Friday, February 28, 2014

राजस्थान में आपातकाल के बंदियों की पेंशन अब शुरू हो जाएगी:



 आपातकाल के मीसी व रासुका बंदियों को पेंशन जनवरी 2014 से मिलेगी
30 अप्रेल तक आवेदन करना होगा
सूरतगढ़, 28 फरवरी।
राजस्थान में भारतीय जनता पार्टी की वसुंधरा राजे सरकार ने अपनी घोषणा के अनुसार आपातकाल के बंदियों को पेंशन देने की घोषणा कर दी है। पेंशन जनवरी 2014 से दी जाएगी। यह पेंशन 12 हजार रूपए मासिक होगी व इसके साथ में 12 सौ रूपए प्रतिमाह चिकित्सा भत्ता भी दिया जाएगा। यदि बंदी पुरूष रहा है तो उसके बाद में पत्नी को मिलेगी। यदि स्त्री है तो उसके बाद उसके पति को मिलेगी।
राजस्थान सरकार ने इस पेंशन को लागू करने के लिए 2008 में जो नियम बनाए थे उसी में संशोधन कर इसे लागू करने की अधि सूचना जारी हुई है।
अभी इसके लिए कोई नया आवेदन फार्म नहीं दिया गया है।
इसका राजपत्र प्रकाशन इंटरनेट पर सरकारी साइट पर नजर नहीं आया।

इसमें शांति भंग में बंदी बनाए गए राजनैतिक सामाजिक कार्यकर्ताओं को शामिल नहीं किया गया है।
लोकतांत्रिक मंच पिछले सालों से लगातार यह मांग करता रहा है कि यह पेंशन आपातकाल में शांति भंग नियमों में बंदी बनाए गए लोगों को भी मिलनी चाहिए। इसके लिए अदालत में रिट भी की हुई है। लोकतांत्रिक मंच के अशोक मलेठी मो.94138 29952 ने बताया है कि रिट को   कायम रखा जाएगा व अदालत में न्याय मांगा जाएगा।
श्रीगंगानगर जिले में तो शांति भंग में बंदी बनाए गए लोगों को राजनैतिक दर्जा भी दिया गया था,लेकिन उनको भी पेंशन में शामिल नहीं किया गया है।
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आपातकाल- शांतिभंग में जेलों में बंदियों को भी मिलेगी पेंशन 
 
मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे से आपातकाल में शांति भंग करने के आरोप में जेलों में बंद रहे कार्यकर्ता मिले
 

मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि पेंशन वास्ते जो कोई बिंदु छूट गया है उस पर विचार कर लिया जाएगा
 

खास रपट- करणीदानसिंह राजपूत
सूरतगढ़, x फरवरी w®vy. इंदिरागांधी द्वारा v~|z में आपातकाल लागू कर अनेक लोगों को जेलों में बंद कर दिया गया था। उनमें मीसा और रासुका बंदियों को पेंशन देने की घोषणा कर दी गई थी।
आपातकाल में शांतिभंग कानून के तहत भी हजारों लोगों को जेलों में बंद कर दिया गया था। उनके परिवार भी परेशान हुए व व्यवसाय आदि
बरबाद हो गए थे। अब शांतिभंग के तहत बंदी रहे लोगों को भी पेंशन सुविधा प्रदान की जाने का
बिंदु भी शामिल कर लिया जाएगा।
शांतिभंग में बंदी बनाए लोग यह पिछले सालों से कर रहे थे।
मुख्यमंत्री की जनसुनवाई में आज कई कार्यकर्ता मिले और इस मांग से अवगत कराया।

मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया है कि जो बिंदु छूट गया है उस पर विचार कर शामिल कर लिया जाएगा।

