Monday, April 18, 2011

ईच्छापूर्ण बालाजी सरदारशहर और सालासर बालाजी का दर्शन

ईच्छापूर्ण बालाजी मंदिर
बालाजी के दर्शन से पहले विशाल घंटे को बजाने की उत्सुकता
ईच्छापूर्ण बालाजी
सालासर के बाला जी वहां पर जोत तैयार किए जाने वाले धूणे के दर्शन
भक्तशिरोमणि मीरा और स्वामी विवेकानन्द की प्रतिमाएं
बालाजी जयंती चैत्र पूर्णिमा पर खास
ईच्छापूर्ण बालाजी सरदारशहर और सालासर बालाजी का दर्शन
करणीदानसिंह राजपूत
सूरतगढ़,18 अप्रेल। भगवान खुद जब दर्शन देना चाहते हैं तब कोई आधार बन जाता है। एक महत्वपूर्ण सामाजिक दायित्व का कार्य था जब दोनों मदिरों के दर्शन हुए और हम सामने बालाजी को पाकर गदगद हुए। अवसर था गर्भस्थ शिक्षु संरक्षण समिति राजस्थान का नागौर जिले के डीडवाना कस्बे में 27 और 28 फरवरी 2011 का अद्र्धवार्षिक सम्मेलन। सूरतगढ़ की इकाई के अध्यक्ष परसराम भाटिया,प्रचारमंत्री किशनलाल स्वामी, महावीर प्रसाद भोजक, इससे जुड़े हुए पत्रकार साथी मनोजकुमार स्वामी संवाददाता पंजाब केसरी,संजय चौधरी टीवी 99 के संवाददाता,मैं स्वयं करणीदानसिंह राजपूत स्वतंत्र पत्रकार और नेतृत्व था अशोक वशिष्ठ का जो इस समिति के प्रदेश समिति के सदस्य हैं।
    सताईस फरवरी को दोपहर में सूरतगढ़ से रवाना होते ही बात हो गई कि सरदारशहर में नए बने हुए ईच्छापूर्ण बालाजी मंदिर में दर्शन करके आगे रवाना होंगे। भव्य मंदिर में प्रवेश ही अपने आप में दर्शन ही होता है। मंदिर कक्ष में बालाजी के दर्शन से पहले विशाल घंटे को बजाने की उत्सुकता को कोई भी रोक नहीं पाया। सभी ने उस घंटे को बजा कर बाला जी से विनती की कि हम दर्शन को आए हैं। बालाजी की भव्य प्रतिमा के दर्शन के बाद मन ही नहीं करता कि वहां से लौटा जाए। मंदिर विशाल क्षेत्र में फैला हुआ और सुंदर बगीचा। एक तरफ मन्नौतियों के चढ़ाये हुए नारियल हजारों की संख्या में लाल वस्त्र में लपेट कर रखे हुए। जलपान की व्यवस्था मंदिर के प्रांगण में ही है जहां पर सभी सुविधाएं भी है। जब हम लोग दर्शन को पहुंचे तब सैंकड़ों अन्य श्रद्धालु भी आए हुए थे। श्रद्धालु बाला जी   के दर्शन कर स्वयं को भाग्यवान मान रहे थे।
    अठाईस फरवरी को सम्मेलन के बाद राय बनी कि वापसी में सालासर होते हुए चलेंगे। बाबा ने यह ईच्छा भी पूरी की। सालासर के बाला जी के दर्शन करते हुए अपने अपने दिल की बातें रखते हुए लोटे। वहां पर जोत तैयार किए जाने वाले धूणे के दर्शन भी किए। सालासर में मंदिर के पास ही स्वामी विवेकानन्द और भक्तशिरोमणि मीरा की प्रतिमाएं भी दर्शनीय हैं।
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एम.ए.
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