Thursday, October 27, 2011

धर्म परायणा मां हीरा की अस्थियां गंगा में विसर्जित

गंगा के पवित्र घाट

धर्मपरायणा मां हीरा

बड़े पुत्र करणीपालसिंह अस्थियां विसर्जन की रस्में निभाते हुए

अस्थियां विर्सजन के पूजन में शामिल गोपसिंह पत्नी रोमिला व पुत्री भानुकंवर व पत्रकार करणीदानसिंह की पत्नी विनीता सूर्यवंशी साथ की फोटो में राजेन्द्र प्रसाद शर्मा व उनकी पत्नी सुमित्रा भी हैं।
धर्म परायणा मां हीरा की अस्थियां गंगा में विसर्जित
बड़े पुत्र करणीपालसिंह ने विसर्जित की
सूरतगढ़, 27 अक्टूबर 2011. धर्म परायणा मां हीरा की अस्थियां 24 अक्टूबर को गंगा के पवित्र जल में विधि विधान के साथ विसर्जित की गई। बड़े पुत्र करणीपालसिंह ने यह रस्म निभाई। अस्थियां विसर्जन के समय अन्य पुत्र वरिष्ठ पत्रकार करणीदानसिंह उनकी पत्नी विनीता सूर्यवंशी, गोपसिंह उनकी पत्नी रोमिला पुत्री भानुकंवर, उनकी छोटी पुत्री श्रीमती हेम और उसका दोहिता यशु व पत्रकार के मित्र राजेन्द्र प्रसाद शर्मा व उनकी पत्ली सुमित्रा भी साथ थे। विख्यात तीर्थ पुरोहित पं.नकछेद आशाराम जी, लकड़ी वाले के पुत्र पं. राजकुमार शिवकुमार रामकुमार के निर्देशन में घाट के पंडा ने मत्रोच्चार से अस्थियां विसर्जित करवाई।
माता हीरा पत्नी स्व.ठा.रतनसिंह बैंस का स्वर्गवास 9 अक्टूबर को हो गया था। धर्मपरायणा हीरा के मरणोपरांत महावीर इंटरनेशनल के माध्यम से नेत्र दान भी करवाया गया जिससे दो जरूरतमंदों को नेत्रज्योति मिली।




Sunday, October 16, 2011

स्वर्गवास धर्म प्रिय माताजी श्रीमती हीरा

                    स्वर्गवास
हमारी धर्म प्रिय माताजी श्रीमती हीरा
धर्मपत्नी स्वर्गीय रतनसिंह बैंस का स्वर्गवास दिनांक 9 -10-2011 को हो गया है।
बारहवां रस्म पगड़ी कार्यक्रम दिनांक 20-10-2011 को हमारे निवास स्थान पर होगा।
निवेदक-
पुत्र पुत्रवधु   करणीपालसिंह सेवानिवृत रेलकर्मी - श्रीमती शिमला,
पौत्र करणीनन्दनसिंह, विजयसिंह,योगेन्द्र प्रतापसिंह, रविप्रताप सिंह
पौत्री दामाद    ममता- जगमालसिंह,ललिता- नरेन्द्रसिंह चौहान।
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पुत्र पुत्रवधु   करणीदानसिंह- श्रीमती विनीता सर्यवंशी
पौत्र          योगेन्द्र प्रतापसिंह, रविप्रताप सिंह
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पुत्र पुत्रवधु   गोपसिंह पूर्व पार्षद- श्रीमती रोमिला
पौत्र    परमवीरसिंह, चन्द्रकान्तङ्क्षसह, पौत्री भानुकंवर
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पुत्र पुत्रवधु  प्रेमसिंह अध्यक्ष गैर अनुदानित शिक्षण संस्थाएं - श्रीमती संजीव कंवर,
पौत्र    विक्रमादित्यसिंह, कुं. विश्वेन्द्रसिंह।
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पुत्री दामाद     विद्या-विजयसिंह चौहान,
दोहिता दोहिता वधु   अजयसिंह-पियंका
दोहिती दामाद   मालती- वीरेन्द्रङ्क्षसह पंवार, अनीता- हर्षपालसिंह जादौन
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पुत्री दामाद   हेम-रतनसिंह
दोहिता दोहिता वधु  विक्रमसिंह-मोनिका
दोहिती दामाद  सीमा- महावीरसिंह तोमर, अनीता-आनन्दसिंह पंवार
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निवेदक
करणी प्रेस इंडिया वेब साईट सूरतगढ़,                भारतीय समाचार केन्द्र सूरतगढ़
राजपूत टेलिकॉम सूरतगढ़,                                 करणी विज्ञापन एजेंसी सूरतगढ़,
सूर्यवंशी उच्च माध्यमिक विद्यालय सूरतगढ़
मोबा. 94143 81356,  94144 79309  
निवास स्थान- नजदीक सूर्यवंशी उच्च माध्यमिक विद्यालय, वार्ड नं 19, लाईनपार, सूरतगढ़।
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Thursday, October 13, 2011