इस आश्वासन पर प्रतिनिधि मंडल के लोग पूरे आश्वस्त हो गए हैं।
पूर्व विधायक गुरूशरण छाबड़ा ने दोपहर को यह सूचना मुझे दी और उसके बाद ईटीवी पर भी यह समाचार रिलीज हुआ है।
राजस्थान के हजारों परिवारों को इससे लाभ मिल सकेगा।
सूरतगढ़ से शांति भंग में vw कार्यकर्ता बंदी बनाए गए।
पत्रकार करणीदानसिंह राजपूत को श्रीगंगानगर में wz जुलाई को पकड़ा गया।  गुरूशरण छाबड़ा पूर्व विधायक जो अब जयपुर में रहते हैं व पत्रकार मुरलीधर उपाध्याय पूर्व पार्षद जो अब आफसेट प्रेस व्यवसाय में हैं,ने सूरतगढ़ में गिरफ्तारी दी जिनको श्रीगंगानगर जेल में भेज दिया गया था। वकील स.हरचंदसिंह सिद्धु पूर्व विधायक, स.गुरनामसिंह लाइनपार रहते हैं,स्व.कुशालचंद चिलाना,स्व.श्यामलाल चिलाना,इनका भाई भगवानदास चिलाना जो अब घड़साना में व्यवसाय करते हैं। स्व. हरिराम चीनिया,मांगीलाल जैन जो अब घड़साना में हैं। स्व. भगवानदास धाणका,सोहनसिंह सोढ़ा जो आजकल बीकानेर में रहते हैं।
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इंदिरा गांधी ने अपने शासन की विफलता में सन v~|z में आपातकाल लगा कर जो जुल्म ढ़हाए वे आज के y®-z® वर्ष के लोगों को मालूम नहीं हैं। बिना किसी कारण के राजनैतिक लोगों को डीआइआर और मीसा में तथा शांति भंग में जेलों में ठूंस दिया गसा था। जबरन नसबंदियां कही गई जिनमें नव विवाहितों बुड्ढों व कुंवारों को भी पकड़ कर नसें काट दी गई थी व प्रपत्र पुलिस की मौजूदगी में झूठे भरवा लिए गए थे। अखबारों पर सेंसर लगा दिया गया था। इतना भय पैदा कर दिया गया था कि बंदी लोग बाहर आए व तारीखों पर आए तब लोग नमस्कार करने और मिलने तक से कतराते थे। व्यवसाय बरबाद हो गए थे।
सूरतगढ़ में आपातकाल के विरोध में आमसभा की जाने के बाद नेता और कार्यकर्ता भूमिगत हो गए थे। बाद में पकड़े गए व नारे प्रदर्शन के साथ गिरफ्तारियां दी। सच्च में जांबाज और जोशीले लोगों ने यह कार्य किया था।
सूरतगढ़ से डीआईआर यानि कि राष्ट्रीय सुरक्षा कानून में vv कार्यकर्ता बंदी बनाए गए थे। इस कानून में एक वर्ष तक तो न्यायालय में चुनौती ही नहीं दी जा सकती थी।
एक दल में  { जने गोपसिंह सूर्यवंशी पूर्व पार्षद निवासी लाइनपार वार्ड नं v~ सूरतगढ़, सुगनपुरी जो अब अध्यापक है,महावीर प्रसाद तिवाड़ी जो फार्म में सर्विस में है, नेमीचंद छींपा पूर्व पार्षद हैं,मदनलाल मेघवाल जो अब जैतसर में रहते हैं,चम्पालाल जो आजकल हैदराबाद में रेस्टोरेंट चलाते हैं। इन्होंने vz  दिसम्बर v~|z  को गिरफ्तारी दी थी।
दूसरे दल में पांच जने बलराम वर्मा कांगे्रस नेता,हनुमान प्रसाद मोट्यार जो आजकल ग्राम सचिव हैं,लक्ष्मण शर्मा माकपा नेता हैं,रामकुमार पारीक जो आजकल ग्राम कीकरवाली रायसिंहनगर में रहते हैं। मेघसिंह यहां दुग्ध बेचते थे और अब भीलवाड़ा में अन्य व्यवसाय कर रहे हैं।

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आपातकाल के बंदियों को पेंशन वसुंधरा राज मंत्रीमंडल का निर्णय
भाजपा की सरकार के मंत्रीमंडल में x जनवरी w®vy को निर्णय हुआ।
 
हजारों परिवारों को लाभ मिलेगा-वसुंधरा के पिछले राज में पेंशन देने का कानून बनाया गया था। अशोक गहलोत सरकार ने इसे रोक दिया था। अब भाजपा का राज आने के बाद इसे लागू कर दिया। भाजपा के चुनाव घोषणा पत्र में भी यह घोषित था।

पूर्व विधायक गुरूशरण छाबड़ा ने मोबाइल फोन पर यह सूचना दी। इसके बाद लोकतांत्रिक मंच से भी बात हुई। इतने में ही टीवी पर न्यूज भी आनी शुरू हो गई।

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मीसा एवं डीआइआर बंदियों की पेंशन अब शुरू हो जाएगी:
 

वसुंधरा राजे ने पिछले कार्यकाल में कानून बनाया मगर राज बदल गया तथा अशोक गहलोत सरकार ने शुरू होने पर रोक लगा दी थी 
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तीसरे स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों व परिवारों को मिलेगा लाभ
सूरतगढ़ से 16 लोगों ने इंदिरा गांधी के आपातकाल को चुनौती देते हुए गिरफ्तारी दी थी
आपातकाल में शांतिभंग में कई लोगों को गिरफ्तार किया गया था
 

-------विशेष लेख- करणीदानसिंह राजपूत:आपातकाल में शांतिभंग में बंदी बना गए थे---------


