Friday, August 31, 2012

बिजली सामान खरीद में ईओ भंवरलाल सोनी व राकेश मेंहदीरत्ता के खिलाफ जांच:


फर्म से घटिया सामान खरीदने और कम खरीदने बिल अधिक लेने का आरोप:
विशेष खबर-करणीदानसिंह राजपूत
सूरतगढ़,31 अगस्त 2012. भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने सूरतगढ़ नगरपालिका के पूर्व में रहे ईओ भंवरलाल सोनी व पूर्व में रहे लेखाधिकारी राकेश मेंहदीरत्ता के विरूद्ध बिजली सामान खरीद में घोटाले की प्राथमिक जांच शुरू की है। आरोप है कि विष्णु बाहेती नामक व्यक्ति की फर्म से निर्धारित मापदंड के बजाय घटिया सामान खरीदा,यह सामान भी कम खरीदा व बिल अधिक लिया गया।
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Wednesday, August 29, 2012

सूरतगढ़ में इन्द्रधनुष:करणीदानसिंह राजपूत:



सूरतगढ़, 29 अगस्त 2012. भारी वर्षा के बाद रिमझिम के चलते 28 अगस्त की शाम को जब सर्य अस्ताचल में छिपने को जा रहा था तब पूर्व की दिशा में आकाश में सतरंगे इन्द्रधनुष का लुभावना दृश्य था। हजारों लोगों ने यह दृश्य देखा जो बाहर वर्षा का आनन्द ले रहे थे या बाहर विचरण कर रहे थे। इसी दृश्य को आप भी देख सकते हैं।
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Saturday, August 18, 2012

