Sunday, October 7, 2012

बेटी हुई थाली बज रही है कविता करणीदानसिंह राजपूत

बेटी हुई थाली बज रही है      कविता     करणीदानसिंह राजपूत


झनझन झनाझन झन
थाली बज रही है
गली के छोर से आ रही
झनझन झनाझन झन
वो किसका घर है
जहां से आ रही है
झनझन झनाझन झन

अरे सुनो,
थाली की झन झन सुनो
गली का हर द्वार खुला
लडक़े लड़कियां,सास बहुएं
निकली घरों से बाहर
देखने लगी, पूछने लगी
किसके बज रही थाली

बच्चे बच्चियां दौड़े
और दौड़े दौड़े,खबर ले लौटे
कुछ हांफते हांफते,जुबान खोली
नंद काका के बेटी हुई है

सास बहुओं ने सुना
अचरज करते
एक दूजी को देखा
एक ने दूजी से
दूजी ने तीजी से पूछा
क्या कहा, क्या कहा
नंद के बेटी हुई है

ऐ रामू, ऐ दुर्गा
सच कहते हो
नंद के बेटी हुई है
बेटी का जन्म और बजे थाली
बूढ़ी बडेरियां एक साथ बोली
ऐ गीता ऐ सीता,ओ लल्लन बल्लन
सच सच बतलाओ
नंद के बेटी हुई है या बेटा

रामू दुर्गा,गीता सीता,लल्लन बल्लन
हाथ उठाए संग संग बोले
दादी अम्मा,यह सच है
नंद काका के बेटी हुई है

बूढ़ी बडेरियों ने,सास बहुओं ने सुना
एक दूजी को देखा
यह नई रीत की हवा कहां से आई
सभी जा पहुंची नन्द के द्वार
वो सब नाचने लगी
घूमर डालने लगी
गीत गाने लगी
थाली बजाने लगी

नंद के बेटी हुई है
यह बेटी इस गली की
यह बेटी इस गांव की
थाली बजाओ
गुड़ भेली बांटो
पूरे गांव में बजने लगी थाली
नंद के बेटी हुई है
गांव में बेटी हुई है

पुरूष जवान, बडेरे भी थिरकने लगे
थाली बजाते झूमने लगे
गांव में बेटी हुई है
गांव की बेटी हुई है
झनझन झनाझन झन
थाली बज रही है
गली के छोर से आ रही
झनझन झनाझन झन
थाली बज रही है
नंद के बेटी हुई है

गांव की गली गली से
गूंजने लगी आवाज
एक आवाज
बेटी बेटा एक समान
सुखी परिवार का सूत्र महान
बेटी सदा से शक्तिशाली
बेटी सदा से बुद्धिवाली
बहु बन कर कुटुम्ब चलाती
बहु बन वंश की बेल बढ़ाती
बेटी सबकी पालनहार
बेटी शक्ति का अवतार

आओ,सब मिल करें दुलार
आओ, सब मिल थाली बजाएं
गीत गाएं गुनगुनाएं
नंद के बेटी हुई है
गांव में बेटी हुई है
झनझन झनाझन झन
थाली बज रही है
गांव में बेटी हुई है।

करणीदानसिंह राजपूत,
राजस्थान सरकार द्वारा अधिस्वीकृत स्वतंत्र पत्रकार,
सूरतगढ़
94143 81356



----------------------

Search This Blog