नगरपालिका अध्यक्ष बनवारीलाल मेघवाल प्रकरण: बलात्कार के मुकद्दमें में सीडी की जांच रिपोर्ट मिलते ही कार्यवाही

पीडि़ता ने अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक को बताया कि धमकियां मिल रही है जिससे वह संकट में है
पुलिस की प्राथमिकी में एक साल पहले भी जान का खतरा बताते हुए सुरक्षा की मांग की जो आज तक नहीं की गई
करणीदानसिंह राजपूत
सूरतगढ़,13 अकटूबर 2011. नगरपालिका अध्यक्ष बनवारीलाल मेघवाल पर अनुसूचित जाति की बाजीगर महिला के साथ बलात्कार के मुकद्दमें में सीडी की प्रयोगशाला रिपोर्ट मिलते ही कार्यवाही होगी। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक यादराम सांसल ने पीडि़ता से 12 अकटूबर को यहां थाने में इस पूरे प्रकरण के बारे में जानकारी प्राप्त की। पीडि़ता ने पुलिस अधिकारी को बताया कि उसे निरंतर धमकियां मिल रही है जिससे वह संकट में है। वह पहले भी अपनी सुरक्षा की मांग कर चुकी है। यहां तक की पीडि़ता के अदालत में दिए इस्तगासे के बाद पुलिस में दर्ज हुई प्राथमिकी में भी जान की सुरक्षा की मांग की गई थी। पुलिस ने अभी तक उसकी सुरक्षा के बाबत कुछ भी प्रबंध नहीं किया है। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ने भी रात को करीब साढ़े नौ बजे सिटी थाने में पीडि़ता को बुलवाया और सीआई के कक्ष में उससे पूछताछ की गई। पुलिस पीडि़ता से कितनी ही बार पूछताछ कर चुकी है। राजस्थान में भंवरी देवी के अपहरण प्रकरण और उसकी बरामदगी अब तक नहीं होने के बाद तो यहां पीडि़ता की सुरक्षा का दायित्व और अधिक हो जाता है, लेकिन पुलिस ने किसी भी प्रकार से सुरक्षा नहीं की है। अब पीडि़ता ने यह बात पुन: कह दी है।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ने पीडि़ता को बताया कि उसके द्वारा दी गई सीडी फोरंसिक लैब में भेजी हुई है और उसकी जांच रिपोर्ट मिलते ही कार्यवाही हो जाएगी। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक इसके अलावा अधिकारी ने कोई बात नहीं की ना जानकारी दी। केवल इतनी बात बताने को ही अधिकारी आए कि सीडी की जांच रिपोर्ट मिलते ही कार्यवाही करदी जाएगी। असल में इतनी बात के लिए ही आने की बात जंचती नहीं है। लगता है कि पुलिस अभी भी ढ़ीली ही चल रही है और मुख्यमंत्री से पीडि़ता के मिलने के बाद अठारह दिन बीत चुके हैं। पुलिस को भय सता रहा है कि पीडि़ता फिर से मुख्यमंत्री के पास जा सकती है इसलिए अधिकारी ने यह सूचना दी है कि कार्यवाही हो रही है। लेकिन केवल इतने कह देने से तो पीडि़ता को न्याय शीघ्र नहीं मिल जाएगा।
पीडि़ता के 26 सितम्बर को मुख्यमंत्री आवास में हंगामा करने के बाद कार्यवाही में कुछ हलचल मची थी। पीडि़ता ने रोते हुए कहा कि न्याय नहीं मिलने वाले इन हालात में वह कोई अनहोनी कर बैठेगी। पीडि़ता ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पैर पकड़ लिए और दर्दनाक हालात बताए कि प्रकरण दर्ज हुए साल हो रहा है तथा वह न्याय के लिए तीसरी बार सीएम हाऊस आई है। पीडि़ता का आरोप था कि पुलिस उसके प्रकरण में जांच को दबा रही है। पीडि़ता ने लिखित में एक शिकायती पत्र भी मुख्यमंत्री को दिया था।
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Monday, October 10, 2011