पालिकाध्यक्ष बनवारीलाल यौनशोषण पीडि़ता की अर्जी पर एसपी का आदेश

-खास खबर- करणीदानसिंह राजपूत-
पीडि़ता ने अनुसंधान अधिकारी सीआई रिछपालसिंह चारण,अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक यादराम फांसल,पालिका अध्यक्ष बनवारीलाल मेघवाल, पार्षदपति ओम साबनिया और सिपाही रोहताश पर प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की अर्जी दी थी।
पीडि़ता के साथ वकील हरचंदसिंह सिद्धु भी थे।
एसपी के आदेश के बाद पीडि़ता और वकील सूरतगढ़ सिटी थानाधिकारी दिनेश राजोरा से भी मिले की एसपी के आदेशानुसार कार्यवाही करने की मांग की।
सूरतगढ़, 18 अगस्त 2012.पालिकाध्यक्ष बनवारीलाल मेघवाल यौनशोषण के प्रकरण में पुलिस की फाईनल रिपोर्ट के बाद आए मोड़ के बाद कहा जा सकता है कि इस मामले से बनवारीलाल मेघवाल का पीछा नहीं छूट रहा है बल्कि इसमें पुलिस अधिकारी भी उलझते जा रहे हैं। पीडि़ता के वकील हरचंदसिंह सिद्धु ने कहा है कि बनवारीलाल को बचाने के चक्कर में आगे और कितने पुलिस अधिकारी मामले में उलझते जाएंगे।
    इस प्रकरण में पीडि़ता की ओर से थाना सूरतगढ़ सिटी में मुकद्दमा दर्ज नहीं किए जाने पर वकील हरचंदसिंह सिद्धु ने बीकानेर के पुलिस महानिरीक्षक से भेंट की थी। उन्होंने एसपी को फोन पर आवश्यक कार्यवाही करने का निर्देश दिया था।
    पीडि़ता इसके बाद 9 अगस्त को जिला पुलिस अधीक्षक से श्रीगंगानगर में मिली और अर्जी दी। उस समय वकील हरचंदसिंह सिद्धु भी साथ थे। एसपी ने उस अर्जी पर आदेश दिया जो सिटी थाने में पहुंच गया। पीडि़ता ने एसपी को वह फोटो भी दिखाई जो ब्याह के बाद सिपाही रोहिताश के साथ खिंचवाई हुई है। इसके अलावा एक नया तथ्य और बताया गया।
अनुसूचित बाजीगर जाति की महिला ने पुलिस में जो अर्जी दी उसमें यह लिखा हुआ था।
    पालिका अध्यक्ष बनवारीलाल मेघवाल,पार्षद पति ओम साबनिया व सिपाही रोहताश पर अनुसूचित बाजीगर महिला से बलात्कार करने, यौन शोषण करने, मारपीट करने,गर्भपात करवाने,शिव मंदिर में सिपाही को कुंवारा बतलाकर ब्याह करवाने के प्रकरण में पुलिस के फाइनल रिपोर्ट दिए जाने के बाद अब बहुत गंभीर मोड़ आया है। पीडि़ता ने आरोप लगाया है कि अनुसंधान अधिकारी थानाधिकारी रिछपालसिंह चारण ने पीडि़ता के मोबाईल और सिम, सिपाही रोहिताश के साथ ब्याह के फोटो आदि अनुसंधान में लिए मगर उन्हें रिकार्ड में नहीं लिया तथा नष्ट कर दिए। पीडि़ता ने इस बाबत 19 जुलाई को एक आवेदन पुलिस थाना सूरतगढ़ सिटी में प्राथमिकि दर्ज करने के लिए दिया। सूचना है कि सीआई दिनेश राजौरा ने पीडि़ता से कहा कि इस बाबत पहले पुलिस अधीक्षक से बात करके उनका जो भी निर्देश होगा उसका पालन करेंगे। अगर वे प्रकरण दर्ज करने का आदेश देंगे तो प्रकरण दर्ज कर दिया जाएगा अन्यथा जो भी सूचना होगी वह बतला दी जाएगी।
इस आवेदन में रिछपालसिंह पर यह आरोप भी लगाया गया है कि उसने पीडि़ता के लडक़े का झूठा बयान लिखा कि उसकी माता बदचलन है। पुत्र ने यह आरोप लगाया है कि उसने रिछपालसिंह को कभी कोई बयान नहीं दिया। इसके अलावा पीडि़ता के पति का भी बयान रिछपाल ने दर्ज करना बताया है जिसमें पत्नी पर बदचलनी का आरोप लगाया हुआ है। इस बारे में आरोप लगाया गया है कि पुलिस एक तरफ तो पीडि़ता के पति को अदालती वारंट पर चार साल से लिखती रही है कि वह मिला नहीं और जिस दिन बयान लिखे तब वह वारंट दिया क्यों नहीं? पति के विरूद्ध दो प्रकरण पीडि़ता ने दर्ज करवा रखे हैं।
पीडि़ता ने यह आरो भी लगाया है कि आरोपियों से जो बात मोबाईल आदि पर हुई उसकी सीडी की आवाज की जांच नहीं हुई। आरोपियों और पीडि़ता की आवाजों के नमूने लेकर जांच विधि विज्ञान प्रयोगशाला से करवाए जाने चाहिए थे लेकिन नहीं करवाए गए। ये सब आरोपियों को बचाने के लिए किया गया।
पीडि़ता ने यह प्रकरण अनुसंधान अधिकारी रिछपालसिंह चारण, अपर पुलिस अधीक्षक यादराम फांसल सहित बनवारीलाल मेघवाल, ओम साबनिया व सिपाही रोहिताश पर दर्ज करने का लिखा है।
इसमें यह आरोप भी लगाया है कि रिछपालसिंह चारण स्थानीय विधायक गंगाजल मील की अनुशंसा पर सूरतगढ़ में पद स्थापित रहा और उनके प्रभाव में काम करता रहा। पालिकाध्यक्ष बनवारीलाल मेघवाल मेघवाल को गंगाजल मील का खास आदमी बताया गया है। वहीं ओम साबनिया के लिए लिखा गया है कि उसकी पत्नी को कांग्रेस की टिकट गंगाजल मील ने दिलवाई थी। -ओम साबनिया की पत्नी सूरतगढ़ में पार्षद है।-यह आरोप लगाया गया है कि अनुसंधान अधिकारी रिछपालसिंह चारण ने इनको बचाने के लिए झूठे साक्ष्य गढ़े और सही तथ्यों को नष्ट किया छिपाया। पीडि़ता ने जब यह आवेदन पुलिस में दिया तब उसके वकील हरचंदसिंह सिद्धु भी साथ थे।
    सिपाही रोहताश ने पीडि़ता से ब्याह किया और बनवारीलाल तथा ओम साबनिया ने यह ब्याह करवाया था।


Wednesday, August 15, 2012

स्वतंत्रता दिवस समारोह सूरतगढ़ 2012: विशेष रपट-1- करणीदानसिंह राजपूत










अतिरिक्त जिला कलक्टर एस.के.बुडानिया ने फहराया तिरंगा
सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने धूम मचाई:देश भक्ति गीत छाए
सूरतगढ़ 15 अगस्त 2012. सूरतगढ़ में स्वतंत्रता दिवस पर्व पर मुख्य समारोह स्टेडियम मैदान पर अतिरिक्त जिला कलक्टर एस.के.बुडानिया ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया। इस अवसर पर स्कूली विद्यार्थियों की ओर से देश भक्ति के गीत संगीत हुए। व्यायाम प्रदर्शन में अनेक स्कूली बच्चों ने भाग लिया। समारोह में उपखंड अधिकारी मदनलाल सिहाग,राजस्व तहसीलदार,नगरपालिका अध्यक्ष बनवारीलाल मेघवाल,अधिशाषी अधिकारी पृथ्वीराज सहित विभिन्न कार्यालयों के अधिकारियों ने भाग लिया। इस अवसर के कई फोटो यहां प्रस्तुत किए जा रहे हैं। रपट के अन्य भाग भी देखें।

