Sunday, February 12, 2017

सूरतगढ़ जिला बनाओ अभियान 36 साल पुराना:नई रपटें 2014-अपडेट


खास खबर- करणीदानसिंह राजपू


अब यह मांग 41 साल पुरानी हो चुकी है।

पहली बार  प्रकाशित  10 - 3 -2012
दूसरी  बार  प्रकाशित  5-6-2014
तीसरी बार प्रकाशित  12-2-2017




सूरतगढ़ जिला बनाओ अभियान के तहत 36 साल में अनेक कदम उठाते हुए बार बार नई गति दी है तथा जब भी अभियान सरकारें बदलने के साथ दुबारा शुरू हुआ तब नई ऊर्जा पैदा हुई और नए जोश से कदम उठाए गए। सन 2008 और उसके बाद 2013 के विधान सभा चुनावों में हर प्रत्याशी का अहम मुद्दा था।
अब संयोजक दिलात्मप्रकाश जैन की अध्यक्षता में समिति की बैठक हुई है जिसमें ग्रामीण इलाकों को इस मांग में जोडऩे का निर्णय हुआ है।
इसके अलावा 9 जून को उपखंड अधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन के साथ ज्ञापन दिया जाएगा।

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पहले की रपट यहां दी जा रही है।


सन 1978 में जनता पार्टी कार्यकाल में मुख्यमंत्री भैरोंसिंह शेखावत को विधायक गुरूशरण छाबड़ा ने दिया था मांग पत्र:
शेखावत का भोजन छाबड़ा के निवास पर था:

सूरतगढ़ को जिला बनाओ की मांग एक बार पुन:  हुई है। 
भारतीय जनता पार्टी ने इसका अभियान 10 मार्च 2012 को सुभाष चौक पर शुरू किया । संस्थाओं व संगठनों के द्वारा क्रांतिकारियों की प्रतिमाओं के चौक पर पुतले जलाकर चुप हो जाने से अभियान अच्छा है चाहे इसका परिणाम आने में समय लगे।
    सूरतगढ़ को जिला बनाने की मांग के पीछे सूरतगढ़ की समस्त भूगोल अधिक अहमियत रखता है। इसका ब्यौरा महत्वपूर्ण है और इसको समझना जरूरी है। राजनैतिक दृष्टि से यह मसला बार बार उठता रहा है, मगर वह बाद में ठप भी होता रहा है।
सूरतगढ़ जिला बनाओ की मांग 36 साल पुरानी है। सन 1978 में जनता पार्टी कार्यकाल में मुख्यमंत्री भैरोंसिंह शेखावत को विधायक गुरूशरण छाबड़ा ने सबसे पहले यह ज्ञापन दिया था। विधायक गुरूशरण छाबड़ा के सूरतगढ़ निवास पर शेखावत का रात्रि भोजन था। उस समय यह ज्ञापन दिया गया था। उस समय के भारतजन अखबार में यह समाचार मेरी तरफ से प्रकाशित भी किया गया था। भारतजन का स्वामित्व उस समय मेरा ही था।
    इससे भी अधिक महत्व पूर्ण बात यह है कि सरकार ने नए जिले बनाने व जिलों के पुन:गठन के लिए एक कमेटी बनाई थी। उसमें प्राथमिकता थी कि इंदिरा गंाधी नहर क्षेत्र का जिस इलाके में विकास हो रहा है उस क्षेत्र में जिला मुख्यालय बनाया जाए। यह समाचार राजस्थान पत्रिका में 10 जुलाई 1978 को प्रकाशित हुआ था। मेरे पास वह पृष्ठ रिकार्ड में आज भी है। इस प्राथमिकता में सूरतगढ़ इलाका ही था जिसमें महाजन को भी शामिल किया जा सकता था। सूरतगढ़ का दावा प्रबल था। इस प्राथमिकता को उस समय ध्यान में ही नहीं रखा गया और ना जोर दिया गया।
    इसके बाद जब हनुमानगढ़ को जिला बनाने की मांग उठी, तब भी मुख्यमंत्री तो भैरोंसिंह शेखावत ही थे, मगर सूरतगढ़ के विधायक पद पर भारतीय जनता पार्टी के अमरचंद मिढ़ा आ गए थे। उस समय राज भारतीय जनता पार्टी का था। भैरोंसिंह शेखावत ने उनको राजी कर लिया कि हनुमानगढ़ को जिला बना दिया जाए और सूरतगढ़ को जिले जैसा प्रशासन दे दिया जाए। इसके बाद सन 1992 में हनुमानगढ़ को जिला बना दिया गया और सूरतगढ़ में अतिरिक्त जिला कलक्टर का पद सृजित किया गया और उसके अधीन सूरतगढ़, श्रीबिजयनगर, अनूपगढ़ और घड़साना तहसीलें रखी गई। केवल दबाव के कारण यह हुआ और सूरतगढ़ जिला बनाए जाने से पीछे रख दिया गया। इसके बाद समय समय पर और चुनाव के समय सूरतगढ़ को जिला बनाने की मांग उठती रही।
    सन 2008 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के प्रत्याशी गंगाजल मील, भाजपा के प्रत्याशी रामप्रताप कासनिया और स्वतंत्र प्रत्याशी राजेन्द्र भादू की चुनावी घोषणाओं में सूरतगढ़ को जिला बनाने की बात भी थी।
    विधायक गंगाजल मील चुन लिए गए और उनकी तरफ से अनेक बार मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ज्ञापन दिए जा चुके हैं।

राजस्थान पत्रिका जयपुर में दिनांक 10 जुलाई 1978 में पृष्ठ 6 पर समाचार छपा था उसकी फोटो यहां दी जा रही है। 








करणीदानसिंह राजपूत
राजस्थान सरकार द्वारा अधिस्वीकृत स्वतंत्र पत्रकार,
मोबा. 94143 81356
दिनांक- 10 मार्च 2012.
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