इंदिरागांधी ने अपने प्रधानमंत्रीत्व काल के कुशासन में जनता को कुचलने के लिए सन 1975 में आपातकाल की घोषणा कर भयानक क्रुरताएं की थी जिसका पूरे देश में विरोध हुआ था। 
सूरतगढ़ देश का पहला एकमात्र शहर था जिसमें आपातकाल लगाते ही  विरोध में आमसभा हुई थी।
आपातकाल के विरोध में कई लोगों ने गिरफ्तारियां दी व कई लोगों को शांतिभंग के आरोप में गिरफ्तार कर जेलों में ठूंस दिया गया था।
श्रीमती वसुंधरा राजे ने अपने पिछले मुख्यमंत्रीत्व काल में राजस्थान मीसा एवं डीआइआर बंदियों की पेंशन नियम 2008 बनाया था जो राजस्थान के राजपत्र के विशोषांक में दिनांक 17 सितम्बर 2008 को प्रकाशित हुआ था। इस नियम के तहत प्रति माह 6000 रूपए पेंशन व 600 रूपए मेडिकल भत्ता मिलना था। संभव है कि वसुंधरा राजे प्रपत्र भरे जाने के समय से इसे लागू करदे और अब महंगाई आदि को ध्यान में रखते हुए राशि में वृद्धि भी करदे। इसके अलावा जो लोग शांति भंग में जेलों में ठूंसे गए उनको भी पेंशन लागू करदे।
इस कानून के तहत प्रभावित लोगों ने अपने प्रपत्र राज्य सरकार के लिए जिला कलक्टर को सौंपे। उन पर पेंशन देने की प्रक्रिया शुरू होने ही वाली थी कि राज बदल गया। राजस्थान में अशोक गहलोत की कांग्रेस सरकार को सत्ता मिलने के बाद इस पर रोक लगा दी गई। इसे लागू ही नहीं किया गया। कांग्रेस ने कहा कि आपातकाल के बंदियों को स्वतंत्रता सेनानियों के बराबर का दर्जा नहीं दिया जा सकता।
    इसके बाद राजस्थान में लोकतंत्र रक्षा मंच का गठन किया गया और उसके तहत संघर्ष शुरू किया गया व कई बार सम्मेलन आयोजित किए गए। इस मंच के वर्तमान में अध्यक्ष नंदलाल नागर हैं।
पूर्व अध्यक्ष कौशल किशोर जैन की ओर से राजस्थान उच्च न्यायालय की जयपुर बैंच में एक याचिका केस नं 7176-2010 प्रस्तुत की गई जिसके पैरवीकार प्रसिद्ध वकील भरत व्यास हैं जिसकी जनवरी 2014 में तारीख है।
    वर्तमान में मंच के संरक्षक फरीदुल्लाह कोटा मो.9214528581 और कोटा संभाग संयोजक अशोक मलेठी मो.94138 29952 से व्यापक जानकारी ली जा सकती है।
सम्पूर्ण प्रदेश में इसके लिए संभाग संयोजक बनाए हुए हैं।
फरीदुल्लाह व अशोक मलेठी ने इस लेखक से अनेक बार बात की है और बताया है कि मंच की यह मांग है कि शांतिभंग के आरोप में बंदी बना गए लोगों को भी पीड़ा और आर्थिक हानि उठानी पड़ी व परिवार पीडि़त हुए थे इसलिए उनको भी पेंशन शुरू की जाए।
अशोक मलेठी से मोबाइल वार्ता में ताजा जानकारी दिनांक 15 दिसम्बर 2013 को मिली है।
उन्होंने बताया कि आपातकाल की पेंशन 4 राज्यों में प्राप्त हो रही है। यूपी में 3 हजार रू, बिहार में 5 हजार रू,मध्यप्रदेश में 15 हजार रू तथा छत्तीसगढ़ में 15 हजार रू. प्रतिमाह है। मंच की मांग यह है कि सभी राज्यों में एकरूपता करते हुए प्रतिव्यक्ति यह राशि 15 हजार रूपए की जाए।
 

-- लेखक राजस्थान सरकार के जन संपर्क विभाग द्वारा अधिस्वीकृत स्वतंत्र पत्रकार हैं। सूरतगढ़। मोबा.9414381356
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Sunday, February 23, 2014

पानी संघर्ष:मरूप्रदेश बनादो-हरचंदसिंह ने पीएम को लिखा 4 साल पहले

मरूप्रदेश बनाओ:छोटे राज्यों के हक में भाजपा:तेलांगना बनाया है:




रिपोर्ट: करणीदानसिंह राजपूत:   सूरतगढ़  19 जनवरी 2013.

उतरी पश्चिमी राजस्थान की उपेक्षा का आरोप:सिंचाई पानी को तरसते रहे

कृषि जगत में पहचान दिलाने वाले सिखों को लगातार धत्ता:यह राजनीति कभी भयानक लपटें बन जाऐंगी

राजस्व मंडल और उच्च न्यायालय की बैंचे बीकानेर में क्यों नहीं बनाई गई?