Sunday, August 12, 2012

गांधी के देश में भ्रष्टराज ने गांधी के सत्य और अहिंसा को मार डाला-करणीदानसिंह राजपूत: करणी की बात- 20:

भारत देश में संपूर्ण काम काज गांधी के नाम पर चलाया जा रहा है,मगर स्वतंत्रता के इतने वर्षों के बाद हालात कह रहे हैं कि गांधी के देश में गांधी के सत्य और अहिंसा को भ्रष्टराज ने मार डाला है। गांधी के सत्य और अहिंसा अब केवल कागजी और दिखावे के रह गए हैं। राज चलाने वालों ने सत्य और अहिंसा का रूप बदल दिया है तथा अपनी मर्जी की परिभाषाएं बना दी हैं। आज ऐसा कोई भी प्रदेश नहीं है जहां पर किसी न किसी जगह कोई दंगा फसाद ना होता हो तथा पुलिस वाले किसी की जान ना ले रहे हों।
    राज चलाने वालों को चरित्रवान मान कर देश की बागडोर दी गई लेकिन कितने बदल गए हैं अधिकांश राजनेता। केवल भ्रष्टाचार में करोड़ों रूपए जीमने और करोड़ों रूपए की कीमती जमीने और कृषिफार्म शापिंग काम्प्लेक्स ही उजागर नहीं हो रहे, बल्कि आए दिन कोई न कोई राजनेता या उनके परिवार काप सदस्य बलात्कार यौन शोषण के अपराधिक कृत्य में फंसा हुआ सामने आ रहा है। भ्रष्ट राजनेताओं और उनके लोगों ने चरित्र की परिभाषा को तार तार करके रख दिया है। जब पकड़े जाते हैं तब कहते हुए दिखते हैं कि उनकी प्राइवेट जिंदगी को देखा ना जाए। मतलब की सफेद वस्त्रों में राज करने वालों के प्राईवेट बदनाम रूप को ना देखा जाए। शर्मनाक तो यह भी हो रहा है कि इस प्रकार के मामलों में पकड़े गए पति को बचाने के लिए पत्नी सार्वजनिक रूप से चैनलों पर कहे कि पति की प्राइवेट जिंदगी पर उसको कोई एतराज नही है। बेटी बाप के पक्ष में राजनीति करने लगे और बाप को भला कहते हुए जनता से समाज से सहयोग मांगे। संबंधित जाति के लोग उसको बचाने के लिए सम्मेलन भी करने लगें।
    गरीबों के काम ना हों और काम करने के लिए इज्जत मांग ली जाए। कितने ही मामले सार्वजनिक हो चुके हैं। पुलिस को माना जाता है कि वह जनता की अपराधों से रक्षा करेगी, लेकिन जब इस प्रकार के प्रकरण थानों में भी होने लगें व उनकी जांच में वर्षों बीत जाऐं। राजस्थान के एक मामले को लें जिसमें जोधपुर में एक विदेशी महिला की इज्जत से खिलवाड़ हुआ था। उसमें एक पखवाड़े में ही जांच हो गई व अभियुक्त का चालान तक हो गया, लेकिन देश की नारी के साथ बलात्कार व यौन शोषण के मामलों में इतनी तत्परता नहीं दिखाई जा रही। मतलब की देश व विदेश की महिला की इज्जत की परिभाषा और मापदंड अलग अलग।
राज करने वालों की यहां तक धौंस रहती है कि भ्रष्ट और अपराधिक राजनेताओं को दंडित करने व हटाने के बजाए उसको किसी न किसी पद पर बनाए रखने की चालें चली जाती है।
देश आज न अंदर सुरक्षित है न सीमाओं पर। यही हाल देश के लोगों का है। लेकिन राज करने वालों ने देश की राजधानी दिल्ली को सुरक्षा देकर मान लिया कि पूरा देश सुरक्षित हो गया तथा राजनीतिज्ञों को व उनके परिवारों को सुरक्षा देकर मान लिया गया कि देश का हर नागरिक सुरक्षित हो गया है। देश में रोजगार देने के मामलों में भी यही नीति अपनाई जाने लगी है। देश में अन्नाज नष्ट हो रहा है, मगर गरीबों को सस्ते दर पर देने में आनाकानी हो रही है। बीपीएल परिवारों के परिवार कार्ड बनाने तक में इतने नियम और कानून बना दिए गए हैं कि अधिकांश परिवार वंचित रह जाऐंगे। एक तरफ तो बीपीएल कार्ड के लिए भरा जाने वाला प्रपत्र उलझे हुए प्रश्रों से भर दिया गया है और दूसरी ओर सरकार उनको मोबाईल उपहार में देने की योजना बना रही है। खाने को रोटी ना सही, बातें तो करो। वे भी मुफ्त में करो।

