Wednesday, December 18, 2013

अरे,दिल। चल कहीं दूर चलते हैं-



अरे,दिल।
चल कहीं दूर चलते हैं,
इस शहर में खाने को
बस एक ही चीज है
धोखे धोखे धोखे।
अरे,पागल दिल
बस
एक बार में ही
धोखा खाके टूट गया।
कुछ सीख खुदा से
जिसको कितने धोखे
मिलते हैं ही रोज
पर

वो नहीं टूटा
जानता है क्यों?
क्योंकि वो पत्थर का है।
- विकास सारस्वत
सूरतगढ़
96100 99250
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