Wednesday, February 1, 2012

गणतंत्र दिवस:कवि सम्मेलन में शॉल और श्रीफल भेंट सम्मान में यह क्या हुआ? गौर से देखना:कवि भी चक्कर में फंसे -हंसती हंसाती तस्वीरें:खास रिपोर्ट- करणीदानसिंह राजपूत-

शॉल श्री फल प्लास्टिक थैली में डाल लो। अशोक ने बंद करदी तो क्या हुआ? अपने पास तो उससे भी बड़ी पावर है। अपन सूरतगढ़ नगरपालिका के कामचलाऊ अधिशाषी अधिकारी हैं तो क्या हुआ? हटा नहीं सकता गहलोत। दूसरा अधिकारी है ही नही।

वाह बनवारीलाल अपनी जोड़ी भी मजेदार रहेगी- राजेश शायद यही कह रहा है

गंगाजल जी आप जनता को पागल समझो और मैं श्रोताओं को। चलो थोड़ी थकान उतारें। शायद दोनों ही एक दूजे से यही कह रहें हैं।

क्या हुआ? कवि सम्मेलन में भी नारियल नहीं मिलेगा? शायद यही सोच रहे हैं सूरतगढ़ के कवि नन्दकिशोर सोमानी।

वो लिफाफा भी दो जिसमें मनी है। शायद यही कहा जा रहा है। संदेश त्यागी के मुंह से मुस्कान बिखेरते हुए।

छोड़ भी दो। घर पर क्या ले जाऊंगा? शायद यही निकल रहा है लाज पुष्प के मुंह से।

एसडीएम साहेब कुछ भी करलो। यह नारियल तो वापस नहीं दूंगा। सुरेन्द्रम सुंदरम की आवाज सुनो।

सरदारजी खूब छकाया। अब ना शाल देंगे ना नारियल। रूपसिंह राजपुरी को शॉल नहीं ले जाने दे रहे।

डा. अरूण सोहरिया भी यही कह रहे हैं कि ना शॉल वापस दूंगा ना नारियल

ओम पुरोहित कागद भी यही कह रहे हैं- ना भाई ना। वापस नहीं। समझो-पुठा कोनी दूं।

जनकराज पारीक क्या कह रहे हैं- वाह वापस मांगने लगे। कम पड़ गए। ज्यादा मंगवाने थे।

यारों। अ तो मेरे काबू में है। लाओ और देदो। मोहन आलोक बुढ़ापे में अपनी ताकत दिखलाते हुए।

एडीएम साहेब से चारा जोई करते दीनदयाल शर्मा। जगिये की कविता दुबारा सुना देस्यूं। शॉल तो छोड़ देवो।
कवियों ने मंच पर नेताओं की और अधिकारियों की खूब उतारी आरती, मगर जब आया शॉल ओढ़ाने और श्रीफल से सम्मान करने का समय तब क्या गुल खिले। देखें हमारी नजर में।
सूरतगढ़, 2 फरवरी, 2012. गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर महाराजा सिनेमा में हुए कवि सम्मेलन में कवियों ने राजनेताओं और अधिकारियों की जम कर आरती उतारी,मगर भूल गए कि अभी समय बाकी है जिसमें शॉल और श्रीफल भरी लेना है। नहीं तो लोग कहेंगे कि गप्प मारता है किसी कवि सम्मेलन में नहीं गय। गया तो फिर दिखा वो शॉल और नारियल।
चलें तो फिर देखें  कि क्या क्या हुआ?

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