मरणोपरांत श्रीमती हीरा के नेत्र दान किए गए पत्रकार करणीदानसिंह राजपूत की माताजी का अंतिम संस्कार

पत्रकार करणीदानसिंह राजपूत की माताजी का अंतिम संस्कार
कल्याण भूमि सूरतगढ़ में 10 अक्टूबर को अंतिम संस्कार
अंतिम संस्कार में नागरिक, व्यापारी, वकील, राजैतिक नेता, कार्यकर्ता पत्रकार  शिक्षण संस्थाओं के संचालक  शामिल हुए
मरणोपरांत श्रीमती हीरा के नेत्र दान किए गए
सूरतगढ़, 10 अक्टूबर 2011.
वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक करणीदानसिंह राजपूत की माता श्रीमती हीरा पत्नी स्व.रतनसिंह का स्वर्गवास करीब 87 साल की आयु में 9 अक्टूबर शाम को स्वर्गवास हो गया। उनका अंतिम संस्कार सोमवार 10 अक्टूबर 2011 को कल्याण भूमि जजी के पास में किया जाएगा। अंतिम यात्रा
वार्ड नं 19 से सूर्यवंशी स्कूल के पास निवास से सुबह 10 बजे निकली। अंतिम अंतिम संस्कार में परिजन व रिश्तेदार, नागरिक, व्यापारी, वकील, राजैतिक नेता व कार्यकर्ता,अध्यापक व शिक्षण संस्थाओं के संचालक, पत्रकार शामिल हुए। अंतिम संस्कार में पूर्व राज्यमंत्री रामप्रताप कासनिया, पूर्व विधायक अशोक नागपाल, पूर्व विधायक गुरूशरण छाबड़ा, पूर्व विधायक हरचंदसिंह सिद्धु, श्री बिजयनगर नगरपालिका के अध्यक्ष सुशील मिढ़ा, राजस्थान पत्रिका श्रीगंगानगर के प्रबंधक अरविन्द पाण्डेय और प्रसार प्रभारी अशोक शर्मा,राजपूत क्षत्रिय संघ के अध्यक्ष लालसिंह बीका ने भी भाग लिया। श्रीमती हीरा के बड़े पुत्र करणीपालसिंह ने मुखाग्रि दी।
श्रीमती हीरा के मरणोपरांत उनके नेत्रों का दान किया गया। महावीर इंटरनेशनल के संजय बैद,नीरज शंकर मूंधड़ा आदि पहुंचे। डा. नन्दलाल वर्मा ने नेत्र उत्सारित किए जो महावीर इंटरनेशनल ने श्रीगंगानगर श्री जगदम्बा धर्माेर्थ नेत्र चिकित्सालय भिजवाए। जीवन भर दान पुन्य तीर्थ करने वाली श्रीमती हीरा के अंतिम सांस लेने के तुरंत बाद ही एक और दान उनके नेत्रों का हुआ। नेत्र दान के लिए पुत्रों करणीपालसिंह करणीदानसिंह गोपसिंह और प्रेमसिंह ने स्वीकृति दी। प्रेमसिंह लेखक हैं और सूरतगढ़ में ही उच्च माध्यमिक विद्यालय संचालित करते हैं। बड़े पुत्र करणीपालसिंह सेवानिवृत रेल कर्मी और गोपसिंह पूर्व पार्षद हैं।
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Friday, October 7, 2011

