रविवार, 21 अगस्त 2011

अन्ना जी का संघर्ष, हमारी बदल सकेगा जीवन शैली

कविता


अन्ना जी का संघर्ष,हमारी बदल सकेगा जीवन शैली

 
कविराज मुंशीराम कम्बोज
 

अन्ना जी का संघर्ष,हमारी बदल सकेगा जीवन शैली

धीरे धीरे उज्ज्वल होगी,अबतक हुई जो गंगा मैली
संविधान की मर्यादा पर भी,लगा हुआ है काला दाग
भ्रष्टाचार मिटाना है तो,हम सब की हो एक आवाज
लूटपाट  है  गली गली में,   दिल्ली हो  या रायबरेली
अन्ना जी का संघर्ष,हमारी बदल सकेगा जीवन शैली
आज भ्रष्टाचार के कारण, दुनियां में हम हैं बदनाम
खुल जाए दुनियां की आँखें, ऐसी एक निकालो रैली
अन्ना जी का संघर्ष,हमारी बदल सकेगा जीवन शैली
खुद जागो औरों को जगाओ,मत करना अब इसमें देरी
सोये रहने  से  मेरे  भाई,  कटेगी कैसे ये रात अंधेरी
लाखों भूख प्यास से व्याकुल,कुर्सी निगल गई सब थैली
अन्ना जी का संघर्ष,हमारी बदल सकेगा जीवन शैली
भ्रष्टाचार मचाने वाला,आम जनों का दर्द क्या जाने
मुंशी,अन्ना जी आए हैं, भारत मां का दर्द मिटाने
जनता पल में सबक सिखा दे,भाड़ न फोड़े कोई एकेली
अन्ना जी का संघर्ष,हमारी बदल सकेगा जीवन शैली

कविराज मुंशीराम कम्बोज

ग्राम मानेवाला, तहसील- सूरतगढ़ राजस्थान

मोबा. 97837 92692

कविराज मुंशीराम कम्बोज ने यह कविता 16 अगस्त 2011 को रची, जिस दिन से अन्ना जी का आंदोलन शुरू हुआ था। प्रस्तुतकर्ता- करणीदानसिंह राजपूत




कविराज मुंशीराम कम्बोज सूरतगढ़ में करनाणी धर्मशाला में यह ओजस्वी कविता सुनाते हुए
फोटो करणीदानसिंह राजपूत
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