करणीदानसिंह राजपूत
राजस्थान सरकार द्वारा अधिस्वीकृत स्वतंत्र पत्रकार,
मोबा. 94143 81356
दिनांक- 12 अगस्त 2012.
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Monday, August 6, 2012

मूली में नर और नारी


मित्रता दिवस पर फेस बुक पर अजब गजब एक चित्र शेयर हुआ। मूली की विचित्र आकृतियों को संग्रह किया गया, लेकिन बड़ा रोचक लगा। प्रकृति के इस अजूबे को यहां पर दिया जा रहा है। इसमें एक नर और दूसरी नारी दिखाई देती है।


Friday, August 3, 2012

सूरतसागर के जोड़पायतन और गिनाणी पर बने मकान कॉलोनियां क्या ध्वस्त कर दिए जाऐंगे?खास रपट- करणीदानसिंह राजपूत

सूरतसागर के जोड़पायतन और गिनाणी पर बने मकान कॉलोनियां क्या ध्वस्त कर दिए जाऐंगे?
खास रपट- करणीदानसिंह राजपूत
आलीशान कॉलोनियां और मकानों पर खतरा मंडराने लगा है।
नगरपालिका अतिक्रमणों को शह दे रहा है और विद्युत निगम कनेक्शन दे रहा है।

दिल्ली और मुम्बई से भी मंहंगे कहलाने वाले सूरतगढ़ के सूरत सागर के जोहड़ पायतन और गिनाणी पर अतिक्रमण से और किसी न किसी प्रकार से नियमों को ताक पर रख कर किए गए आवंटन वाली भूमि पर जब निर्माण होने लगे तब अखबार वालों ने समाचार छापने शुरू किए। उस समय पूंजीपति लोगों और पैसे वाले अधिकारियों व कर्मचारियों ने समाचार रपटों की हंसी उड़ाई कि कुछ भी लिखते रहो, बाल भी बांका होने वाला नहीं है। अब हालात बदल गए हैं। हंसी उड़ाने वालों और समाचारों को हवा में उड़ा देने वालों के चेहरों पर हवाईयां उडऩे लगी है। अब पूछा जा रहा है कि क्या होगा?
इसका उत्तर यह हो सकता है कि जब तक कोई शिकायत नहीं करे तब तक तो सच में कुछ भी होने वाला नहीं है। लेकिन किसी एक ने भी पीछा कर लिया यानि कि कमर कस ली तब वह होगा जिसके लिए अब तक सोचा नहीं गया है। वे लोग जो कहा करते थे कि बाल बांका नहीं होगा। बाल ही बांका नहीं होगा, बाकी सब बांका हो जाएगा।
श्रीगंगानगर में एक माईनर के क्षेत्र के अतिक्रमण हटवा दिए गए। कुछ दिनों तक लीपा पोती की जाती रही। इससे पहले पीलीबंगा में अतिक्रमण ध्वस्त कर दिए गए थे।
    सूरत सागर के पायतन की भूमि आवंटित नहीं की जा सकती थी, मगर गलत आवंटन कर दिया गया। इसके अलावा नगरपालिका ने अतिक्रमणों को सर्वे में माना और पट्टे दे दिए। यह सिलसिला थमा नहीं है। खतरा होते हुए भी पालिका पट्टे दिए जा रही है। विद्युत निगम अतिक्रमणों पर बिजली देने में लगा है। यहां पर हालात ये हैं कि जिस दिन जेसीबी पहुंच जाएगी तब कोई भी रोकने वाला नहीं होगा। आश्चर्य तो यह है कि इतना होते हुए भी लोग अभी भी लाखों रूपए लगा कर अतिक्रमणों को और पक्का कर आलीशान मकानों और कोठियों में बदलते जा रहे हैं।
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