Friday, February 24, 2012

बाजीगर महिला से बलात्कार:पालिकाध्यक्ष बनवारीलाल का मामला पत्रकार वार्ता में प्रभारी मंत्री विनोदकुमार के सामने आया:रपट करणीदानसिंह राजपूत:

पत्रकार सत्यपाल युवक ने कहा क्यों नहीं लगाई जा रही एफआर जब विधायक गंगाजल मील भी मामला झूठा बतला रहे हैं।
 विधायक जी पत्रकारों से तो कह रहे हैं वे एसपी को भी लिखें।
सूरतगढ़, 24 फरवरी, 2012.श्रीगंगानगर जिले के प्रभारी मंत्री विनोदकुमार की पत्रकार वार्ता  23 फरवरी को  हुई तब उसके समापन मोड़ पर पालिकाध्यक्ष बनवारीलाल पर दर्ज बलात्कार के प्रकरण का मामला पत्रकार सत्यपाल युवक ने उठा दिया। सत्यपाल युवक वरिष्ठ पत्रकार हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकरण से अध्यक्षजी का खून कम हो गया है और विधायक गंगाजल मील इस मामले को झूठा और साजिशपूर्ण बतला रहे हैं तो इस पर एफआर क्यों नहीं लगवाई जा रही। अध्यक्षजी को इस प्रकरण में क्लीनचिट दिलवाई जाए। देरी क्यों की जा रही है? पुलिस इसका निस्तारण क्यों नहीं कर रही है? प्रभारी मंत्री तो नहीं बोले, मगर विधायक गंगाजल मील ने पत्रकारों को एक बार पुन: कहा कि मामला झूठा है और साजिश है। प्रभारी मंत्री की इस प्रेस कान्फें्रस में पालिकाध्यक्ष बनवारीलाल मेघवाल भी उपस्थित थे।
विधायक गंगाजल मील इस मामले को पहले भी झूठा और साजिश बतला चुके हैं, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर एसपी को इस बाबत क्यों नहीं कहा जा रहा और क्यों नहीं लिखा जा रहा? कानूनी पेचीदगी में सीधा क्लीनचिट का नहीं लिखा जा सकता्र मगर विधायक जी की पार्टी के हैं इसलिए उन पर तो कोई रोक नहीं है कि वे क्लीनचिट की मांग ना करें। वे इस मामले में जल्दी से फाईल के निस्तारण का लैटर तो एसपी को लिख ही सकते हैं। किसी मामले का जल्दी निस्तारण किए जाने की मांग विधायक द्वारा करना तो गलत नहीं बताया जा सकता। किसी मामले में देरी करना भी तो अन्याय है।
विधायक मील ने इससे पहले तीन दिसम्बर 2011 को सुबह 11-28 बजे मोबाईल फोन पर यह महत्वपूर्ण जानकारी दी कि बनवारीलाल निर्दाेष है। मील ने स्वयं कॉल करके उक्त जानकारी दी थी। उस समय भी विधायकजी से कहा गया कि बनवारीलाल निर्दोष है तो इस मामले का निस्तारण जल्दी से करवाएं। यह मामला रूका सा पड़ा है। बनवारीलाल निर्दाेष है तो फिर पुलिस ने बनवारीलाल पर तलवार क्यों लटका रखी है? यह तलवार उसके सिर के ऊपर से जल्दी से जल्दी हटाई जानी चाहिए। जिला पुलिस अधीक्षक से कह कर जांच का परिणाम आऊट करवाएं।
मील साहेब ने कहा कि वे इस बाबत एसपी से बात करेंगे और आपके सामने बात कर लेंगे।
यह प्रकरण अदालत के आदेश पर सूरतगढ़ सिटी थाने में 7 अक्टूबर 2010 को दर्ज हुआ था और उस समय भी मील साहेब  ने 12 अक्टूबर को प्रेस कान्फें्रस में बनवारीलाल मेघवाल को निर्दोष बताया था। मील ने कहा था कि बनवारीलाल को तो फंसाया गया है।
अब भी यही बात मील साहेब ने फिर से कही है।
पीडि़ता ने खुद ने ही अदालत में दायर किए अपने इस्तगासे में निष्पक्ष जांच का लिखा था। इस प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग बार बार दोहराई जाती रही है। भाजपा ने भी निष्पक्ष जांच करने की मांग को लेकर आंदोलन किया था, और 3 जनवरी 2011 को धरना उठाने के बाद से उसके नेता चुप हैं तथा आगे कोई मांग नहीं कर रहे हैं। ऐसी हालत में बनवारीलाल निर्दाेष है तो सिर पर तलवार लटकाए रखना भी गलत है। विधायक जी पत्रकारों को जो कह रहे हैं वह एसपी से कहें तो मामला निस्तारित होने में जल्दी होगी।
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