पूर्व विधायक हरचंदसिंह सिद्धु ने 4 साल पहले 16-12-2009 को यह कड़ा पत्र प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह को लिखा था


राजस्थान के उतरी पश्चिमी क्षेत्र की निरंतर उपेक्षा के कारण इस इलाके के लोगों का विकास नहीं हो रहा है तथा मरू प्रदेश की मांग एक बार पुन: उठ खड़ी हुई है। पानी के मामले में किसान मजदूर व्यापारी आंदोलन निरंतर चल रहा है। ऐसे मौके पर लोगों के सामने पूर्व विधायक हरचंदसिंह सिद्धु का प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह को लिखा पत्र सामने रखना उचित है, ताकि लोग सोच सकें कि उनके विकास को किस तरह से अवरूद्ध करके रख दिया गया है। सिद्धु कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं व 2 बार विधायक रह चुके हैं,इसलिए उनके पत्र में  लिखे बिंदुओं का तथ्यों का बड़ा महत्व है। सिद्ध के पत्र का महत्व इसलिए भी है कि राजस्थान विकास का मतलब केवल जयपुर क्षेत्र होकर रह गया है और उतरी पश्चिम राजस्थान धूल में मिल रहा है।


माननीय प्रधानमंत्री महोदय,

राजस्थान राज्य का विभाजन करके मरू प्रदेश का गठन करने के संबंध में।

    राजस्थान क्षेत्रफल की दृष्टि से भारतवर्ष का सबसे बड़ा प्रांत है। पश्चिम भू भाग रेगिस्तानी,दक्षिणी भाग पहाड़ी,पूर्वी उतरी भाग मैदानी है। रहन सहन,भाषाएं, रीति रिवाज भिन्न भिन्न हैं। हर भाग की समस्याएं भी भिन्न भिन्न है, लेकिन उनका समाधान एक ही तरह के निर्णय से संभव नहीं हो सकता। प्रशासनिक विसंगतियां बनी हुई है।

राजस्थान प्रदेश का गठन 30 मार्च 1948 को हुआ। राजधानी जयपुर,उच्च न्यायालय जोधपुर,राजस्व मंडल अजमेर को दिया गया।

उसके बाद राजस्थान का नेतृत्व मोहनलाल सुखाडिय़ा के हाथों में रहा। उस कारण एकांकी विकास उदयपुर संभाग का हुआ और पश्चिम उतरी भाग नजरोन्दाज किया गया।

बीकानेर राज्य की जीवन दायिनी गंगनहर का निर्माण तमाम भूमि खरीद कर किया गया था। नहर निर्माण के लिए पंजाब के गिदड़बाहा में बीकानेर राज्य की 2 कॉलोनियों का निर्माण हुआ जहां से निर्माण का संचालन हुआ। उनके लिए ईंट भ_े लगाए गए। फरीदकोट में स्टाफ के लिए नहर के संचालन वास्त विश्रामगृह बनाया गया। पंजाब में इस प्रकार की बीकानेर की जो अब राजस्थान की संपत्तियां हैं,उन पर पंजाब सरकार ने अनाधिकृत कब्जा जमाया हुआ है। गंगनहर संरक्षित नहर थी,मगर पंजाब ने उसमें से 90-90 क्यूसेक की दो नहरें अनाधिकृत निकाल ली। यह श्रीगंगानगर जिले के अधिकार का हनन किया गया,मगर राज्य सरकार ने इसका किसी भी स्तर पर विरोध नहीं किया। यह इसलिए हुआ कि राजस्थान की राजनैतिक हस्तियों ने बीकानेर एवं पश्चिम राजस्थान के भाग की अनदेखी की।आज श्रीगंगानगर जिला,हनुमानगढ़ जिला बीकानेर जेसलमेर के रेगिस्तान में परिवर्तित हो रहा है। भाखड़ा नहर के साथ भी यही हुआ। इस क्षेत्र में भूजल खारा है,जिसका उपयोग सिंचाई में नहीं हो सकता।


एशिया की सबसे बड़ी इंदिरागांधी नहर परियोजना में 60 प्रतिशत राशि राजस्थान की लगी हुई है, उसमें इतने प्रतिशत हिस्सा राजस्थान का होना चाहिए था। परन्तु राज्य सरकार की कमजोर और भेदभावी नीति के कारण पश्चिम भू भाग के हितों की अनेक समझौतों में बलि चढ़ा दी। यही कारण है कि उतरी पश्चिमी भाग पानी के लिए आंदोलित रहता है। राज्य सरकार इस मांग के प्रति उदासीन बनी रहती हैं,इसी कारण पंजाब व हरियाणा ने इसमें से 52 मोघे अवैध निकाल लिए और उनसे लाभ ले रहे हैं। राजस्थान के उतरी पश्चिमी भाग के अधिकारों का हनन हुआ। लेकिन राज्य सरकार को इसकी परवाह ही नहीं है।

