Friday, October 7, 2011

हमारा ताज कश्मीर है जिसे भूले बैठे हो और आगरा के ताज की चिंता है

करणी की बात: काल चक्र-6
हमारा ताज कश्मीर है जिसे भूले बैठे हो और आगरा के ताज की चिंता है
                खबर आई कि आगरा का ताज नष्ट हो जाएगा। उसकी नींव में लगी लक्कडिय़ां पानी नहीं मिलने से नष्ट होने लगी है। सडऩे लगी है। उसकी मरम्मत जल्दी नहीं हुई तो वह नष्ट हो जाएगा। विदेशी पर्यटकों के आने की बहुतायत है और उनको बाद में हम क्या दिखलाएंगे? यमुना के किनारे बना हुआ ताज महल। बेगम मुमताज महल की यादगार में बादशाह शाहजहां का बनाया हुआ ताज महल। कई बार विवाद भी होते रहे हैं कि यह शाहजहां का बनवाया हुआ भी नहीं है। महल में कभी कब्रें नहीं होती और जहां कब्रें होती हैं उनको महल नहीं कहा जाता। बड़े लोगों की कब्र जहां होती हे जहां उन्हें दफनाया हुआ होता है उनको मकबरा कहा जाता है। कुछ इसे हिन्दु राजा का बनाया हुआ बतलाते हैं।
    अभी इसके निर्माण पर बहस का कोई मुद्दा नहीं है। अभी एक विषय है कि यमुना किनारे का ताज नष्ट होने के कगार पर है। उसकी कई स्थानों पर दरारें आ चुकी है। पत्थर खंडित हो रहे हैं। ताजा खबर यह आई है कि उसकी नींव में लगी लक्कडिय़ां खराब होने लगी हैं। बड़े अखबारों और चैनलों पर यह अहम खबर के रूप में परोसी गई है। देश की सरकार पुरातत्व विभाग बहुत चिंतित है। ताज के नष्ट होने से हमारे महान देश का पर्यटन उद्योग पर बुरा असर पड़ेगा। मानो हमारा यह भारत देश पर्यटकों के टकड़ो पर ही जिंदा हो।
    सरकार को आगरा के ताज की सदा से चिंता रही है। सोचने का विषय यह है कि हमारे देश का ताज कश्मीर है। भारत माता मुकुट है। उस ताज की उस मुकुट की हमें चिंता नहीं है। वहां पर रोजाना ही कुछ न कुछ गड़बड़ी होती रहती है। आंतककारियों के अतिक्रमण आम लोगों पर सुरक्षा सैनिकों पर होते रहते हैं। उस ताज की हमें कोई चिंता क्यों नहीं है? उस ताज के दो टुकड़े कर दिए गए तथा एक टुकड़े का नाम पाकिस्तान सरकार ने आजाद कश्मीर रख दिया। देश की स्वतंत्रता के कुछ समय बाद की यह घटना भूल गए। इसके बाद भी पाकिस्तान ने दो बार आक्रमण करके उस ताज के कुछ हिस्से को और दबा गया। वहां से हजारों पंडित परिवारों को सब कुछ छोड़ कर निकलना पड़ा। वे कश्मीरी पंडित परिवार बीस पचीस सालों से दर दर की ठोकरें खाते घूम रहे हैं। उनका पूरा ओर आने वाली पीढिय़ों का जीवन नष्ट हो गया। उनकी सरकार को कोई चिंता नहीं है। देश का असली ताज तो कश्मीर है वह आधा हमारे पास नहीं है। उसकी चिंता नहीं। सरकार तुष्टिकरण की नीति पर चल रही है। कश्मीरी पंडितों के परिवारों की चिंता नहीं है, मगर बांग्ला देश से जबरन देश में घुस आए बांग्लावासियों की चिंता है। उनके लिए सहारा कैंप हैं। उनको निकाले जाने पर कोई विचार नहीं करना चाहता। उल्टा उनके वोट तक बना दिए गए। यह हैं हमारी ताज नीति।
करणीदानसिंह राजपूत
राजस्थान सरकार द्वारा अधिस्वीकृत पत्रकार
94143 81356

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