हमारा ताज कश्मीर है जिसे भूले बैठे हो और आगरा के ताज की चिंता है

करणी की बात: काल चक्र-6
हमारा ताज कश्मीर है जिसे भूले बैठे हो और आगरा के ताज की चिंता है
                खबर आई कि आगरा का ताज नष्ट हो जाएगा। उसकी नींव में लगी लक्कडिय़ां पानी नहीं मिलने से नष्ट होने लगी है। सडऩे लगी है। उसकी मरम्मत जल्दी नहीं हुई तो वह नष्ट हो जाएगा। विदेशी पर्यटकों के आने की बहुतायत है और उनको बाद में हम क्या दिखलाएंगे? यमुना के किनारे बना हुआ ताज महल। बेगम मुमताज महल की यादगार में बादशाह शाहजहां का बनाया हुआ ताज महल। कई बार विवाद भी होते रहे हैं कि यह शाहजहां का बनवाया हुआ भी नहीं है। महल में कभी कब्रें नहीं होती और जहां कब्रें होती हैं उनको महल नहीं कहा जाता। बड़े लोगों की कब्र जहां होती हे जहां उन्हें दफनाया हुआ होता है उनको मकबरा कहा जाता है। कुछ इसे हिन्दु राजा का बनाया हुआ बतलाते हैं।
    अभी इसके निर्माण पर बहस का कोई मुद्दा नहीं है। अभी एक विषय है कि यमुना किनारे का ताज नष्ट होने के कगार पर है। उसकी कई स्थानों पर दरारें आ चुकी है। पत्थर खंडित हो रहे हैं। ताजा खबर यह आई है कि उसकी नींव में लगी लक्कडिय़ां खराब होने लगी हैं। बड़े अखबारों और चैनलों पर यह अहम खबर के रूप में परोसी गई है। देश की सरकार पुरातत्व विभाग बहुत चिंतित है। ताज के नष्ट होने से हमारे महान देश का पर्यटन उद्योग पर बुरा असर पड़ेगा। मानो हमारा यह भारत देश पर्यटकों के टकड़ो पर ही जिंदा हो।
    सरकार को आगरा के ताज की सदा से चिंता रही है। सोचने का विषय यह है कि हमारे देश का ताज कश्मीर है। भारत माता मुकुट है। उस ताज की उस मुकुट की हमें चिंता नहीं है। वहां पर रोजाना ही कुछ न कुछ गड़बड़ी होती रहती है। आंतककारियों के अतिक्रमण आम लोगों पर सुरक्षा सैनिकों पर होते रहते हैं। उस ताज की हमें कोई चिंता क्यों नहीं है? उस ताज के दो टुकड़े कर दिए गए तथा एक टुकड़े का नाम पाकिस्तान सरकार ने आजाद कश्मीर रख दिया। देश की स्वतंत्रता के कुछ समय बाद की यह घटना भूल गए। इसके बाद भी पाकिस्तान ने दो बार आक्रमण करके उस ताज के कुछ हिस्से को और दबा गया। वहां से हजारों पंडित परिवारों को सब कुछ छोड़ कर निकलना पड़ा। वे कश्मीरी पंडित परिवार बीस पचीस सालों से दर दर की ठोकरें खाते घूम रहे हैं। उनका पूरा ओर आने वाली पीढिय़ों का जीवन नष्ट हो गया। उनकी सरकार को कोई चिंता नहीं है। देश का असली ताज तो कश्मीर है वह आधा हमारे पास नहीं है। उसकी चिंता नहीं। सरकार तुष्टिकरण की नीति पर चल रही है। कश्मीरी पंडितों के परिवारों की चिंता नहीं है, मगर बांग्ला देश से जबरन देश में घुस आए बांग्लावासियों की चिंता है। उनके लिए सहारा कैंप हैं। उनको निकाले जाने पर कोई विचार नहीं करना चाहता। उल्टा उनके वोट तक बना दिए गए। यह हैं हमारी ताज नीति।
करणीदानसिंह राजपूत
राजस्थान सरकार द्वारा अधिस्वीकृत पत्रकार
94143 81356

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