यह क्षेत्र स्थाई रूप से अकालग्रस्त क्षेत्र बन गया है। इसी उदासीनता के कारण यहां औ्रद्योगिक विकास नहीं हुआ, जैसा पूर्वी क्षेत्र में कोटा और अलवर में हुआ है। राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के कारण लोगों का जीवनयापन हो रहा है। शिक्षा के क्षेत्र में भी यह इलाका पिछड़ा हुआ है।


प्रशासनिक भेदभाव के कारण जब राजस्थान के 25 जिलों का पुन:गठन हुआ तब दौसा,करौली,राजसमंद,प्रतापगढ़ का गठन हुआ तब हनुमानगढ़ को भी जिला बनाया गया। परंतु तथ्यों को नजरोन्दाज किया गया। बीकानेर राज्य में सूरतगढ़ महत्वपूर्ण जिला था। गंगनहर के आने के बाद सूरतगढ़ को जिला तोड़ कर उपखंड बना दिया गया। महाजन के लोगों को तहसील स्तरीय सुविधा के लिए काफी दूर जाना पड़ता है।

    राज्य सरकार की नीति के कारण उच्च न्यायालय की बैंच व राजस्व मंडल अजमेर की बैंच बीकानेर में नहीं खोली गई। श्रीगंगानगर के लोगों को काफी फासला तय करना पड़ता है। इसलिए अब समय आ गया है कि राजस्थान राज्य का विभाजन करके मरूप्रदेश का गठन किया जाए।

    राजस्थान में पनप रही जातिवादी राजनीति राजस्थान को तबाह कर देगी। इसमें बड़ी जातियां लाभ उठा रही हैं। छोटी जातियों का पतन हो रहा है। इससे असंतोष बढ़ रहा है, जो कभी भयंकर लपटों का रूप ले लगा। बीकानेर संभाग को कृषि जगत में पहचान दिलाने वाली सिख जाति अपने आपको हर सतर पर उपेक्षित महसूस कर रही है। आक्रोश फैल रहा है। सत्ता में भागीदारी के नाम पर सिख जाति को हमेशा धत्ता बताया गया है। यह अच्छे संकेत नहीं हैं। मैं सिख होने के कारण विरोध नहीं कर रहा हूं,यह मानवता के कारण लिख रहा हूं।

    इसलिए निष्पक्ष भाव से राज्य पुन: गठन आयोग का गठन करके संभावित राज्यों की विवेचना की जाए और निर्माण करवाया जाए।

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मरूप्रदेश बनाओ:छोटे राज्यों के हक में भाजपा:तेलांगना बनाया है:
तर्क- करणीदानसिंह राजपूत

तेलंगाना राज्य के बनाए जाने में कांग्रेस व भाजपा की प्रभावी भमिका रही है। तेलंगाना के बनाने पर भाजपा की नेता श्रीमती सुषमा स्वराज ने कहा कि भाजपा सदा से ही छोटे राज्यों के पक्ष में रही है। भाजपा छोटे राज्यों की पक्षधर है तो बिना कोई नाटक किए उसे राजस्थान को भी दो हिस्सों में बांट कर नए राज्य मरूप्रदेश का निर्माण करना चाहिए।
मरूप्रदेश निर्माण के लिए मजबूत आधार एवं तर्क है।
पाकिस्तान की सीमा से सटे हुए भू भाग वाले जिलों के साथ सदा भेदभाव होता रहा और आजादी के इतने सालों बाद भी उनको विकास के लिए प्रयाप्त संसाधन व आर्थिक श्रोत उपलब्ध नहीं कराए गए तथा जो इस क्षेत्र में संसाधन विकसित हो सकते थे, उन पर भी ध्यान नहीं दिया गया व कोई बोला तो उसे ठुकराया जाता रहा।
सिंचाई पानी,शिक्षा,चिकित्सा,राजस्व व न्यायिक क्षेत्र में इस क्षेत्र से दूजे नम्बर पर रखते हुए बर्ताव किया गया।
सिंचाई पानी के लिए इस क्षेत्र के किसान सदा से जूझते रहे हैं। पानी पाकिस्तान जा सकता है लेकिन उसे रोकने के लिए राजस्थान कोई कार्यवाही करते हुए पंजाब पर दबाव नहीं डालता। पाकिस्तान को जो पानी जा रहा है वह राजस्थान को मिल सकता हे। उसको रोकने के लिए जो भी निर्माण करने है,वे पंजाब को करने हैं। इसके अलावा भाखड़ा व्यास सिंचाई प्रबंधन में राजस्थान का प्रतिनिधित्व वर्षों से नहीं है। राजस्थान सरकार को इसकी परवाह नहीं है। असल में राजस्थान सरकार जयपुरिया सरकार होकर रह गई है। खहे वह भाजपा की हो चाहे कांग्रेस की रही हो।

