशाल भूखंड की मील के विधायक काल में कांग्रेस के बड़े लोगों ने नगरपालिका जमीन की बंदरबांट की। इसमें निजी कहे जाने वाले जी हजूरी करने वाले सात पत्रकारों को भी गैर कानूनी रूप से प्लाट दिए गए। इन प्लाटों की नींव भर कर छोड़ा हुआ है। चर्चा यह होती रही है कि मील साहेब ने पत्रकारों को यह कॉलोनी दी। इन पत्रकारों व अन्य लोगों के अतिक्रमणों की जांच एक साथ ही चल रही है। इसमें मील व वली के लोगों के बेनामी कब्जों को आरोप हैं।  
पिछले सत्ताधरी के एक कम्प्यूटर में पत्रकारों के नाम की सूची थी लेकिन अब कोई पत्रकार सामने आना नहीं चाहता।
वसुंधरा राजे के सरकार आपके द्वार के दौरे में अचानक इस भूखंड व उस पर अतिक्रमण हुए सभी प्लाटों की जांच शुरू हुई। उप निदेशक स्वायत शासन बीकानेर हजारीलाल ने मौका देखा व संबंधित रिकार्ड भी प्राप्त किया। इस स्थान की विडियोग्राफी भी कराई जाने की सूचना है।
हजारीलाल के मौका देखे जाने के बाद यह खबर बड़े दैनिकों व अन्य अखबारों में नहीं छपी। ब्लास्ट की आवाज में छपी तब  खलबली मची जो अभी तक चल रही है। खबर छपने से पत्रकार ही तैस में आए लेकिन किसी ने भी शिकायत कर जांच कराने वाले के बारे में मालूम करने की कोशिश नहीं की। शिकायत क्यों की गई?
यह महत्वपूर्ण शिकायत कृष्ण सोनी आजाद पत्रकार,संपादक सीमा की ललकार निवासी सूरतगढ़ ने की और उन्होंने स्वीकारा है कि इस जांंंच के पूरी होते ही अतिक्रमण हटा दिए जाऐंगे। इस प्रकार के संकेत जांच के तरीके से लग रहे हैं।
सोनी ने उस समय के विधायक व पत्रकारों की शिकायत आखिर क्यों की?
सोनी ने बताया कि नगरपालिका सूरतगढ़ में अधिशाषी अधिकारी पृथ्वीराज जाखड़ आया जो मील का खास था और उसके होते ये अतिक्रमण कराए गए। पृथ्वीराज की किसी सूचना पर कृष्ण सोनी से टकराव हुआ। पृथ्वीराज ने कृष्ण सोनी को जेल में पहुंचाने के लिए एक मुकद्दमा दायर किया। उसमें पार्षद राजाराम गोदारा का बेटा महेन्द्र गोदारा गवाह बना। यह सारा प्रकरण कृष्ण सोनी आजाद को सीधा करने के लिए किया गया जिसमें पत्रकारों की शह रहने का आरोप भी है। पत्रकारों ने कृष्ण सोनी को रत्ती भर साथ नहीं दिया। कृष्ण सोनी अकेला लड़ता रहा और उसने यह  शिकायत पृथ्वीराज व उसके काल में कराए गए कब्जों की। कृष्ण सोनी ने इसके बारे में ताजा बयान भी बीकानेर में दर्ज करवा दिया है। एक प्रकार से अब यह शिकायत कृष्ण सोनी की नहीं रही अब राज्य सरकार का दखल हो गया है। अब राज्य सरकार कार्यवाही करने में जुटी है। संकेत ये आ रहे हैं कि जल्दी ही जांच पूरी होने के बाद वहां के सभी अतिक्रमणों को साफ कर दिया जाएगा।


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