शिक्षा के लिए पिछड़ापन ही रहा है। अभी भी तकनीकी व चिकित्सकीय शिक्षा में बहुत पिछड़े हुए हैं। कृषि विश्वविद्यालय श्रीगंगानगर में स्थापित किए जाने की मांगे एक सपना बन कर रह गई।
न्यायिक क्षेत्र में राजस्थान उच्च न्यायालय जोधपुर में ज्यादा मुकद्दमें बीकानेर श्रीगंगानगर के होते हुए भी बीकानेर में उसकी बैंच स्थपित नहीं की गई। लेकिन वह जयपुर में कर दी गई। इस इलाके के लोगों को न्याय के लिए दूरी और अधिक खर्च का बोझ कायम ही रहा।

राजस्व मंडल अजमेर की एक शाखा जयपुर में स्थापित करदी गई बीकानेर में इसकी स्थाना को लेकर मांगों पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। जबकि मामले बीकानेर व श्रीगंगानगर हनुमानगढ़ जिलों के अधिक हैं।
आवागमन के साधन भी विकसित नहीं किए गए। रेल पटरियां नहीं बिछाई गई। कारण एक ही है कि नेतृत्व जयपुरिया बन कर रह जाता है।
इसलिए मरूप्रदेश बनाया जाना चाहिए ताकि इस भू भाग को विकास का मजबूत आधार मिल सके।
कुछ सालों से मरू प्रदेश की मांग भी हो रही है। उस मांग को अब प्रभावी ढंग से हर क्षेत्र में उठाने की जरूरत है।
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Sunday, February 16, 2014

वकील पूर्व विधायक हरचंदसिंह सिद्धु की जान को खतरा:लायसेंस निरस्ती के बाद से हथियार सूरतगढ़ थाने में जमा है

वकील पूर्व विधायक हरचंदसिंह सिद्धु की जान को खतरा:
लायसेंस निरस्ती के बाद से हथियार सूरतगढ़ थाने में जमा है
श्रीगंगानगर में एक वकील पर हमला हो चुका है-
वकीलों को मुकद्दमें लडऩे व बाहर आने जाने के समय हर वक्त सुरक्षा जरूरी-
सिद्धु ने जिला कलक्टर को लिखा हुआ है कि जान को खतरा है व तुम्हारी जिम्मेदारी होगी

खास रिपोर्ट- करणीदानसिंह राजपूत

सूरतगढ़। वरिष्ठ वकील पूर्व विधायक सरदार हरचंदसिंह सिद्धु का लायसेंस जिला कलक्टर श्रीगंगानगर द्वारा निरस्त करने के बाद से हथियार सूरतगढ़ सिटी पुलिस थाने में जमा है तथा हर समय जान पर खतरा मंडराता रहता है।
श्रीगंगानगर में कुछ दिन पूर्व अदालत में ही एक व्यक्ति ने हमला कर दिया था। उसके बाद से यह चिंता बहुत बढ़ गई है कि वकीलों की सुरक्षा का प्रयाप्त प्रबंध हो। श्रीगंगानगर में वकीलों की तरफ से यह मांग भी उठी थी। स.हरचंदसिंह सिद्धु सूरतगढ़ न्यायिक बार संघ के वरिष्ठतम सदस्य हैं और उनको अनेक प्रकार के प्रकरणों पर बाहर की अदालतों में जाना आना पड़ता है। सिद्धु राजनैहितक व्यक्ति भी हैं तथा 4 बार विधानसभा का चुनाव लड़ चुके हैं व 2 बार विधायक रह चुके हैं।
सिद्धु ने अपनी आत्मरक्षा के लिए 32 बोर रिवाल्वर ले रखा था और उसका लायसेंस 2014 तक नवीनीकृत होते हुए भी जिला कलक्टर ने चुनाव से पहले लायसेंस दिनांक 25-10-2013 को निरस्त कर दिया व 12-11-2013 को कोई विरोध हो तो पेश होने की तारीख दी। सिद्धु ने आदेश की अनुपालना में थाने में तत्काल ही हथियार जमा करवाया व  31-10-2013 को जिला कलक्टर को पत्र दिया। सिद्धु ने उस पत्र में साफ साफ लिखा कि उसका लायसेंस दुर्भावना से निरस्त किया गया है व कोई षडय़ंत्र है। शस्त्र दुरूपयोग का कोई प्रकरण नहीं है।
इसी पत्र में सिद्धु ने लिखा था कि वे सक्रिय राजनैतिक कार्यकर्ता हैं व नेताओं व अधिकारियों के विरूद्ध संघर्षरत हैं तथा लगातार जान की धमकियां मिल रही हैं जिनकी लिखित शिकायतें लगातार राज्य सरकार को की जाती रही हैं।
सिद्धु ने जिला कलकटर को चेतावनी भी दी कि कोई जानी नुकसान हो गया तो आपकी व्यक्तिगत जिम्मेदारी होगी।
इस पत्र के बाद जिला कलक्टर ने स्थानीय समिति को रिपोर्ट के लिए लिखा और वह रिपोर्ट यहां से चली गई।
इसके बाद लायसेंस को अविलम्ब बहाल कर दिया जाना था लेकिन ऐसा नहीं हुआ है।
श्रीगंगानगर में वकील पर हमले के बाद से यह मामला बहुत गंभीर हो गया है।
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Saturday, February 15, 2014

सूरतगढ़ में रेलवे ओवर ब्रिज फाटक एलसी-95 का नक्शा व कमेंट्स

रेलवे ओवर ब्रिज से मंडराएगा हर समय मौत का खतरा-
अब चल रहे निर्माण की एकदम ताजा रिपोर्ट 
15 फरवरी 2014.



 समाजवादी चिंतक दिलात्मप्रकाश जैन ने छह सितम्बर 2012 को आरोप लगाया था
भू माफिया और अवैध कॉलोनी के भूखंड आदि को बचाने के लिए बदलाव किया गया
सही स्थान पर बनाने के लिए नए सिरे से प्रयास करने का आह्वान किया था
दिलात्मप्रकाश जैन ने सूचना के अधिकार के तहत इरकॉन से इसका नक्शा प्राप्त किया
खबर: करणीदानसिंह राजपूत
सूरतगढ़,4 अक्टूबर 2012. समाजवादी चिंतक दिलात्म प्रकाश जैन ने रेलवे फाटक एलसी-95 पर प्रस्तावित ओवर ब्रिज के स्थान को बदलने पर छह सितम्बर को गंभीर आरोप लगाए थे। जैन ने नए नक्शे को सूचना के अधिकार कानून के तहत मांगा जो इरकॉन ने 26 सितम्बर को प्रेषित किया था। इस नक्शे की फोटो प्रति यहां दी जा रही है ताकि आम लोगों को पुल का स्थान मालूम हो सके। पुल बडोपल रोड पर से उतरेगा चढ़ेगा और बाईपास पर इंडेन गैस एजेंसी कार्यालय के आगे चढ़ेगा उतरेगा। इससे सेठ राम दयाल राठी राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय का खेल मैदान प्रभावित होगा, मतलब खत्म सा हो जाएगा। असल में मास्टरप्लान में ओवरब्रिज का स्थान राजकीय पशु चिकित्सालय के पास में बनाया जाना निर्धारित किया गया था। लेकिन मास्टर प्लान से हट कर पुल पहले बाजार में महाराजा होटल के पास से चढऩा उतरना प्रस्तावित किया गया और बाद में उसमें भी बदलाव कर दिया गया। अब जो स्थान निर्धारित किया गया है उसका नक्शा यहां दिया गया है।





दिलात्मप्रकाश जैन
दिलात्मप्रकाश जैन ने सात सितम्बर को जो समाचार विचार दिया था उसको यहां दुबारा दिया जा रहा है।
 सूरतगढ़, 6 सितबर.2012.सूरतगढ़ उपखंड विकास समिति के संयोजक दिलात्मप्रकाश जैन ने प्रशासन की ओर से ओवर ब्रिज-रेलवे फाटक सी- 95-के बार बार बदलाव और कानूनी प्रक्रियाओं की पूर्ति के बिना बनाय जा रहे पुल बाबत एकदम साफ आरोप लगाया है कि इरकोन कम्पनी की ओर से बनाया जा रहा ओवरब्रिज गलत है। इससे कोई भी व्यक्ति अथवा संस्था अदालत में जा सकते हैं जिससे रोक लग जाने पर बीच में अटक जाएगा।
    दिलात्मप्रकाश जैन ने 6 सितम्बर को जिला कलक्टर श्रीगंगानगर और नगरपालिका अध्यक्ष सूरतगढ़ व इरकोन के प्रबंधक को एक पत्र लिखा है जिसमें पुल के गलत बनाने का उल्लेख किया गया है। पत्र में लिखा गया है।
    सूचना के अधिकार के तहत नगरपालिका ने साइट प्लान,नक्शा,तखमीना बाबत कोई जानकारी नहीं दी है। इरकोन कं. ने नक्शा तखमीना साइट प्लान नहीं दिया है। सिर्फ सोइल भूमि रिपोर्ट की नकल ही दी है। मंडल रेल प्रबंधक बीकानेर ने साइट प्लान व नक्शा दिया है तथा अन्य जानकारियां इरकोन से लेने का कहा है।
रेलवे से उपलब्ध नक्शे के अनुसार मौके पर इरकोन ने अलाइन्मेंट नहीं दिया है। स्थान में तबदीली की गई है। नक्शे के अनुसार पुल बडोपल रोड से रेलवे डिग्गी गंदे पानी के गड्ढे के ऊपर से होकर, खेल मैदान के पास से होता हुआ ,गंदे पानी के नाले के पास से होटल आशियाना की तरफ जाना था। गंदे पानी का नाला नक्शे में दिखलाया नहीं गया है।
अब फिर इस अलाइन्मेंट को बदलकर अवैध कॉलोनी को बचाने वास्ते भ्रष्टाचार का खेल खेला जा रहा है। अब इस पुल को इंडेन गैस एजेंसी कार्यालय के पीछे पुल को मोड़ देकर बनाया जाएगा। सरकार इसके लिए 10 फुट की सडक़ कॉलोनी में बनाकर देगी। इस स्थान पर पार्क की दीवार व अन्य स्थानों को हटाना पड़ेगा। इसके लिए भूमि अधिग्रहण की कार्यवाही नगरपालिका को नए सिरे से करनी पड़ेगी।
    सोइल टेस्ट इाकोन ने पहले कराना दिखा दिया है तो दुबारा क्यों कराया जा रहा है। समिति ने आशंका प्रगट की है कि ऐसा लगता है कि पहले वाली रिपोर्ट सही नहीं है। पुल के स्थान परिवर्तन के कारण दुबारा सोइल जांच की कार्यवाही की जा रही है।
    भू माफिया, बिल्डर्स, बेनामी संपति के मालिकों के कारण पहले ही स्थान बदला गया था तथा अब अवैध कॉलोनी को बचाने वास्ते प्रशासन पर तीसरी बार पुल का स्थान बदलाने को दबाव बनाया जा रहा है। स्थानीय विधायक, पालिका अध्यक्ष जिला कलक्टर आदि इंजीनियर बनकर बिना तकनीकी ज्ञान के भूमाफिया की ईच्छानुसार कार्य कर रहे हैं। ऐसा लग रहा है कि शहर का बेड़ा गर्क करने की सोची हुई है।
    इस समय ओवरब्रिज गैरकानूनी, गैर न्यायिक,बगैर नक्शा, साईट प्लान व बिना तखमीना मंजूरी के कार्य करवाया जा रहा है। इस पर न्यायिक प्रक्रिया की गाज कभी भी गिर सकती है।
    ऐसा क्यों किया जा रहा है? प्रशासनिक अधिकारी, मुख्यमंत्री कार्यालय, राजनैतिक दलों व सामाजिक संगठन सभी आँखें मूंदे बैठे हैं। चुप हैं जैसे जुबान ही नहीं है। नए परिवर्तन से लाईन पार के 10 वार्डों के लोगों को करीब 1 किलोमीटर और अधिक रास्ता पार कर शहर में आना पड़ेगा। सेठ रामदयाल राठी स्कूल के खेल मैदान को खत्म किया जा रहा है।
    दिलात्म प्रकाश जैन ने लोगों को चेताया है कि अभी समय रहते जागो और ओवरब्रिज सही स्थान पर बनाने के प्रयास नए सिरे से शुरू करें।

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अब चल रहे निर्माण की एकदम ताजा रिपोर्ट करणीदानसिंह राजपूत
अभी देखलो::अभी देखलो:पुन:कह रहे हैं कि मौके पर देखलो-

रेलवे ओवर ब्रिज से मंडराएगा हर समय मौत का खतरा-
पुल पर जबरदस्त मोड़ है-पुल पर दुर्घटनाओं का खतरा रहेगा-
पुल अब कॉलोनी में उतरेगा-बसंत बिहार में रहेगा खतरा-
खास रपट- करणीदानसिंह राजपूत
सूरतगढ़, 15 फरवरी 2014. रेलवे ओवर ब्रिज का निर्माण मौके पर देखते हैं तो मालूम पड़ता है कि इसकी चौड़ाई कम है। इतनी कम चौड़ाई क्यों रखी गई? शायद आसपास की दुकानों को टूटने से बचाने के चक्कर में पुल की चौड़ाई कम कर दी गई। जो अब हमेशा के लिए दुर्घटनाओं का खतरा पैदा कर दिया गया है।
पुल को पहले इंडेन गैस कार्यालय के आगे से बनाना था। लेकिन अब पीछे से बनाया जाने के कारण पुल के ऊपर जबरदस्त मोड़ दिया गया है तथा बसंत बिहार के बीच में उतारा चढ़ाया गया है। बड़ोपल रोड से आने वाला तेज वाहन जबरदस्त मोड़ पर आएगा तब दुर्घटना का खतरा रहेगा। इसके बाद तेज गति से बसंत बिहार में उतरेगा तब खतरा रहेगा।
आज तो इस हालात को समझा नहीं जा रहा है और न देखा जा रहा है। लेकिन बाद में बसंत बिहार और आनन्द बिहार दोनों ही कॉलोनियों के लिए खतरा रहेगा। दोनों कॉलोनियों का बेड़ा गर्क हो रहा है मगर कोई कार्यवाही नहीं कर रहा।
असल में यहां खूब पैसे वाले,खूब पढ़े लिखे,ऊंचे ओहदों वाले अधिकारी तथा राजनेता आदि रहते हैं और उनको एक मिनट की फुर्सत नहीं है।




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